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MP News: इंदौर में दूषित पानी से 20 मौतें, सीएम बोले-हम आंकड़ों में नहीं उलझेंगे, एक मौत भी हमारे लिए कष्टदायक

Wed, 07 Jan 2026 09:28 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Wed, 07 Jan 2026 09:28 PM IST
सार

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जिन परिवारों ने पंजीकरण कराया है, उन्हें सरकार हर संभव मदद देगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार केवल आंकड़ों में नहीं उलझेगी। सीएम ने कहा कि एक व्यक्ति की जान जाना भी हमारे के लिए कष्टदायक है।  

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MP News: 20 deaths due to contaminated water in Bhagirathpura, Indore; CM says, "We won't get bogged down in
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के कारण हुई मौतों का मामला गंभीर होता जा रहा है। अब तक मरने वालों की संख्या 20 तक पहुंच गई है। हालांकि, राज्य सरकार द्वारा हाई कोर्ट में प्रस्तुत रिपोर्ट में केवल चार मौतों की ही जानकारी दी है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग ने 6 मौतों की जानकारी अपनी रिपोर्ट में दी है, जिससे वास्तविक आंकड़ों को लेकर विवाद बढ़ गया है। बुधवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जिन लोगों ने मौत का पंजीकरण कराया है, उनके परिवारों को सरकार राहत प्रदान करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार आकड़ों में नहीं उलझेगी और एक भी व्यक्ति की जान जाना उनके लिए कष्टदायक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर मृतकों की संख्या तय की है, लेकिन यह फाइनल नहीं है। 
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अधिकारियों ने बताया कि प्रशासन मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए संदिग्ध मामलों की भी जांच कर आर्थिक सहायता प्रदान कर रहा है। अब तक 18 परिवारों को 2-2 लाख रुपये का मुआवजा दिया जा चुका है, और इसमें दो नए नाम जोड़े गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि कोई भी प्रभावित परिवार सहायता से वंचित नहीं रहे। इसलिए अभी सभी को राहत राशि देने का निर्णय लिया गया है। 

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बता दें इंदौर लगातार आठ वर्षों से भारत का सबसे स्वच्छ शहर का खिताब जीतता रहा है। इस बीच दिसंबर 2025 के अंत में एक दूषित पानी से कई लोगों के बीमार होने और मौत होने की घटना सामने आई। शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल की आपूर्ति से डायरिया और उल्टी-दस्त का व्यापक प्रकोप फैला, जिससे हजारों लोग प्रभावित हुए।  प्रारंभिक जांच में पता चला कि भागीरथपुरा पुलिस चौकी के पास बने एक सार्वजनिक शौचालय के नीचे मुख्य पेयजल पाइपलाइन में लीकेज था। शौचालय का गंदा पानी (सीवेज) सीधे पाइपलाइन में मिल गया, क्योंकि उचित सेप्टिक टैंक नहीं बनाया गया था। इंदौर का पेयजल नर्मदा नदी से पाइपलाइन के जरिए आता है। इस लीकेज से फीकल बैक्टीरिया युक्त सीवेज पीने के पानी में मिला, जिससे गंभीर संक्रमण फैला। अगस्त 2025 में ही इस क्षेत्र की पुरानी पाइपलाइन बदलने का टेंडर जारी हुआ था, लेकिन काम में देरी हुई। 

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