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MP News: 2019 से कम और 2014 से अधिक वोटिंग, यानी मार्जिन घटेगा और टक्कर बराबरी की

Sat, 20 Apr 2024 08:10 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Sat, 20 Apr 2024 08:10 PM IST
सार


मध्य प्रदेश में पहले चरण की 6 सीटों पर शुक्रवार को 67.62 प्रतिशत मतदान हुआ। इसने भाजपा की चिंता बढ़ा दी है तो कांग्रेस के लिए उम्मीद जगा दी है।

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MP News: Voting is less than 2019 and more than 2014, meaning margin will decrease and competition will be equ
मध्य प्रदेश लोकसभा चुनाव। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदेश में लोकसभा चुनाव के प्रथम चरण में शुक्रवार को सीधी, जबलपुर, शहडोल, मंडला, बालाघाट और छिंदवाड़ा सीट पर 67.62 % मतदान हुआ। यह 2014 के 67.37 प्रतिशत से अधिक और 2019 के 71.36 प्रतिशत मतदान से कम है। सीधी को छोड़कर सभी पांच सीटों पर 2014 के मुकाबले अधिक मतदान दर्ज हुआ है। भले ही 2019 के मुकाबले यह आंकड़ा कुछ कम रह गया हो। खास बात यह है कि 2014 और 2019 में इन छह में से छिंदवाड़ा को छोड़कर शेष पांच सीटों पर भाजपा का कब्जा था। 2014 और 2019 में मतदान के प्रतिशत के साथ ही भाजपा की जीत का अंतर भी बढ़ा था। भाजपा के सांसद दो से पांच लाख वोटों के अंतर से जीते थे। यदि 2024 में वोट का प्रतिशत 2019 से कम है तो निश्चित तौर पर मार्जिन घटेगा और कुछ सीटों पर जीत-हार करीबी हो सकती है। इसका फायदा विपक्षी पार्टी को मिल सकता है। वहीं, वरिष्ठ पत्रकार प्रभु पटैरिया का कहना है कि मतदान प्रतिशत कम ज्यादा होना मौसम और अन्य कारणों पर भी निर्भर होता है। एंटी इंकम्बैंसी जैसी कोई लहर नहीं होना भी इसका एक कारण है। दूसरा कारण मतदाता का भाव न्यूट्रल हो जाता है कि वह जिसको वोट देना चाहता है कि वह जीत ही रहा है तो उसका वोट देने के प्रति रुझान कम हो जाता है। राजनीतिक दलों और चुनाव आयोग के लिए मतदान प्रतिशत का काम होना चिंता का कारण जरूरी है, लेकिन इससे यह अनुमान नहीं लगा सकते कि किसी राजनीतिक दल को फायदा हो रहा है या किसी राजनीतिक दल को नुकसान हो रहा है।
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छिंदवाड़ा में भी मामूली गिरावट
छिंदवाड़ा संसदीय सीट पर 2019 की तुलना में 2.56 प्रतिशत कम यानी 79.83 प्रतिशत मतदान हुआ है। 6 सीटों पर सबसे अधिक मतदान छिंदवाड़ा सीट पर ही हुआ है। यहां पर पूर्व सीएम कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ और भाजपा प्रत्याशी बंटी साहू चुनाव लड़ रहे हैं। इस सीट पर लंबे समय से कांग्रेस का कब्जा है। पिछली बार दो प्रतिशत वोटिंग बढ़ने से मार्जिन घट गया था। इस बार दो प्रतिशत मतदान कम हुआ है। वहीं, विधानसभा चुनाव में सातों विधानसभा सीटें कांग्रेस ने जीती थीं। ऐसे में यहां पर दोनों ही प्रत्याशियों के बीच हार जीत का अंतर बहुत कम रहने की संभावना है।
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सीधी में 13 प्रतिशत कम
सीधी संसदीय सीट पर 2019 की तुलना में 13 प्रतिशत कम यानी 56.50 प्रतिशत मतदान हुआ है। सीधी में भाजपा के डॉ. राजेश मिश्रा और कांग्रेस के कमलेश्वर पटेल चुनाव लड़ रहे हैं। यहां पर भाजपा के बागी पूर्व सांसद अजय प्रताप सिंह गोंगपा से चुनाव लड़ रहे हैं। इस सीट पर आठ में से सिर्फ एक चुरहट सीट कांग्रेस के पास है। यहां कम वोटिंग से मुकाबला कड़ा हो गया है। इस सीट पर हार-जीत का अंतर बहुत कम रह सकता है।
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शहडोल में 11.01 प्रतिशत कम
शहडोल संसदीय सीट पर 2019 की तुलना में करीब 11.01 प्रतिशत कम यानी 63.73% मतदान हुआ है। यहां पर मुकाबला भाजपा की हिमाद्री सिंह और कांग्रेस के फुंदेलाल मार्को के बीच है। पिछले दो चुनाव में जीत हिमाद्री सिंह ने जीत हासिल की थी। 2019 में मत प्रतिशत बढ़ने भाजपा करीब चार लाख वोट से जीती थी, जबकि उप चुनाव 2016 में 67.68 प्रतिशत मतदान हुआ था। जिसमें सिर्फ 60 हजार वोटों से हिमाद्री सिंह चुनाव जीती थी। इस सीट पर 8 विधानसभा सीटों में से सात भाजपा और एक कांग्रेस के पास है। अब वोट प्रतिशत कम होने से हार जीत का अंतर इस सीट पर बहुत कम रह सकता है।

जबलपुर में 8.37 प्रतिशत कम मतदान
जबलपुर संसदीय सीट पर 2019 की तुलना में करीब 8.37 प्रतिशत कम मतदान यानी 61.06 प्रतिशत हुआ है। यहां पर भाजपा के आशीष दुबे और कांग्रेस के दिनेश यादव आमने-सामने हैं। इस सीट पर भाजपा पिछले चुनाव करीब साढ़े चार लाख वोटों से जीती थी। उसके पहले भी भाजपा एक लाख से अधिक वोटों के अंतर से चुनाव जीतते आ रही है। यहां पर 1996 से भाजपा का कब्जा है। वहीं, विधानसभा चुनाव में भी आठ में कांग्रेस सिर्फ एक जबलपुर पूर्व जीत सकी थी। यहां बड़ी टक्कर जैसा देखने को नहीं मिलेगा।

मंडला में 4.92 प्रतिशत कम मतदान
मंडला संसदीय सीट पर 2019 की तुलना में करीब 4.92 प्रतिशत कम मतदान यानी 72.84 प्रतिशत हुआ है। आदिवासी सीट पर भाजपा के फग्गन सिंह कुलस्ते और कांग्रेस के ओमकार सिंह मरकाम के बीच मुकाबला है। इस सीट 1996 से भाजपा से भाजपा का कब्जा है। 2009 को चुनाव छोड़ दें तो फग्गन सिंह कुलस्ते लगातार 6 बार चुनाव जीतते आ रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में आठ में से पांच सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है। इस बार वोटिंग कम होने से कांटे की टक्कर हो गई है। ऐसे में किसी भी पार्टी को फायदा मिल सकता है।


बालाघाट में 4.11 प्रतिशत कम
बालाघाट संसदीय सीट पर 2019 की तुलना में 4.11 प्रतिशत कम यानी 73.50 प्रतिशत मतदान हुआ है। इस सीट पर भाजपा की भारती पारधी और कांग्रेस के सम्राट सरास्वर चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं, पूर्व सांसद कंकर मुंजारे ने बसपा की तरफ से चुनाव लड़ मुकाबला रोचक बना दिया है। कंकर मुंजारे की पत्नी अनुभा मुंजारे कांग्रेस से बालाघाट से विधायक हैं। इस सीट पर आठ विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के पास चार-चार सीट हैं। इस सीट पर कम मतदान से फाइट बराबर की हो गई है।


बीते तीन चुनावों का मतदान प्रतिशत
                  2014      2019       2024
शहडोल      62.20     74.73       63.72
जबलपुर     58.53     69.43       61.06
मंडला        66.71     77.76      72.84
बालाघाट     68.21     77.61      73.50
छिंदवाड़ा    79.05     82.39      79.83
सीधी          56.86     69.50       56.50
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