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MP News: एम्स में शुरू होगा स्मार्ट कार्ड पेमेंट मॉडल, सभी विभागों में लगेंगे स्कैनर, लंबी लाइन से मिलेगी राहत
Sun, 09 Nov 2025 06:24 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Sun, 09 Nov 2025 06:24 PM IST
सार
एम्स भोपाल मरीजों की सुविधा के लिए बड़ी डिजिटल बदलावा कर रहा है।इस महीने के अंत तक स्मार्ट कार्ड सिस्टम शुरू होगा, जिससे जांच या इलाज के भुगतान के लिए अब लंबी कतारों में नहीं लगना पड़ेगा।
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एम्स भोपाल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
एम्स भोपाल आने वाले मरीजों को शुल्क जमा कराने में हो रही दिक्कतों से जल्द राहत मिल सकती है। फिलहाल जांच, टेस्ट या अन्य सेवाओं के लिए भुगतान करने मरीजों को बिलिंग काउंटर तक जाना पड़ता है, जहां अक्सर लंबी कतारें लगती हैं। लेकिन अब एम्स प्रबंधन एक नए डिजिटल पेमेंट सिस्टम की ओर बढ़ रहा है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, इस महीने के अंत तक स्मार्ट कार्ड आधारित भुगतान सुविधा शुरू कर दी जाएगी, जिससे मरीजों को काउंटर पर लाइन में लगने की जरूरत नहीं पड़ेगी। प्रत्येक विभाग में स्कैनर लगाए जाएंगे, जहां कार्ड स्कैन कर तुरंत भुगतान किया जा सकेगा।
एसबीआई तैयार कर रहा पूरा डिजिटल सिस्टम
स्मार्ट कार्ड प्रणाली को लागू करने की जिम्मेदारी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) को सौंपी गई है। बैंक की टीम कार्ड निर्माण और स्कैनर सेटअप का ट्रायल करने की तैयारी में है। जैसे ही परीक्षण सफल होता है, सुविधा मरीजों के लिए शुरू कर दी जाएगी। कार्ड में मरीज से जुड़ी पूरी जानकारी सुरक्षित रहेगी और किसी भी यूनिट में स्कैन करते ही विवरण कंप्यूटर पर खुल जाएगा।
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मरीज के परिजनों बार-बार काटने पड़ते हैं चक्कर
इस समय भुगतान के लिए हर बार बिलिंग काउंटर वापस जाना पड़ता है, जिसके कारण मरीजों और उनके परिजनों को बड़े परिसर में बार-बार चलना पड़ता है। नई व्यवस्था लागू होने पर पेमेंट सिस्टम पूरी तरह डिसेंट्रलाइज्ड हो जाएगा। मरीज वहीं भुगतान कर सकेंगे, जहां सेवा लेनी है। इससे समय और ऊर्जा दोनों की बचत होगी।
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नकद लेनदेन की जरूरत नहीं
इस सिस्टम में रजिस्ट्रेशन के साथ ही मरीज का कार्ड बनता है, जिसमें उसकी पूरी मेडिकल जानकारी दर्ज रहती है। उपचार के दौरान मरीज कार्ड को स्कैन कर भुगतान करता है, जिससे नकद लेनदेन की जरूरत नहीं पड़ती और पूरा प्रोसेस तेज हो जाता है। एम्स प्रबंधन का कहना है कि मरीजों को फीस जमा करने के लिए कतार में न लगना पड़े, इसके लिए स्मार्ट कार्ड पेमेंट सिस्टम शुरू किया जा रहा है। एसबीआई के साथ मिलकर काम चल रहा है और उम्मीद है कि यह सुविधा इस महीने के अंत तक शुरू हो जाएगी।
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एसबीआई तैयार कर रहा पूरा डिजिटल सिस्टम
स्मार्ट कार्ड प्रणाली को लागू करने की जिम्मेदारी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) को सौंपी गई है। बैंक की टीम कार्ड निर्माण और स्कैनर सेटअप का ट्रायल करने की तैयारी में है। जैसे ही परीक्षण सफल होता है, सुविधा मरीजों के लिए शुरू कर दी जाएगी। कार्ड में मरीज से जुड़ी पूरी जानकारी सुरक्षित रहेगी और किसी भी यूनिट में स्कैन करते ही विवरण कंप्यूटर पर खुल जाएगा।
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मरीज के परिजनों बार-बार काटने पड़ते हैं चक्कर
इस समय भुगतान के लिए हर बार बिलिंग काउंटर वापस जाना पड़ता है, जिसके कारण मरीजों और उनके परिजनों को बड़े परिसर में बार-बार चलना पड़ता है। नई व्यवस्था लागू होने पर पेमेंट सिस्टम पूरी तरह डिसेंट्रलाइज्ड हो जाएगा। मरीज वहीं भुगतान कर सकेंगे, जहां सेवा लेनी है। इससे समय और ऊर्जा दोनों की बचत होगी।
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नकद लेनदेन की जरूरत नहीं
इस सिस्टम में रजिस्ट्रेशन के साथ ही मरीज का कार्ड बनता है, जिसमें उसकी पूरी मेडिकल जानकारी दर्ज रहती है। उपचार के दौरान मरीज कार्ड को स्कैन कर भुगतान करता है, जिससे नकद लेनदेन की जरूरत नहीं पड़ती और पूरा प्रोसेस तेज हो जाता है। एम्स प्रबंधन का कहना है कि मरीजों को फीस जमा करने के लिए कतार में न लगना पड़े, इसके लिए स्मार्ट कार्ड पेमेंट सिस्टम शुरू किया जा रहा है। एसबीआई के साथ मिलकर काम चल रहा है और उम्मीद है कि यह सुविधा इस महीने के अंत तक शुरू हो जाएगी।
