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MP News: सीएम मोहन यादव बोले- मध्य प्रदेश में भगवान श्री कृष्ण से जुड़े धाम होंगे तीर्थ स्थल के रूप में विकसित
Fri, 23 Aug 2024 05:17 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Fri, 23 Aug 2024 05:17 PM IST
सार
मध्य प्रदेश सरकार ने भगवान श्री कृष्ण से संबंधित प्रमुख स्थलों सांदीपनि आश्रम, नारायण धाम, अमझेरा धाम और जानापाव धाम को तीर्थ स्थल के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। इस घोषणा के दौरान डॉ. मोहन यादव ने मध्य प्रदेश को भगवान श्री कृष्ण और भगवान श्री राम के पावन वास स्थल के रूप में वर्णित किया।
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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि सांदीपनि आश्रम वह स्थान है जहां भगवान श्री कृष्ण ने कंस का वध करने के बाद शिक्षा ग्रहण की थी। यही कारण है कि यह स्थल भारतीय संस्कृति में एक विशेष स्थान रखता है। इसके अलावा, नारायण धाम वह पावन भूमि है जहां भगवान कृष्ण और उनके मित्र सुदामा की मुलाकात हुई थी, जो गरीबी और अमीरी की मित्रता का श्रेष्ठ उदाहरण है। धार जिले के पास अमझेरा धाम वह स्थल है जहां भगवान श्री कृष्ण ने रुक्मिणी हरण के दौरान रुक्मी को युद्ध में पराजित किया था। इसके साथ ही, जानापाव वह स्थान है जहां भगवान ने परशुराम जी से विनम्रता और श्रद्धा के साथ सुदर्शन चक्र प्राप्त किया था।
धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन सभी स्थलों का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है, जो भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं को जीवंत करते हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी आग्रह किया कि जन्माष्टमी के पावन अवसर पर इन धामों को स्मरण किया जाए और उसके बाद भी इन स्थलों को तीर्थ के रूप में मान्यता दी जाए।
शिक्षा, वीरता और विनम्रता का महत्व
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि इस इतिहास से हमें सीखना चाहिए कि चाहे व्यक्ति गरीब हो या अमीर, उसे शिक्षा ग्रहण करने, वीरता धारण करने और विनम्रता बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए। ये स्थल उन मूल्यों को संजोए हुए हैं जो आज भी समाज के लिए प्रासंगिक हैं।
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धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन सभी स्थलों का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है, जो भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं को जीवंत करते हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी आग्रह किया कि जन्माष्टमी के पावन अवसर पर इन धामों को स्मरण किया जाए और उसके बाद भी इन स्थलों को तीर्थ के रूप में मान्यता दी जाए।
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शिक्षा, वीरता और विनम्रता का महत्व
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि इस इतिहास से हमें सीखना चाहिए कि चाहे व्यक्ति गरीब हो या अमीर, उसे शिक्षा ग्रहण करने, वीरता धारण करने और विनम्रता बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए। ये स्थल उन मूल्यों को संजोए हुए हैं जो आज भी समाज के लिए प्रासंगिक हैं।
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