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MP News: भोपाल ननि में बड़ा फर्जीवाड़ा, रिटायर्ड IAS, डॉक्टर के मृत बेटों को मजदूर बता निकाल ली अनुदान की राशि
Thu, 13 Jun 2024 10:37 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Thu, 13 Jun 2024 10:37 PM IST
सार
भोपाल नगर निगम में कर्मकार मंडल में पंजीकृत मजदूरों की योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। रिटायर्ड आईएएस, वरिष्ठ डॉक्टर के मृत बच्चों को पहले कूटरचित दस्तावेजों से मजदूर बनाया गया। फिर शासन से मिलने वाली अंत्येष्टि और अनुदान की राशि निकाल ली गई।
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भोपाल नगर निगम
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भोपाल नगर निगम में कर्मकार मंडल में पंजीकृत मजदूरों की योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। रिटायर्ड आईएएस, वरिष्ठ डॉक्टर के मृत बच्चों को पहले कूटरचित दस्तावेजों से मजदूर बनाया गया। फिर शासन से मिलने वाली अंत्येष्टि और अनुदान की राशि निकाल ली गई। इस मामले में लोकायुक्त ने 8 जोनल अधिकारी, 6 वार्ड प्रभारी समेत 17 से अधिक अधिकारी-कर्मचारियों पर आपराधिक षड्यंत्र एवं बेईमानी कर कूटरचित दस्तावेजों से वित्तीय अनियमितता करने की एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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भोपाल लोकायुक्त और नगर निगम की प्रारंभिक जांच में 118 संदिग्ध प्रकरण की जांच की गई। इसमें सिर्फ 23 के ही दस्तावेज मिले। इसकी जांच में सामने आया कि 8 से 9 लोगों के जिंदा होने के बावजूद उनके पहले फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनाए गए और कर्मकार मंडल में पंजीकृत मजदूरों को मृत्यु पर शासन की तरफ से मिलने वाले अंत्येष्टि के 6 हजार रुपये और अनुदान के 2 लाख रुपये की राशि किसी दूसरे के नाम पर निकाल ली गई। सिर्फ सात से आठ ही प्रकरण सत्यापन में सही पाए गए। वहीं, कुछ में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी, वरिष्ठ चिकित्सक समेत कई संपन्न लोगों के बच्चों की मृत्यु होने के बाद फर्जी मजदूरों के दस्तावेज बनाए गए। फिर उनके नाम पर राशि निकाल ली गई। वहीं, 95 प्रकरण में जोनल अधिकारियों ने डीएससी लगाकर ईपीओ जारी किए गए हैं, उनके द्वारा वह नस्तियां उनके कार्यालय में उपलब्ध नहीं होना बताया गया है।
जोनल अधिकारियों पर कार्यवाही करने लिखा
इस मामले में जांच में सामने आया कि जोनल अधिकारियों की अभिरक्षा में नस्तियां थी। इस कारण शासकीय अभिलेख कार्यालय में उपलब्ध न होना/गुम होने के कारण मुख्य जांच कर्ता अधिकारी निधि ने जांच प्रतिवेदन में संबंधित जोनल अधिकारियों पर वैधानिक कार्यवाही करने की अनुशंसा की है। लोकायुक्त डीएसपी संजय शुक्ला ने इस मामले में कहा कि तथ्यों के आधार पर जांच का दायरा आगे बढ़ेगा।
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जांच में यह लापरवाही आई सामने
ऐसे हुआ खुलासा
भोपाल के कम्मू का बाग, 80 फीट रोड निवासी मोहम्मद कमर पिता अब्दुल सबूर ने 19 फरवरी को लोकायुक्त को शिकायत दी थी। उसमें उन्होंने लिखा था कि उनको मृत बता कर भोपाल नगर निगम ने दो लाख रुपये की सहायता राशि किसी सैयद मुस्तफा अली नाम के व्यक्ति के खाते में डाल ली। इस शिकायत की जांच में कई और मामले सामने आए। अब इस मामले में लोकायुक्त ने जांच शुरू कर दी है।
इन अधिकारियों/कर्मचारियों पर एफआईआर
नगर निगम भोपाल द्वारा विभागीय स्तर पर करवाई गई जांच एवं स्थल सत्यापन कार्यवाही में एकत्रित दस्तावेजों और साक्ष्यों तथा विशेष पुलिस स्थाना लोकायुक्त भोपाल की जांच में तत्कालीन जोन-14 के जोनल अधिकारी सत्यप्रकाश बडगैया, तत्कालीन जोन-4 के जोनल अधिकारी परितोष रंजन, जोन-11 के तत्कालीन जोनल अधिकारी अवध नारायण मकोरिया, जोन-19 के तत्कालीन जोनल अधिकारी मयंक जाट, जोन-9 के तत्कालीन जोनल अधिकारी अभिषक श्रीवास्तव, जोन-3 के तत्कालीन जोनल अधिकारी अनिल कुमार शर्मा, जोन-20 के तत्कालीन जोलन अधिकारी सुभाष जोशी, जोन-17 के जोनल अधिकारी मृणाल खरे, वार्ड-35 के तत्कालीन वार्ड प्रभारी अनिल प्रधान, वार्ड-69 के तत्कालीन वार्ड प्रभारी चरण सिंह खंगराले, वार्ड-36 के तत्कालीन वार्ड प्रभारी शिवकुमार गोफनिया, वार्ड-77 के वार्ड प्रभारी सुनील सूर्यवंशी, वार्ड-17 के तत्कालीन वार्ड प्रभारी मनोज राजे,वार्ड-31 के तत्कालीन वार्ड प्रभारी कपिल कुमार बंसल, जोन-9 के कम्प्यूटर ऑपरेटर सुधीर शुक्ला, जोन-18 के कर्मचारी नवेद खान, वार्ड-77 के 29 दिवसीय कर्मचारी रफत अली एवं अन्य एफआईआर दर्ज की गई। साथ ही लोकायुक्त पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
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जोनल अधिकारियों पर कार्यवाही करने लिखा
इस मामले में जांच में सामने आया कि जोनल अधिकारियों की अभिरक्षा में नस्तियां थी। इस कारण शासकीय अभिलेख कार्यालय में उपलब्ध न होना/गुम होने के कारण मुख्य जांच कर्ता अधिकारी निधि ने जांच प्रतिवेदन में संबंधित जोनल अधिकारियों पर वैधानिक कार्यवाही करने की अनुशंसा की है। लोकायुक्त डीएसपी संजय शुक्ला ने इस मामले में कहा कि तथ्यों के आधार पर जांच का दायरा आगे बढ़ेगा।
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जांच में यह लापरवाही आई सामने
- जोनल अधिकारियों ने अपने जोन के अलावा दूसरे जोन के हितग्राहियों का ऑनलाइन लॉगइन कर यानी डीएससी से भुगतान किया।
- भुगतान से पहले हितग्राही का आवेदन एवं उससे संबंधित अभिलेख प्राप्त कर नियमानुसार वार्ड प्रभारी से मृत्यु, हितग्राही का पता प्रमाण, बैंक से संबंधित अभिलेख का सत्यापन एवं प्रतिवेदन प्राप्त किया जाना था, नहीं या।
- भुगतान से संबंधित निर्धारित नस्तियों का संधारण भी नहीं किया गया।
- कई प्रकरणों में दस्तावेजों में हेरफेर कर कूटरचित दस्तावेजों का निर्माण कर भुगतान किया जाना पाया गया।
- त्रुटिपूर्ण या गलत बैंक खातों में भुगतान किए गए।
- भवन संनिर्माण एवं कर्मकार मंडन ने भी प्रकरणों की जांच सही नहीं या की ही नहीं।
- फर्जी हितग्राहियों को अंत्येष्ठी एवं अनुग्रह राशि का भुगतान किया, मृत घोषित मजदूर जीवित पाए गए
- कई श्रमिक एवं हितग्राही जांच में लेख पति पर नहीं मिले।
ऐसे हुआ खुलासा
भोपाल के कम्मू का बाग, 80 फीट रोड निवासी मोहम्मद कमर पिता अब्दुल सबूर ने 19 फरवरी को लोकायुक्त को शिकायत दी थी। उसमें उन्होंने लिखा था कि उनको मृत बता कर भोपाल नगर निगम ने दो लाख रुपये की सहायता राशि किसी सैयद मुस्तफा अली नाम के व्यक्ति के खाते में डाल ली। इस शिकायत की जांच में कई और मामले सामने आए। अब इस मामले में लोकायुक्त ने जांच शुरू कर दी है।
इन अधिकारियों/कर्मचारियों पर एफआईआर
नगर निगम भोपाल द्वारा विभागीय स्तर पर करवाई गई जांच एवं स्थल सत्यापन कार्यवाही में एकत्रित दस्तावेजों और साक्ष्यों तथा विशेष पुलिस स्थाना लोकायुक्त भोपाल की जांच में तत्कालीन जोन-14 के जोनल अधिकारी सत्यप्रकाश बडगैया, तत्कालीन जोन-4 के जोनल अधिकारी परितोष रंजन, जोन-11 के तत्कालीन जोनल अधिकारी अवध नारायण मकोरिया, जोन-19 के तत्कालीन जोनल अधिकारी मयंक जाट, जोन-9 के तत्कालीन जोनल अधिकारी अभिषक श्रीवास्तव, जोन-3 के तत्कालीन जोनल अधिकारी अनिल कुमार शर्मा, जोन-20 के तत्कालीन जोलन अधिकारी सुभाष जोशी, जोन-17 के जोनल अधिकारी मृणाल खरे, वार्ड-35 के तत्कालीन वार्ड प्रभारी अनिल प्रधान, वार्ड-69 के तत्कालीन वार्ड प्रभारी चरण सिंह खंगराले, वार्ड-36 के तत्कालीन वार्ड प्रभारी शिवकुमार गोफनिया, वार्ड-77 के वार्ड प्रभारी सुनील सूर्यवंशी, वार्ड-17 के तत्कालीन वार्ड प्रभारी मनोज राजे,वार्ड-31 के तत्कालीन वार्ड प्रभारी कपिल कुमार बंसल, जोन-9 के कम्प्यूटर ऑपरेटर सुधीर शुक्ला, जोन-18 के कर्मचारी नवेद खान, वार्ड-77 के 29 दिवसीय कर्मचारी रफत अली एवं अन्य एफआईआर दर्ज की गई। साथ ही लोकायुक्त पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
