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MP News: पार्वती-कालीसिंध-चंबल-ERCP लिंक परियोजना के करार पर हुए हस्ताक्षर, एमपी को मिलेगा 1800 एमसीएम पानी
Sun, 28 Jan 2024 11:26 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Sun, 28 Jan 2024 11:26 PM IST
सार
प्रदेश की 3.75 लाख हेक्टेयर जमीन सिंचित होगी। इसमें सात डेम बनेंगे और एमपी के 13 जिलों को होगा फायदा। यह परियोजना 6-7 साल में पूरी होगी।
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सीएम डॉ. मोहन यादव का राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने किया स्वागत
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश और राजस्थान के लोगों को पार्वती, कालीसिंध और चंबल नदियों के पानी का भरपूर लाभ मिलेगा।इस मुद्दे पर रविवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ जयपुर में चर्चा की। इस विषय पर केंद्र सरकार के सहयोग से निर्णय लिया जाएगा।
पार्वती-कालीसिंध-चंबल-ERCP लिंक परियोजना के त्रिपक्षीय समझौते पर एमपी, राजस्थान और केंद्र सरकार के बीच हस्ताक्षर हुए। इस पर सीएम डॉ. मोहन यादव बोले लिंक परियोजना पश्चिमी मध्य प्रदेश के लिए वरदान होगी। इससे दोनों राज्यों के लाखों किसानों को फायदा होगा। रविवार को श्रमशक्ति भवन स्थित जल शक्ति मंत्रालय के कार्यालय में एमओयू पर हस्ताक्षर हुए। यह परियोजना 6 से 7 साल में पूरी होगी। इस पर 33 हजार करोड़ की राशि मध्य प्रदेश और 37 हजार करोड़ रुपए की राशि राजस्थान खर्च करेंगी। इसमें 90 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार देगी। योजना के पूरे होने पर मध्य प्रदेश को प्रतिवर्ष 1800 एमसीएम पानी मिलेगा। इससे 13 जिलों की 3.75 लाख हेक्टेयर जमीन सिंचित होगी।
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मध्य प्रदेश, राजस्थान और केंद्र सरकार के बीच रविवार को श्रमशक्ति भवन स्थित जल शक्ति मंत्रालय के कार्यालय में संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल-ईआरसीपी लिंक परियोजना के त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा की उपस्थिति में सचिव, केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय देबाश्री मुखर्जी, मध्य प्रदेश के अपर मुख्य सचिव, जल संसाधन डॉ. राजेश राजौरा और राजस्थान के अपर मुख्य सचिव, जल संसाधन अभय कुमार ने करार पर हस्ताक्षर किए।
दो दशक से लंबित परियोजना साकार होगी
समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित होने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगभग दो दशकों से लंबित पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना अब मूर्त रूप ले सकेगी। इस परियोजना से मध्यप्रदेश के चंबल और मालवा अंचल के 13 जिलों को लाभ पहुंचेगा। प्रदेश के ड्राई बेल्ट जिलों जैसे मुरैना, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, भिंड और श्योपुर में पानी की उपलब्धता बढ़ेगी और औद्योगिक बेल्ट वाले जिलों जैसे इंदौर, उज्जैन, धार, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास और राजगढ़ के औद्योगीकरण को और बढ़ावा मिलेगा। प्रदेश के मालवा और चंबल अंचल में लगभग तीन लाख हेक्टेयर का सिंचाई रकबा बढ़ेगा। इन अंचलों के धार्मिक और पर्यटन केंद्र भी विकसित होंगे।
75 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे
मुख्यमंत्री ने बताया कि यह परियोजना 5 से 6 वर्ष से कम समय में पूरी होगी। इस पर करीब 75 हजार करोड़ रुपए खर्च होगी। इसके पूरे होने पर प्रदेश की करीब 1.5 करोड़ आबादी को लाभ होगा। यह परियोजना प्रदेश की गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा, जैसी समस्याओं का समाधान कर प्रदेशवासियों के जीवन स्तर में सुधार लाएगी।
केन बेतवा के बाद यह दूसरा लिंक प्रोजेक्ट
देश में अब तक दो रिवर लिंक प्रोजेक्ट स्वीकृत हुए हैं। ये दोनों प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश में है। पहला केन बेतवा रिवर लिंक प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच है। दूसरा मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी प्रोजेक्ट है।
स्वर्णिय सूर्योदय का दिन : शेखावत
इस मौके पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि आज का दिन मध्य प्रदेश और राजस्थान के पानी की कमी वाले 26 जिलों के लिए स्वर्णिम सूर्योदय का दिन है। परियोजना से लगभग 5.60 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई के साथ ही बांधों और बड़े तालाबों में पानी का संचय कर जल-स्तर उठाने में सफलता प्राप्त होगी। पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना को पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना से एकीकृत कर इसे राष्ट्रीय महत्व की परियोजना का दर्जा देते हुए अत्यंत कम समय में मध्यप्रदेश और राजस्थान राज्यों के बीच सहमति बनी, जिसके लिए दोनों सरकारें बधाई की पात्र हैं। यह परियोजना संघीय संघवाद का स्वर्णिम उदाहरण है।
दोनों राज्यों को फायदा : सीएम शर्मा
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने कहा कि इस परियोजना से राजस्थान और मध्य प्रदेश के चंबल बेसिन के जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करने में मदद होगी। जिससे दोनों राज्यों के औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों को फायदा मिलेगा, और भविष्य में दोनों राज्यों के रिश्ते और प्रगाढ़ होंगे।
कुल 5.60 लाख हेक्टेयर में होगी सिंचाई
त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन में इस लिंक परियोजना के अंतर्गत मध्य प्रदेश और राजस्थान राज्यों में कुल 5.60 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई प्रदान करने के साथ-साथ पूर्वी राजस्थान के 13 जिले और मध्य प्रदेश के मालवा और चंबल क्षेत्र के 13 जिलों में पेयजल और औद्योगिक उपयोग के लिए पानी उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है। समझौता ज्ञापन में लिंक परियोजना के काम का दायरा, पानी का बंटवारा, पानी का आदान-प्रदान, लागत और लाभ का बंटवारा, कार्यान्वयन तंत्र और चंबल बेसिन में पानी के प्रबंधन और नियंत्रण की व्यवस्था शामिल की गई हैं।
फरवरी 2004 में बनी थी संभाव्यता रिपोर्ट
बता दें है कि पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना की फिजिबिलिटी रिपोर्ट यानी संभाव्यता रिपोर्ट फरवरी 2004 में तैयार की गई थी तथा वर्ष 2019 में राजस्थान सरकार द्वारा आरसीपी का प्रस्ताव लाया गया था। वर्तमान समझौता ज्ञापन में दोनों परियोजनाओं को एकीकृत कर दिया गया है।
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पार्वती-कालीसिंध-चंबल-ERCP लिंक परियोजना के त्रिपक्षीय समझौते पर एमपी, राजस्थान और केंद्र सरकार के बीच हस्ताक्षर हुए। इस पर सीएम डॉ. मोहन यादव बोले लिंक परियोजना पश्चिमी मध्य प्रदेश के लिए वरदान होगी। इससे दोनों राज्यों के लाखों किसानों को फायदा होगा। रविवार को श्रमशक्ति भवन स्थित जल शक्ति मंत्रालय के कार्यालय में एमओयू पर हस्ताक्षर हुए। यह परियोजना 6 से 7 साल में पूरी होगी। इस पर 33 हजार करोड़ की राशि मध्य प्रदेश और 37 हजार करोड़ रुपए की राशि राजस्थान खर्च करेंगी। इसमें 90 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार देगी। योजना के पूरे होने पर मध्य प्रदेश को प्रतिवर्ष 1800 एमसीएम पानी मिलेगा। इससे 13 जिलों की 3.75 लाख हेक्टेयर जमीन सिंचित होगी।
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मध्य प्रदेश, राजस्थान और केंद्र सरकार के बीच रविवार को श्रमशक्ति भवन स्थित जल शक्ति मंत्रालय के कार्यालय में संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल-ईआरसीपी लिंक परियोजना के त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा की उपस्थिति में सचिव, केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय देबाश्री मुखर्जी, मध्य प्रदेश के अपर मुख्य सचिव, जल संसाधन डॉ. राजेश राजौरा और राजस्थान के अपर मुख्य सचिव, जल संसाधन अभय कुमार ने करार पर हस्ताक्षर किए।
दो दशक से लंबित परियोजना साकार होगी
समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित होने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगभग दो दशकों से लंबित पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना अब मूर्त रूप ले सकेगी। इस परियोजना से मध्यप्रदेश के चंबल और मालवा अंचल के 13 जिलों को लाभ पहुंचेगा। प्रदेश के ड्राई बेल्ट जिलों जैसे मुरैना, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, भिंड और श्योपुर में पानी की उपलब्धता बढ़ेगी और औद्योगिक बेल्ट वाले जिलों जैसे इंदौर, उज्जैन, धार, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास और राजगढ़ के औद्योगीकरण को और बढ़ावा मिलेगा। प्रदेश के मालवा और चंबल अंचल में लगभग तीन लाख हेक्टेयर का सिंचाई रकबा बढ़ेगा। इन अंचलों के धार्मिक और पर्यटन केंद्र भी विकसित होंगे।
75 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे
मुख्यमंत्री ने बताया कि यह परियोजना 5 से 6 वर्ष से कम समय में पूरी होगी। इस पर करीब 75 हजार करोड़ रुपए खर्च होगी। इसके पूरे होने पर प्रदेश की करीब 1.5 करोड़ आबादी को लाभ होगा। यह परियोजना प्रदेश की गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा, जैसी समस्याओं का समाधान कर प्रदेशवासियों के जीवन स्तर में सुधार लाएगी।
केन बेतवा के बाद यह दूसरा लिंक प्रोजेक्ट
देश में अब तक दो रिवर लिंक प्रोजेक्ट स्वीकृत हुए हैं। ये दोनों प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश में है। पहला केन बेतवा रिवर लिंक प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच है। दूसरा मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी प्रोजेक्ट है।
स्वर्णिय सूर्योदय का दिन : शेखावत
इस मौके पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि आज का दिन मध्य प्रदेश और राजस्थान के पानी की कमी वाले 26 जिलों के लिए स्वर्णिम सूर्योदय का दिन है। परियोजना से लगभग 5.60 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई के साथ ही बांधों और बड़े तालाबों में पानी का संचय कर जल-स्तर उठाने में सफलता प्राप्त होगी। पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना को पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना से एकीकृत कर इसे राष्ट्रीय महत्व की परियोजना का दर्जा देते हुए अत्यंत कम समय में मध्यप्रदेश और राजस्थान राज्यों के बीच सहमति बनी, जिसके लिए दोनों सरकारें बधाई की पात्र हैं। यह परियोजना संघीय संघवाद का स्वर्णिम उदाहरण है।
दोनों राज्यों को फायदा : सीएम शर्मा
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने कहा कि इस परियोजना से राजस्थान और मध्य प्रदेश के चंबल बेसिन के जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करने में मदद होगी। जिससे दोनों राज्यों के औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों को फायदा मिलेगा, और भविष्य में दोनों राज्यों के रिश्ते और प्रगाढ़ होंगे।
कुल 5.60 लाख हेक्टेयर में होगी सिंचाई
त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन में इस लिंक परियोजना के अंतर्गत मध्य प्रदेश और राजस्थान राज्यों में कुल 5.60 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई प्रदान करने के साथ-साथ पूर्वी राजस्थान के 13 जिले और मध्य प्रदेश के मालवा और चंबल क्षेत्र के 13 जिलों में पेयजल और औद्योगिक उपयोग के लिए पानी उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है। समझौता ज्ञापन में लिंक परियोजना के काम का दायरा, पानी का बंटवारा, पानी का आदान-प्रदान, लागत और लाभ का बंटवारा, कार्यान्वयन तंत्र और चंबल बेसिन में पानी के प्रबंधन और नियंत्रण की व्यवस्था शामिल की गई हैं।
फरवरी 2004 में बनी थी संभाव्यता रिपोर्ट
बता दें है कि पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना की फिजिबिलिटी रिपोर्ट यानी संभाव्यता रिपोर्ट फरवरी 2004 में तैयार की गई थी तथा वर्ष 2019 में राजस्थान सरकार द्वारा आरसीपी का प्रस्ताव लाया गया था। वर्तमान समझौता ज्ञापन में दोनों परियोजनाओं को एकीकृत कर दिया गया है।
