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MP News: सांपों की गिनती को लेकर वन विभाग असमंजस में, अब डब्ल्यूआईआई को दिशा निर्देश के लिए लिखेगा पत्र

Sat, 03 May 2025 06:55 AM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Sat, 03 May 2025 06:55 AM IST
सार

मुख्यमंत्री द्वारा राज्य में सांपों की संख्या निर्धारित करने की इच्छा जताए जाने के बाद वन विभाग असमंजस की स्थिति में है। वैज्ञानिक पद्धतियों की कमी और सांपों की भूमिगत तथा गुप्तचर प्रवृत्ति के कारण विभाग अब विशेषज्ञ संस्थानों से मार्गदर्शन प्राप्त करने की तैयारी कर रहा है। 

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MP News: Forest department is confused about counting snakes, now it will write a letter to WII for guidelines
सांप - फोटो : Freepik

विस्तार

मुख्यमंत्री के प्रदेश में सांपों की संख्या तय करने के लिए उनकी गिनती कराने की मंशा जाहिर किए जाने के बाद वन विभाग उलझन में है। दरअसल, सांपों की गणना को लेकर न तो कोई स्थापित वैज्ञानिक पद्धति है और न ही अब तक दुनिया में इस तरह की कोई व्यापक पहल हुई है। यही कारण है कि विभाग फिलहाल इस मुद्दे पर स्पष्ट दिशा-निर्देश पाने के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) से संपर्क करने की तैयारी में है।
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वन विभाग के अधिकारियों  ने बताया कि वह इस मामले में  डब्ल्यूआईआई को एक आधिकारिक पत्र भेजा जाएगा, जिसमें पूछा जाएगा कि सांपों की गणना किन वैज्ञानिक तरीकों से की जा सकती है और क्या यह संभव भी है या नहीं। विशेषज्ञों के अनुसार, सीमित या नियंत्रित क्षेत्रों- जैसे एक हेक्टेयर तक में सांपों की अनुमानित संख्या आंकी जा सकती है, लेकिन राज्य जैसे व्यापक भौगोलिक क्षेत्र में यह कार्य अत्यंत जटिल और लगभग असंभव है। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि सांप गुप्तचर और अक्सर भूमिगत जीवन जीने वाले जीव हैं, जिनकी गतिविधियों को ट्रैक करना बेहद कठिन होता है। सांपों की उपस्थिति और घनत्व को लेकर आमतौर पर अप्रत्यक्ष सर्वेक्षण विधियों जैसे कैमरा ट्रैप, पर्यवेक्षण व रिपोर्टिंग सिस्टम, और डीएनए सैंपलिंग का सहारा लिया जाता है, लेकिन ये सभी विधियां भी सीमित दायरे में ही कारगर होती हैं।
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वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, सांप छिपकर रहने वाले और रात्रिचर जीव हैं, जिनकी उपस्थिति को ट्रैक करना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। कुछ सीमित प्रयास जरूर हुए हैं-जैसे कि ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में संरक्षित क्षेत्रों में सांपों की आबादी का आकलन करने के लिए कैमरा ट्रैप, रेडियो टेलीमेट्री और पर्यवेक्षण पद्धतियों का उपयोग किया गया है। लेकिन ये प्रयास भी स्थानीय और नियंत्रित क्षेत्रों तक ही सीमित रहे हैं।

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भारत में भी कुछ संरक्षित क्षेत्रों जैसे साइलेंट वैली (केरल) या काजीरंगा (असम) में सांपों की विविधता का अध्ययन किया गया है, लेकिन यह संख्या-आधारित नहीं बल्कि प्रजाति विविधता और उपस्थिति पर केंद्रित रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि सांपों की गिनती के लिए कोई सटीक प्रत्यक्ष पद्धति उपलब्ध नहीं है। हालांकि, अप्रत्यक्ष आकलन जैसे डीएनए मेटाबारकोडिंग, स्कैट विश्लेषण और पर्यावरणीय डीएनए के माध्यम से उनकी उपस्थिति का पता लगाया जा सकता है, लेकिन ये भी महंगे और तकनीकी रूप से जटिल विकल्प हैं।
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