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MP News: स्लॉटर हाउस गोवंश केस में भोपाल ननि घेरे में, कानूनगो बोले-अब तय हो किस अफसर पर दर्ज हो मुकदमा?

Sat, 10 Jan 2026 04:59 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Sat, 10 Jan 2026 04:59 PM IST
सार

भोपाल के नगर निगम स्लॉटर हाउस में गौवंश वध और गोमांस बिक्री के आरोपों ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने नगर निगम की भूमिका पर सवाल उठाते हुए गहन जांच और कार्रवाई की मांग की है।

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MP News: Bhopal Municipal Corporation under scrutiny in cattle slaughterhouse case; revenue officer says it n
नगर पालिक निगम भोपाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजधानी भोपाल में सरकारी धन से बने नगर निगम के स्लॉटर हाउस में गौवंश वध और गौमांस की पैकिंग कर बिक्री के मामले में नया विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले को लेकर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने सोशल मीडिया पर गंभीर आरोप लगाए हैं और नगर निगम की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। प्रियंक कानूनगो ने सोशल मीडिया पर लिखा कि स्लॉटर हाउस मामले में पकड़े गए असलम चमड़ा के खिलाफ पहले से शिकायत थी कि वह अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को भोपाल लाकर गौकशी कराता है। उन्होंने कहा कि इस शिकायत पर पुलिस को जांच के निर्देश दिए गए थे, लेकिन पुलिस ने असलम के बयान को सही मानते हुए जो रिपोर्ट भेजी, उसके अनुसार स्लॉटर हाउस का संचालन भोपाल नगर निगम द्वारा किया जा रहा है।
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असलम चमड़ा को लकर बोले गहरा है इसका नेटवर्क 
कानूनगो ने सवाल उठाया कि यदि स्लॉटर हाउस नगर निगम के अधीन संचालित हो रहा था, तो फिर अब यह तय किया जाए कि नगर निगम के किस अधिकारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए। उन्होंने इसे गहरे नेटवर्क का हिस्सा बताते हुए कहा कि भोपाल के आदमपुर छावनी क्षेत्र में मृत पशुओं के निष्पादन के लिए लगभग 5 करोड़ रुपये की लागत से बना रेंडरिंग (कार्कस) प्लांट भी इसी असलम चमड़ा के पास है।
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अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों की जांच की मांग 
प्रियंक कानूनगो ने मांग की कि स्लॉटर हाउस और रेंडरिंग प्लांट दोनों को तत्काल असलम चमड़ा से वापस लिया जाए। साथ ही, अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों की गहन जांच कर उन्हें भोपाल से बाहर निकाला जाए। उन्होंने इसे प्रदेश की सुरक्षा, कानून व्यवस्था और धार्मिक भावनाओं से जुड़ा गंभीर मामला बताया। मामले को लेकर अब प्रशासन और नगर निगम की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं और आगे की कार्रवाई पर सबकी नजर बनी हुई है।


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स्लॉटर हाउस से जारी मीट सर्टिफिकेट मिला था
बता दें 17-18 दिसंबर की रात पीएचक्यू के सामने हिंदू संगठनों ने मांस ले जा रहे एक कंटेनर को रोका था। कंटनेर में भोपाल स्लॉटर हाउस से जारी मीट सर्टिफिकेट मिला था, जिसके आधार पर पुलिस ने मांस और कंटेनर दोनों को जाने दिया था। इस कंटेनर से लिए गए मांस के नमूने की जांच में गोमांस की पुष्टि हुई। इसके बाद अब प्रदेश में सियासत भी तेज हो गई। 

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सीएम के निर्देश के बाद पुलिस ने की थी बड़ी कार्रवाई 
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा पदभार ग्रहण करने के पश्चात दिसंबर 2023 में पुलिस मुख्यालय में आयोजित बैठक के दौरान पुलिस को प्रदेश में गौवंश के अवैध परिवहन पर कठोरता से कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई कर बड़ी संख्या में गौवंश वध मामले में केस दर्ज कर आरोपियों को पकड़ा था। पुलिस मुख्यालय ने विगत 10 वर्षों के गौवंश के अवैध परिवहन के ट्रेंड और रूट्स का गहन विश्लेषण कर कार्ययोजना तैयार की। जिसके आधार पर सामने आया कि प्रदेश के दक्षिण व पश्चिम के सीमावर्ती जिले जैसे बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा, बड़वानी, खरगोन, बुरहानपुर, उज्जैन, रतलाम, नीमच आदि जिले गौवंश के अवैध परिवहन से सर्वाधिक प्रभावित हैं। 

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मध्यप्रदेश में गौवंश वध और गौमांस पर सख्त कानून
मध्यप्रदेश में गौवंश के वध और गौमांस के अवैध परिवहन पर कानून के तहत पूरी तरह रोक है। मध्यप्रदेश गौवंश वध प्रतिषेध अधिनियम के अनुसार राज्य में गौवंश और गौमांस को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है और इनके वध, बिक्री और अवैध ढुलाई को अपराध माना गया है। इसके अलावा मध्यप्रदेश कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम के तहत भी गौवंश को मारना पूरी तरह प्रतिबंधित है। वहीं, पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम किसी भी पशु को पीटने, उस पर जरूरत से ज्यादा बोझ डालने, अत्यधिक सवारी कराने या किसी भी तरह की पीड़ा देने पर रोक लगाता है। हाल ही में इन सभी कानूनों के प्रावधानों को लेकर जिले के अधिकारियों को विशेष रूप से जानकारी दी गई और उन्हें इन कानूनों के पालन और कार्रवाई के लिए प्रशिक्षित किया गया है।
 
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