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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Bhopal News ›   MP News: This time also the path to Saudi Rubat is not easy, Haji will be disappointed again

MP News: आसान नहीं इस बार भी सऊदी रुबात की राह, हाजी फिर होंगे मायूस, जानें क्या है मामला

Wed, 05 Feb 2025 09:26 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: दिनेश शर्मा Updated Wed, 05 Feb 2025 09:26 PM IST
सार

भोपाल, सीहोर और रायसेन के हज यात्री इस साल भी मदीना रूबात में नहीं ठहर पाएंगे। कानूनी विवाद के चलते 2019 से यह सुविधा बंद है। हाजियों में नाराजगी है, जबकि वक्फ बोर्ड ने सरकार और विदेश मंत्रालय को पत्र लिखकर समाधान की मांग की है।

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MP News: This time also the path to Saudi Rubat is not easy, Haji will be disappointed again
इस साल भी हाजी मदीना की रुबात (धर्मशाला) नहीं रुक पाएंगे। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

हज के मुकद्दस सफर पर इस साल स्टेट हज कमेटी के मार्फतजाने वाले पूर्व रियासत (भोपाल, सीहोर और रायसेन) के हज यात्रियों के लिए बुरी खबर है। शाही औकाफ की लापरवाही और नाकामी चलते इस साल भी हाजी मदीना की रुबात (धर्मशाला) नहीं रुक पाएंगे। पिछले छह साल से हाजी मदीना रुबात में ठहरने के लिए इंतजार कर रहे हैं। कानूनी दांव-पेंच में फंसी रूबात में साल 2019 के बाद हाजी नहीं ठहर पा रहे हैं।
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इस साल हज पर जा रहे हाजियों में खासी नाराजगी है। शहर की सियासी और सामाजिक इदारों (संस्थाओं) के ओहदेदारों ने कहा है कि इस मामले के लिए सिर्फ और सिर्फ शाही औकाफ के ओहदेदार जिम्मेदार है, उलेमाओं ने तो यहां कह दिया कि हाजियों के साथ हो रही इस नाइंसाफी पर अल्लाह कभी जिम्मेदारों को माफ नहीं करेगा। स्टेट हज कमेटी की जानिब से जाने वाले भोपाल, सीहोर और रायसेन के हज यात्रियों का मक्का रुबात के लिए तो कुर्रा (लॉटरी) होती है, लेकिन मदीना में सभी हाजियों को रूबात मिल जाती थी। मदीना में चार मंजिल की चार इमारते हैं। मक्का के लिए कुर्रा इसलिए किया जाता था कि यहां 210 लोगों के ठहरने की ही जगह है। लगभग 14 सौ हाजियों में से 200 का चुनाव (चयन) लॉटरी से किया जाता है। हाजियों को दोनों जगह (मक्का-मदीना) में रूबात मिल जाती है तो हन खर्चे में काफी रियायत मिल जाती है। तकरीबन डेढ़ लाख रुपए का फायदा एक हाजी को हो जाता है।
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आठ माह बाद कुछ नहीं कर पाई नई कमेटी
पिछले साल मई में मप्र वक्फ बोर्ड की सख्ती के बाद शाही औकाफ की मुतावली सबा सुल्तान ने कमेटी को भंग कर दूसरी कमेटी गठित कर दी थी। औकाफ-ए-शाही के प्रबंधक मंडल में बदलाव किए गए थे। तीन सदस्यीय नई कमेटी में सिकंदर हफीज खान, शादाब रहमान और अब्दुल मुक्तदिर खान को शामिल किया गया था। मजे की बात यह है कि यहां पर एक मैनेजर नियुक्त कर दिया गया है, जो शाही औकाफ का काम देख रहा है। कमेटी के सदस्यों की यहां आमद और रफ्त नजर नहीं आती।
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क्या है विवाद
मदीना रूबात में शाही औकाफ की मुतावल्ली सबा सुल्तान के नाजिर वकील (केयरटेकर) के रूप में सऊदी अलमदनी सोहेल नामक एक व्यक्ति रूबात की देख-रेख करने का काम करता था। उसे शाही औकाफ की कमेटी के सदस्यों के आपसी विवाद में हटा दिया गया था। कई बार सऊदी (हय्यतुल औकाफ, मदीना कोर्ट) इस मामले को लेकर मुनावल्ली को पेश होने के लिए संमन जारी हुए लेकिन कोई पेश नहीं हुआ। इसके बाद वहां की कोर्ट ने मदीना रूबात की मुतावल्ली सबा सुल्तान मानने से इंकार कर दिया। 2018 में सील कर दिया।

इनका कहना है 

मदीना रूबात में ठहरने और खाने की व्यवरथा शाही औकाफ द्वारा की जाती है। हज कमेटी से सिर्फ हाजियों की लिस्ट मांगी जाती है। रूबात का हज कमेटी से कोई लेना-देना नहीं रहता।


रफत वारसी,
अध्यक्ष, मप्र राज्य हज कमेटी 

मप्र वक्फ बोर्ड ने हाजियों को मदीना रूबात में ठहरने और खाने की व्यवस्था करने के लिए सीएम से लेकर विदेश मंत्रालय तक पत्र लिखा है। हम सबकी पूरी कोशिश है कि इस बार हाजी मदीना रूबात में ठहरे। शाही औकाफ को भी पत्र लिखकर एक बार फिर कहा है कि नई कमेटी बने सालभर गुजर गया है, आपने इस मामले में कुछ नहीं किया है।
डॉ सनव्वर पटेल,
अध्यक्ष, मप्र वक्फ बोर्ड 

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