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MP News: पूर्व बिशप पीसी सिंह के खिलाफ 2.45 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला दर्ज, ईओडब्ल्यू ने केस दर्ज किया
Wed, 09 Apr 2025 09:34 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Wed, 09 Apr 2025 09:34 PM IST
सार
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने जबलपुर में 2.45 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में पूर्व बिशप पीसी सिंह और नागपुर डायोसिस ट्रस्ट एसोसिएशन (एनडीटीए) के चेयरमेन भीमराव पॉल दुपारे के खिलाफ FIR दर्ज की है। आरोप है कि दोनों ने रेलवे द्वारा अधिग्रहित भूमि के मुआवजे की राशि को फर्जी तरीके से हड़प लिया।
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ईओडब्ल्यू
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) जबलपुर ने पूर्व बिशप पीसी सिंह और नागपुर डायोसिस ट्रस्ट एसोसिएशन (एनडीटीए) के चेयरमेन भीमराव पॉल दुपारे के खिलाफ 2.45 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। दोनों पर रेलवे द्वारा अधिग्रहित भूमि के मुआवजे की राशि को फर्जी तरीके से हड़पने का आरोप है।
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ईओडब्ल्यू द्वारा की गई जांच में सामने आया कि एनडीटीए के नाम दर्ज कटनी स्थित बास्र्लेय स्कूल की 0.022 हेक्टेयर भूमि को भारतीय रेलवे द्वारा अधिग्रहित किया गया था, जिसके एवज में 2,45,30,830 रुपये का मुआवजा दिया गया। यह राशि एनडीटीए को न देकर फर्जी दस्तावेजों के सहारे बोर्ड ऑफ एजुकेशन सीएनआई जबलपुर डायोसिस के खाते में ट्रांसफर कर दी गई। एनडीटीए एक पंजीकृत ट्रस्ट संस्था है, जो बॉम्बे पब्लिक ट्रस्ट एक्ट के अंतर्गत चेरिटी कमिश्नर, नागपुर के अधीन है। कानून के अनुसार ट्रस्ट की संपत्तियों के विक्रय या मुआवजा प्राप्त करने से पहले चेरिटी कमिश्नर की अनुमति आवश्यक होती है, जो इस मामले में नहीं ली गई। ईओडब्ल्यू ने इस मामले में आईपीसी की धारा 406 (विश्वासघात), 420 (धोखाधड़ी) और 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत अपराध क्रमांक 82/25 के अंतर्गत मामला दर्ज किया है। आरोपियों के विरुद्ध गहन जांच जारी है।
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जालसाजी और आपराधिक षड़यंत्र का खुलासा
पूर्व बिशप पीसी सिंह पर आरोप है कि उन्होंने चेयरमेन पॉल दुपारे के साथ मिलकर एनडीटीए का फर्जी अधिकार पत्र तैयार किया और मुआवजा राशि को डायोसिस के खाते में स्थानांतरित कर गबन कर लिया। यह गबन 16 जनवरी 2021 को किया गया था।
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ईओडब्ल्यू द्वारा की गई जांच में सामने आया कि एनडीटीए के नाम दर्ज कटनी स्थित बास्र्लेय स्कूल की 0.022 हेक्टेयर भूमि को भारतीय रेलवे द्वारा अधिग्रहित किया गया था, जिसके एवज में 2,45,30,830 रुपये का मुआवजा दिया गया। यह राशि एनडीटीए को न देकर फर्जी दस्तावेजों के सहारे बोर्ड ऑफ एजुकेशन सीएनआई जबलपुर डायोसिस के खाते में ट्रांसफर कर दी गई। एनडीटीए एक पंजीकृत ट्रस्ट संस्था है, जो बॉम्बे पब्लिक ट्रस्ट एक्ट के अंतर्गत चेरिटी कमिश्नर, नागपुर के अधीन है। कानून के अनुसार ट्रस्ट की संपत्तियों के विक्रय या मुआवजा प्राप्त करने से पहले चेरिटी कमिश्नर की अनुमति आवश्यक होती है, जो इस मामले में नहीं ली गई। ईओडब्ल्यू ने इस मामले में आईपीसी की धारा 406 (विश्वासघात), 420 (धोखाधड़ी) और 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत अपराध क्रमांक 82/25 के अंतर्गत मामला दर्ज किया है। आरोपियों के विरुद्ध गहन जांच जारी है।
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जालसाजी और आपराधिक षड़यंत्र का खुलासा
पूर्व बिशप पीसी सिंह पर आरोप है कि उन्होंने चेयरमेन पॉल दुपारे के साथ मिलकर एनडीटीए का फर्जी अधिकार पत्र तैयार किया और मुआवजा राशि को डायोसिस के खाते में स्थानांतरित कर गबन कर लिया। यह गबन 16 जनवरी 2021 को किया गया था।
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