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MP News: सीएम डॉ. यादव बोले- सायबर पंजीयन कार्यालय से पेपरलेस और कैशलेस प्रक्रिया को बढ़ावा
Mon, 16 Feb 2026 07:44 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Mon, 16 Feb 2026 07:44 PM IST
सार
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सायबर पंजीयन कार्यालय की शुरुआत कर प्रदेश में पेपरलेस और कैशलेस रजिस्ट्री व्यवस्था लागू की। अब 75 से ज्यादा सेवाएं घर बैठे वीडियो-केवाईसी के जरिए पूरी की जा सकेंगी, जिससे समय और पैसे की बचत होगी।
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सीएम डॉ. मोहन यादव और डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोमवार को पंजीयन भवन में सायबर पंजीयन कार्यालय का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता, नवाचार और सुशासन को प्राथमिकता दे रही है। सायबर पंजीयन व्यवस्था इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे पेपरलेस और कैशलेस प्रक्रिया को बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है, जहां लोन, मुख्तयारनामा, माइनिंग लीज, हलफनामा, पावर ऑफ अटॉर्नी और पार्टनरशिप डीड सहित 75 से अधिक सेवाओं का सायबर पंजीयन शुरू किया गया है। इससे लोगों को पंजीयन कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वीडियो-केवाईसी सहित पूरी प्रक्रिया घर बैठे पूरी की जा सकेगी। उन्होंने बताया कि शासन और उसके उपक्रमों के अंतरण दस्तावेज भी अब पेपरलेस तरीके से पंजीकृत होंगे। हाउसिंग बोर्ड और विकास प्राधिकरण से जुड़े मामलों में भी नागरिकों को कार्यालय आने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे समय और धन दोनों की बचत होगी।
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स्वर्ण पुरस्कार गर्व की बात
मुख्यमंत्री ने कहा कि संपदा 2.0 को वर्ष 2025 का राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस स्वर्ण पुरस्कार मिलना प्रदेश के लिए गर्व की बात है। अब तक 14 लाख 95 हजार से अधिक दस्तावेजों का पंजीयन इस प्रणाली के माध्यम से किया जा चुका है। 55 जिलों में सायबर तहसील परियोजना लागू है, जिसके तहत नामांतरण और राजस्व बंटवारे की प्रक्रिया भी डिजिटल माध्यम से संभव हुई है। उपमुख्यमंत्री एवं वाणिज्यिक कर मंत्री जगदीश देवड़ा ने बताया कि वर्ष 2024-25 में संपदा 2.0 सॉफ्टवेयर लागू किया गया, जिससे चल-अचल संपत्ति के दस्तावेजों का डिजिटल और त्रुटिरहित पंजीयन संभव हुआ है। गुना, हरदा, रतलाम और डिंडौरी जिलों में इसका सफल पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया था। कार्यक्रम में प्रमुख सचिव अमित राठौर, प्रमुख सचिव राघवेंद्र सिंह और महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक अमित तोमर उपस्थित रहे। जिलों के अधिकारी, बैंककर्मी और लाभार्थी वर्चुअली कार्यक्रम से जुड़े।
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स्वर्ण पुरस्कार गर्व की बात
मुख्यमंत्री ने कहा कि संपदा 2.0 को वर्ष 2025 का राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस स्वर्ण पुरस्कार मिलना प्रदेश के लिए गर्व की बात है। अब तक 14 लाख 95 हजार से अधिक दस्तावेजों का पंजीयन इस प्रणाली के माध्यम से किया जा चुका है। 55 जिलों में सायबर तहसील परियोजना लागू है, जिसके तहत नामांतरण और राजस्व बंटवारे की प्रक्रिया भी डिजिटल माध्यम से संभव हुई है। उपमुख्यमंत्री एवं वाणिज्यिक कर मंत्री जगदीश देवड़ा ने बताया कि वर्ष 2024-25 में संपदा 2.0 सॉफ्टवेयर लागू किया गया, जिससे चल-अचल संपत्ति के दस्तावेजों का डिजिटल और त्रुटिरहित पंजीयन संभव हुआ है। गुना, हरदा, रतलाम और डिंडौरी जिलों में इसका सफल पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया था। कार्यक्रम में प्रमुख सचिव अमित राठौर, प्रमुख सचिव राघवेंद्र सिंह और महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक अमित तोमर उपस्थित रहे। जिलों के अधिकारी, बैंककर्मी और लाभार्थी वर्चुअली कार्यक्रम से जुड़े।
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