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MP News: एम्स में पहला असिस्टिव हेल्थ टेक्नोलॉजी हैकाथॉन,नवाचार के माध्यम से जीवन बदलने की दिशा में बड़ा कदम
Fri, 12 Dec 2025 07:37 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Fri, 12 Dec 2025 07:37 PM IST
सार
एम्स भोपाल ने अपने पहले असिस्टिव हेल्थ टेक्नोलॉजी (AHT) मेड-टेक हैकाथॉन 2025 का आयोजन किया, जिसमें विकलांग और वृद्धजन की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नवाचारों को बढ़ावा दिया गया। इस हैकाथॉन में देशभर से 12 परियोजनाओं का चयन हुआ, जिन पर अब प्रोटोटाइप और परीक्षण किया जाएगा।
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एम्स भोपाल में असिस्टिव हेल्थ टेक्नोलॉजी हैकाथॉन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
एम्स भोपाल ने स्वास्थ्य तकनीक के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने और विकलांगजन व वृद्धजन की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपना पहला असिस्टिव हेल्थ टेक्नोलॉजी (AHT) मेड-टेक हैकाथॉन 2025 आयोजित किया। यह आयोजन आईसीएमआर (ICMR) और एनसीएएचटी (NCAHT), एम्स नई दिल्ली के सहयोग से स्थापित इंटर-एम्स कोलैबोरेशन-कोलैबोरेटिंग सेंटर फॉर असिस्टिव हेल्थ टेक्नोलॉजी (CCAHT) के तहत किया गया।
भारत और विश्व में AHT की बढ़ती जरूरत
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बताया कि दुनिया भर में 2.5 अरब से अधिक लोगों को किसी न किसी असिस्टिव प्रोडक्ट की आवश्यकता है, जबकि लगभग एक अरब लोग अब भी इन तकनीकों तक पहुंच से वंचित हैं। भारत में भी बड़ी संख्या में दिव्यांगजन और तेजी से बढ़ती वृद्ध आबादी किफायती AHT की मांग को बढ़ा रही है, परंतु आयातित उत्पादों की ऊंची लागत और सीमित स्थानीय उत्पादन इस आवश्यकता को पूरा नहीं कर पा रहे।
स्वदेशी असिस्टिव टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने का प्रयास
उपलब्धता और वहनीयता के अंतर को कम करने के लिए CCAHT एम्स भोपाल ने 10 दिसंबर 2025 को पहला असिस्टिव टेक्नोलॉजी कॉफ़ी टेबल मेड-टेक हैकाथॉन आयोजित किया। इस हैकाथॉन में देशभर से आए प्रतिभागियों द्वारा प्रस्तुत नवाचारों में से 12 परियोजनाओं का चयन किया गया, जिन पर अब डिजाइन, प्रोटोटाइप और परीक्षण के स्तर पर गहन कार्य होगा। ये प्रोजेक्ट विकलांगजनों की वास्तविक चुनौतियों जैसे चलने-फिरने, संवाद, सीखने, देखभाल और दैनिक गतिविधियों को आसान बनाने के लिए विकसित किए जा रहे हैं।
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AHT क्यों जरूरी है?
कार्यक्रम के दौरान यह संदेश भी स्पष्ट रूप से सामने आया कि विकलांगता (डिसएबिलिटी) और हैंडीकैप एक ही चीज नहीं हैं। विकलांगता व्यक्ति में मौजूद किसी कमी को दर्शाती है। जबकि हैंडीकैप वह बाधा है जो सामाजिक या पर्यावरणीय कारणों से उत्पन्न होती है। जब तक तकनीकी सहायता उपलब्ध नहीं होती, तब तक वही सीमाएं व्यक्ति की भागीदारी में रुकावट बन जाती हैं। AHT जैसे मोबिलिटी एड्स, प्रोस्थेटिक्स, ऑर्थोटिक्स, संचार उपकरण, संवेदी डिवाइस, डिजिटल हेल्थ सॉल्यूशन और AI आधारित तकनीक इन बाधाओं को कम करके स्वतंत्रता, आत्मसम्मान और समान अवसर सुनिश्चित करती हैं।
यह भी पढ़ें-2025 बना 'उद्योग वर्ष', MP को मिले ₹8 लाख करोड़ के उद्योग, दो वर्ष में क्या रहा खास?
भारत-केंद्रित समाधान का लक्ष्य
एम्स भोपाल की यह पहल युवाओं, स्टार्टअप्स, शोधकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों को समाज उन्मुख नवाचारों के लिए प्रेरित करती है। CCAHT का उद्देश्य है किफायती और टिकाऊ असिस्टिव टेक्नोलॉजी विकसित करना,आयात पर निर्भरता घटाना,भारत की आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान तैयार करना और वैश्विक AHT परिदृश्य में भारत की भूमिका को मजबूत बनाना
यह भी पढ़ें- इटारसी-भोपाल मार्ग से काचेगुड़ा-मदार और बनारस-एलटीटी के बीच स्पेशल ट्रेनें चलेंगी, यात्रियों को राहत
लाखों लोगों के जीवन में बदलाव का संकल्प
एम्स भोपाल ने अपने पहले AHT हैकाथॉन के जरिए यह संकेत दिया है कि संस्थान न केवल चिकित्सा सेवाओं में उत्कृष्टता ला रहा है बल्कि समावेशी और सुलभ स्वास्थ्य नवाचारों के माध्यम से लाखों लोगों के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में निर्णायक कदम भी उठा रहा है।
यह पहल आने वाले वर्षों में देश में असिस्टिव हेल्थ टेक्नोलॉजी के नए अध्याय की नींव रखेगी।
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भारत और विश्व में AHT की बढ़ती जरूरत
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बताया कि दुनिया भर में 2.5 अरब से अधिक लोगों को किसी न किसी असिस्टिव प्रोडक्ट की आवश्यकता है, जबकि लगभग एक अरब लोग अब भी इन तकनीकों तक पहुंच से वंचित हैं। भारत में भी बड़ी संख्या में दिव्यांगजन और तेजी से बढ़ती वृद्ध आबादी किफायती AHT की मांग को बढ़ा रही है, परंतु आयातित उत्पादों की ऊंची लागत और सीमित स्थानीय उत्पादन इस आवश्यकता को पूरा नहीं कर पा रहे।
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स्वदेशी असिस्टिव टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने का प्रयास
उपलब्धता और वहनीयता के अंतर को कम करने के लिए CCAHT एम्स भोपाल ने 10 दिसंबर 2025 को पहला असिस्टिव टेक्नोलॉजी कॉफ़ी टेबल मेड-टेक हैकाथॉन आयोजित किया। इस हैकाथॉन में देशभर से आए प्रतिभागियों द्वारा प्रस्तुत नवाचारों में से 12 परियोजनाओं का चयन किया गया, जिन पर अब डिजाइन, प्रोटोटाइप और परीक्षण के स्तर पर गहन कार्य होगा। ये प्रोजेक्ट विकलांगजनों की वास्तविक चुनौतियों जैसे चलने-फिरने, संवाद, सीखने, देखभाल और दैनिक गतिविधियों को आसान बनाने के लिए विकसित किए जा रहे हैं।
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AHT क्यों जरूरी है?
कार्यक्रम के दौरान यह संदेश भी स्पष्ट रूप से सामने आया कि विकलांगता (डिसएबिलिटी) और हैंडीकैप एक ही चीज नहीं हैं। विकलांगता व्यक्ति में मौजूद किसी कमी को दर्शाती है। जबकि हैंडीकैप वह बाधा है जो सामाजिक या पर्यावरणीय कारणों से उत्पन्न होती है। जब तक तकनीकी सहायता उपलब्ध नहीं होती, तब तक वही सीमाएं व्यक्ति की भागीदारी में रुकावट बन जाती हैं। AHT जैसे मोबिलिटी एड्स, प्रोस्थेटिक्स, ऑर्थोटिक्स, संचार उपकरण, संवेदी डिवाइस, डिजिटल हेल्थ सॉल्यूशन और AI आधारित तकनीक इन बाधाओं को कम करके स्वतंत्रता, आत्मसम्मान और समान अवसर सुनिश्चित करती हैं।
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भारत-केंद्रित समाधान का लक्ष्य
एम्स भोपाल की यह पहल युवाओं, स्टार्टअप्स, शोधकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों को समाज उन्मुख नवाचारों के लिए प्रेरित करती है। CCAHT का उद्देश्य है किफायती और टिकाऊ असिस्टिव टेक्नोलॉजी विकसित करना,आयात पर निर्भरता घटाना,भारत की आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान तैयार करना और वैश्विक AHT परिदृश्य में भारत की भूमिका को मजबूत बनाना
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लाखों लोगों के जीवन में बदलाव का संकल्प
एम्स भोपाल ने अपने पहले AHT हैकाथॉन के जरिए यह संकेत दिया है कि संस्थान न केवल चिकित्सा सेवाओं में उत्कृष्टता ला रहा है बल्कि समावेशी और सुलभ स्वास्थ्य नवाचारों के माध्यम से लाखों लोगों के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में निर्णायक कदम भी उठा रहा है।
यह पहल आने वाले वर्षों में देश में असिस्टिव हेल्थ टेक्नोलॉजी के नए अध्याय की नींव रखेगी।
