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MP News: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सीएस अनुराग जैन को भेजा नोटिस, पूर्व मंत्री से जुड़ा है मामला

Sat, 23 Aug 2025 09:32 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Sat, 23 Aug 2025 09:32 PM IST
सार

सागर जिले के बारदा गांव में अवैध क्रशर प्लांट हादसे में 14 वर्षीय बालक के हाथ गंवाने की घटना पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मध्यप्रदेश सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है। आयोग ने मामले में कार्रवाई न करने पर सागर कलेक्टर और एसपी को घोर लापरवाह करार देते हुए मुख्य सचिव अनुराग जैन को नोटिस जारी किया है। 

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MP News: NHRC sent notice to CS in crusher accident case of former minister Bhupendra Singh's nephew, sought r
एनएचआरसी ने सीएस अनुराग जैन को भेजा नोटिस - फोटो : ANI

विस्तार

सागर जिले के बारदा गांव में अवैध क्रशर प्लांट में करंट लगने से 14 वर्षीय बच्चे के गंभीर रूप से झुलसने और हाथ कटवाने की नौबत आने के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने राज्य शासन को कठघरे में खड़ा किया है। आयोग ने घटना पर कार्रवाई न करने पर सागर कलेक्टर संदीप जीआर और एसपी को घोर लापरवाह बताते हुए नाराजगी जताई है और मुख्य सचिव अनुराग जैन को नोटिस जारी किया है। इसमें 23 अगस्त तक जवाब मांगा है। हालांकि यह पत्र अब सार्वजनिक हुआ हैं। 
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बच्चे को करंट लगने से गंवाना पड़ा हाथ
1 जनवरी 2025 को बीना थाना क्षेत्र के बारदा गांव में क्रशर प्लांट के पास हाईटेंशन लाइन खुले तारों के साथ छोड़ दी गई थी। उसी दौरान 14 वर्षीय मानस शुक्ला इसकी चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस गया और उसे अपना हाथ गंवाना पड़ा। परिजनों का आरोप है कि क्रशर प्लांट पूर्व मंत्री और खुरई विधायक भूपेंद्र सिंह ठाकुर और उनके भांजे लखन सिंह ठाकुर का है और यह अवैध खनन के लिए संचालित किया जा रहा था।
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FIR दर्ज नहीं करने पर आयोग की सख्ती
मानवाधिकार आयोग ने कहा कि घटना की जानकारी होने के बावजूद पुलिस और प्रशासन ने पांच माह तक टालमटोल किया और FIR दर्ज नहीं की। यह प्रशासनिक और पुलिसीय दायित्वों की गंभीर चूक है। आयोग ने डीजीपी को FIR कराने के निर्देश दिए हैं और राज्य सरकार से पूछा है कि मानस शुक्ला के परिजनों को 10 लाख रुपये की सहायता राशि क्यों न दी जाए।

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कलेक्टर और एसपी पर कार्रवाई की अनुशंसा
आयोग ने इस मामले में सागर कलेक्टर की भूमिका को सबसे अधिक लापरवाही भरी मानते हुए कहा है कि उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को पत्र क्यों न लिखा जाए। आयोग ने यह भी कहा कि घटना स्थल का तत्काल निरीक्षण नहीं किया गया, जिससे साक्ष्यों का संरक्षण नहीं हो सका और भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के उपाय नहीं हो पाए।

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सत्ता के दुरुपयोग का आरोप
मानवाधिकार आयोग ने इस पूरे प्रकरण को सत्ता के दुरुपयोग और जनता के भरोसे से खिलवाड़ बताया है। आयोग ने यह भी उल्लेख किया है कि विधायक भूपेंद्र सिंह ने झूठे आरोपों वाले पत्र भेजकर जांच प्रभावित करने की कोशिश की। आयोग ने साफ कहा कि शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत न करने की दलील असमर्थनीय है।

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