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MP News: मकान मालिक-किरायेदार विवाद सुलझाने के लिए सरकार लाएगी मॉडल टेनेंसी एक्ट
Wed, 11 Jun 2025 08:35 AM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Wed, 11 Jun 2025 08:35 AM IST
सार
प्रदेश सरकार किरायादारी संबंधी विवादों के न्यायिक समाधान के उद्देश्य से "मॉडल टेनेंसी एक्ट" लागू करने की तैयारी में है। यह कानून न केवल शहरी बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी प्रभावी होगा, जिससे संपत्ति स्वामियों और किरायेदारों- दोनों के अधिकार और दायित्व स्पष्ट रूप से तय हो सकेंगे।
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वल्लभ भवन, भोपाल
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
प्रदेश सरकार मकान मालिकों और किरायेदारों के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवादों के समाधान के लिए मॉडल टेनेंसी एक्ट (एमटीए) लाने जा रही है। इस प्रस्ताव को विधि विभाग से मंजूरी मिल चुकी है और अब इसे मुख्य सचिव की अध्यक्षता में वरिष्ठ सचिवों की बैठक में रखा जाएगा। वहां स्वीकृति मिलने के बाद इसे आगामी कैबिनेट बैठक में पेश किया जाएगा। सरकार का इरादा है कि यह अधिनियम विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पारित किया जाए। यह कानून शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में लागू होगा, जबकि वर्तमान में प्रदेश में लागू मप्र परिसर किरायादारी अधिनियम-2010 केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित है।
किराया विवाद निपटाने के लिए तीन स्तरीय तंत्र
मॉडल टेनेंसी एक्ट (एमटीए) के तहत राज्य में तीन स्तरों पर न्यायिक व्यवस्था का गठन किया जाएगा। इसमें किराया प्राधिकरण, जिसकी अध्यक्षता अपर कलेक्टर रैंक का अधिकारी करेगा। किराया न्यायालय, जिसकी जिम्मेदारी एडीएम रैंक के अधिकारी को दी जाएगी। किराया ट्रिब्यूनल, जिसमें अतिरिक्त जिला न्यायाधीश या जिला न्यायाधीश स्तर के अधिकारी होंगे। इन संस्थाओं के निर्णय के बाद ही कोई मामला सिविल न्यायालय में ले जाया जा सकेगा। सभी सदस्य लोक सेवक माने जाएंगे। सरकार का मानना है कि मौजूदा अधिनियम में संपत्ति मालिकों के हितों की पर्याप्त रक्षा न होने से वे अपनी संपत्तियां किराए पर देने में संकोच करते हैं।
बहुराष्ट्रीय कंपनियों को भी लाया जाएगा दायरे में
नए एक्ट के दायरे में आयोग, अंतरराष्ट्रीय संगठन, बहुराष्ट्रीय कंपनियां और उनके किरायेदार भी आएंगे। मौजूदा अधिनियम में इन्हें छूट मिली हुई थी। इसके अलावा, मकान मालिक या किरायेदार की मृत्यु होने पर यह कानून उनके उत्तराधिकारियों पर भी लागू होगा। वहीं, एमटीए में प्रॉपर्टी एजेंटों को कानूनी मान्यता दी जाएगी। उन्हें संबंधित जिले के कलेक्ट्रेट कार्यालय में पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही उनकी जिम्मेदारियां और दायित्व भी तय किए जाएंगे।
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बिना अनुमति निर्माण पर कार्रवाई
किरायेदार अब कोई भी अतिरिक्त निर्माण या फेरबदल नहीं कर सकेगा। यदि वह ऐसा करता है तो उसे बेदखल किया जा सकेगा और जमा राशि या अग्रिम किराए से नुकसान की भरपाई की जाएगी। आवासीय परिसर में अधिकतम दो महीने का अग्रिम किराया लिया जा सकेगा। गैर-आवासीय परिसर में यह सीमा छह महीने की होगी।
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किराया विवाद निपटाने के लिए तीन स्तरीय तंत्र
मॉडल टेनेंसी एक्ट (एमटीए) के तहत राज्य में तीन स्तरों पर न्यायिक व्यवस्था का गठन किया जाएगा। इसमें किराया प्राधिकरण, जिसकी अध्यक्षता अपर कलेक्टर रैंक का अधिकारी करेगा। किराया न्यायालय, जिसकी जिम्मेदारी एडीएम रैंक के अधिकारी को दी जाएगी। किराया ट्रिब्यूनल, जिसमें अतिरिक्त जिला न्यायाधीश या जिला न्यायाधीश स्तर के अधिकारी होंगे। इन संस्थाओं के निर्णय के बाद ही कोई मामला सिविल न्यायालय में ले जाया जा सकेगा। सभी सदस्य लोक सेवक माने जाएंगे। सरकार का मानना है कि मौजूदा अधिनियम में संपत्ति मालिकों के हितों की पर्याप्त रक्षा न होने से वे अपनी संपत्तियां किराए पर देने में संकोच करते हैं।
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बहुराष्ट्रीय कंपनियों को भी लाया जाएगा दायरे में
नए एक्ट के दायरे में आयोग, अंतरराष्ट्रीय संगठन, बहुराष्ट्रीय कंपनियां और उनके किरायेदार भी आएंगे। मौजूदा अधिनियम में इन्हें छूट मिली हुई थी। इसके अलावा, मकान मालिक या किरायेदार की मृत्यु होने पर यह कानून उनके उत्तराधिकारियों पर भी लागू होगा। वहीं, एमटीए में प्रॉपर्टी एजेंटों को कानूनी मान्यता दी जाएगी। उन्हें संबंधित जिले के कलेक्ट्रेट कार्यालय में पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही उनकी जिम्मेदारियां और दायित्व भी तय किए जाएंगे।
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बिना अनुमति निर्माण पर कार्रवाई
किरायेदार अब कोई भी अतिरिक्त निर्माण या फेरबदल नहीं कर सकेगा। यदि वह ऐसा करता है तो उसे बेदखल किया जा सकेगा और जमा राशि या अग्रिम किराए से नुकसान की भरपाई की जाएगी। आवासीय परिसर में अधिकतम दो महीने का अग्रिम किराया लिया जा सकेगा। गैर-आवासीय परिसर में यह सीमा छह महीने की होगी।
