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MP News: भोपाल एम्स में खून की मोटी नस के पास से निकाली तीन किलो की 25 सेंटीमीटर लंबी कैंसर की गठान

Fri, 15 Mar 2024 11:02 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Fri, 15 Mar 2024 11:02 PM IST
सार


भोपाल एम्स में कैंसर सर्जरी विभाग में एक जटिल सर्जरी को अंजाम दिया गया। मरीज के पेट में तीन किलो का 25 सेंटीमीटर कैंसर की गांठ (रेयर ब्लड ग्रुप) थी। जिससे उसके पेट में दर्द की की समस्या बढ़ती जा रही थी। एम्स भोपाल में चार घंटे की सर्जरी में गांठ को सफलता पूर्वक निकाल दिया गया। 

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MP News: A 25 cm long cancer lump weighing three kg was removed from a thick blood vein in Bhopal AIIMS.
भोपाल एम्स - फोटो : social media

विस्तार

एम्स भोपाल से मिली जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश निवासी 35 वर्षीय मरीज कई दिनों से पेट दर्द की समस्या से परेशान था। उसने एक लोकल डॉक्टर से पेट की सोनोग्राफी करवाई। इससे पता चला कि उसे पेट में 25 सेंटीमीटर से बड़ी कैंसर की गांठ (ट्यूमर) है। उसने अपने पारिवारिक डॉक्टर की सलाह से एम्स भोपाल के कैंसर सर्जरी विभाग में दिखाया। सीनियर कैंसर सर्जन डॉ विनय कुमार ने रेजिडेंट डॉक्टर सोनवीर के साथ मरीज को ओपीडी में देखा। मरीज को तुरंत सर्जरी के लिए भर्ती किया गया और सीटी स्कैन और सिटी एंजियोग्राफी कराई गई। रिपोर्ट से पता चला कि मरीज के पेट में 25 से 30 सेंटीमीटर का ट्यूमर है, जो किडनी और मोटी खून की नस, जो सीधे दिल को रक्त की सप्लाई करती है, उससे चिपका हुआ है। ऐसी स्थिति में ऑपरेशन करना काफी जटिल था। इससे किडनी और मोटी खून की नस के फटने का डर था। चूंकि मरीज का ब्लड ग्रुप रेयर था, इसलिए यह ऑपरेशन और भी जटिल और मरीज की जान को खतरा भी हो सकता था। ट्यूमर पेट में वर्टिब्रल सिम्पैथिक टंक से आ रहा था।
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ऑपरेशन के पूर्व ब्लड बैंक में 3 से 4 ग्रुप बैकअप में रखे गए 
ऑपरेशन की प्लानिंग करने वाली टीम में वरिष्ठ कैंसर सर्जन डॉ. विनय कुमार, सीनियर सीटीवीएस सर्जन डॉ. योगेश नेवरिआ और एनेस्थीसिया कंसल्टेंट डॉक्टर पूजा और सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर सोनवीर गौतम थे। ब्लड ग्रुप रेयर होने की वजह से ब्लड बैंक में 3 से 4 ग्रुप बैकअप में रखे गए। खून का नुकसान बचाने के लिए सर्जरी सीटीवीएस ओटी में की गई, क्योंकि अगर बीच में खून की नस फट जाती तो खून बहने से रोकने के लिए मरीज का हार्ट लंग मशीन पर रखने के लिए बैकअप तैयार रखा गया था। सर्जरी का समय बहुत ही कम रखा गया, जिससे कम से कम खून बहे। 
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तीन से चार घंटे चला ऑपरेशन 
इस जटिल सर्जरी के लिए तीन से चार घंटे ऑपरेशन चला। खून के बिना नुकसान के ट्यूमर को सफलता पूर्वक निकाला गया। मरीज की किडनी और मोटे खून की नस को भी फटने से बचाया गया। मरीज पूरी तरह से स्वस्थ है ऑपरेशन के दूसरे ही दिन मरीज ने चलना फिरना और खाना पीना शुरू कर दिया। सर्जन डॉक्टर विनय कुमार कहते हैं कि इस तरह के कैंसर बहुत ही रेयर होते हैं। सबसे जरूरी था मरीज के खून को बहने से रोकना और उसकी किडनी को बचाना। 
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नसों को बगैर बल्ड लॉस रिपेयर किया 
वर्टिब्रल सिम्पैथिक ट्रक का ट्यूमर निकालने के बाद भी पैरों में और चलने में मरीज को कोई परेशानी नहीं हो रही है। सीनियर सीटीवीएस सर्जन डॉक्टर योगेश निवारिया का मानना है क्योंकि कैंसर खून की मोटी नस के पास (आईवीसी) से 10 सेंटीमीटर की लंबाई में चिपका हुआ था, इसलिए ऑपरेशन के बीच-बीच में मोटी खून की नस कहीं कहीं फट गई थी, जिसे बगैर ब्लड लॉस के रिपेयर किया गया और मरीज को हार्ट लंग मशीन पर ले जाने की आवश्यकता नहीं पड़ी।
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