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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Bhopal News ›   MP News: Water is life, not a mere statement, CM said - Campaign to conserve water sources from June 5

MP News: जल ही जीवन है, कोरा घोष वाक्य नहीं, सीएम बोले- जल स्रोतों के संरक्षण का अभियान पांच जून से

Sun, 26 May 2024 07:59 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Sun, 26 May 2024 07:59 PM IST
सार


मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पांच जून पर्यावरण दिवस से गंगा दशमी तक जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए अभियान चलाया जाएगा। नदी, कुआं, तालाब, बावड़ी आदि को स्वच्छ रखने के लिए जनभागीदारी से कार्यक्रम होंगे। 
 

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MP News: Water is life, not a mere statement, CM said - Campaign to conserve water sources from June 5
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव। - फोटो : amar ujala

विस्तार

प्रदेश में पांच जून पर्यावरण दिवस से गंगा दशमी पर्व तक जलस्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए अभियान चलाया जाएगा। 10 दिन हर जिले में जल के स्रोतों, जैसे नदी, कुआं, तालाब, बावड़ी आदि को साफ स्वच्छ रखने और आवश्यकता होने पर उनके गहरीकरण के लिए गतिविधियां संचालित की जाएंगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह कार्य समाज की भागीदारी से होगा। इससे जल स्रोतों के प्रति समाज की चेतना जागृत करने और जनसामान्य का जल स्रोतों से जीवंत संबंध विकसित करने में मदद मिलेगी। गंगा दशमी पर्व मां गंगा का अवतरण दिवस है और मां गंगा से ही भारतीय संस्कृति  विश्व में जानी जाती है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में इस अभियान का नेतृत्व जनप्रतिनिधि करेंगे और जिला कलेक्टर गतिविधियों का समन्वय करेंगे।  
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मुख्यमंत्री ने सभी सामाजिक, शासकीय, अशासकीय संस्थाओं, जनअभियान परिषद से जुड़े संगठनों से अभियान में शामिल होने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि जनसहभगिता से जल संरचनाओं का चयन किया जाए और जल स्रोतों के संरक्षण के लिए सघन जनजागृति के कार्यक्रम चलाए जाएं। इससे भविष्य के लिए जल संरक्षण के संबंध में कार्य योजना बनाने में मदद मिलेगी। इस अवधि में होने वाले धार्मिक मान्यताओं के कार्यक्रम जैसे उज्जैन की शिप्रा परिक्रमा, चुनरी उत्सव, नर्मदा जी के किनारे होने वाले धार्मिक कार्यक्रम भी पूरी श्रद्धा के साथ आयोजित किए जाएं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 212 से अधिक नदियां हैं, हमारी पेयजल की आपूर्ति करने में नदियां, बावड़ियां, कुएं व तालाब महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, "जल ही जीवन है" केवल घोष वाक्य नहीं है, यह जल स्रोतों की हमारे जीवन में भूमिका से स्पष्ट होता है।  हमारी यह पीढ़ी इन जल संरचनाओं की महत्ता से परिचित हो, हमारा संबंध जल संरचनाओं से अधिक प्रगाढ़ हो, यही इस अभियान  का उद्देश्य है। 
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जल संरचनाओं से हटाया जाएगा अतिक्रमण 
मुख्यमंत्री ने कहा कि अभियान के दौरान नदियों और तालाबों से गाद या खाद के रूप में निकलने वाली मिट्टी, किसानों को खेतों में उपयोग के लिए उपलब्ध कराई जाएगी। जल संरचनाओं के अतिक्रमणों को जिला प्रशासन के माध्यम से मुक्त कराया जाएगा। ऐसे स्थानों को समाज के लिए संरक्षित किया जाएगा। अभियान के संबंध में अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। प्रारंभिक रूप से यह अभियान 5 से 15 जून तक चलाया जाएगा। इसके बाद अभियान की अवधि बढ़ाई जा सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आशा है कि इस वर्ष पर्यावरण दिवस से गंगा दशमी तक सबकी सहभागिता के साथ पेयजल स्रोतों के संरक्षण के लिए प्रभावी कार्य होंगे, जो हमें गौरवान्वित होने का अवसर प्रदान करेंगे। 
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दो विभाग होंगे नोडल 
नमामि गंगे परियोजना के नाम से आरंभ हो रहे जलस्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन के विशेष अभियान के लिए ग्रामीण क्षेत्र में पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा नगरीय क्षेत्र में नगरीय विकास एवं आवास, नोडल विभाग होंगे। जल संरचनाओं के चयन और उन्नयन कार्य में जीआईएस तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इन स्थलों की मोबाइल एप के माध्यम से जियो-टैगिंग की जाएगी। सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से जल संरचनाओं के आसपास स्वच्छता बनाए रखने, जल संरचनाओं के किनारों पर अतिक्रमण रोकने के लिए फेंसिंग के रूप में वृक्षारोपण करने जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाएगा और जल संरचनाओं के किनारों पर बफर जोन तैयार कर उन्हें हरित क्षेत्र या पार्क के रूप में विकसित किया जाएगा। जल संरचनाओं में मिलने वाले गंदे पानी के नाले-नालियों को स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत डायवर्सन उपरांत शोधित कर जल संरचनाओं में छोड़ा जाएगा।  


रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के लिए चलेगा जागरूकता अभियान
राज्य शासन द्वारा अमृत 2.0 योजना के तहत जल संरचनाओं के उन्नयन का कार्य सर्वोच्च प्राथमिकता से कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत नदी, झील, तालाब, कुओं, बावड़ी आदि के पुनर्जीवीकरण/ संरक्षण व संरचनाओं के उन्नयन का कार्य स्थानीय सामाजिक, प्रशासकीय संस्थाओं के साथ मिलकर जनभागीदारी से कराए जाएंगे। प्रयास होगा कि जल संरचनाओं का उपयोग जल प्रदाय अथवा पर्यटन, भू-जल संरक्षण, मत्स्य पालन अथवा सिंघाड़े के उत्पादन के लिए भी किया जा सके। रिहायशी इलाकों में बंद पड़े रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की साफ-सफाई कर उनके पुन: उपयोग के लिए जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। निकायों को नाले-नालियों की साफ-सफाई, वाटर ड्रेनिंग मैनेजमेंट, घाट निर्माण, वृक्षारोपण जैसी गतिविधियों के संबंध में भी विस्तृत निर्देश दिए गए हैं।
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