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एमपी में फर्जी GST नंबर से 10 लाख का MSME लोन!: बैंक मैनेजर समेत 5 पर FIR, मशीन भी नहीं मिली

Fri, 18 Sep 2026 03:20 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Fri, 18 Sep 2026 03:20 PM IST
सार

भोपाल में फर्जी दस्तावेज और नकली जीएसटी नंबर के जरिए 10 लाख रुपये का एमएसएमई लोन स्वीकृत कराने का मामला सामने आया है। ईओडब्ल्यू ने बैंक मैनेजर समेत पांच लोगों पर एफआईआर दर्ज की है, जबकि लोन के बदले बताई गई मशीन पीड़ित को मिली ही नहीं।

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MP MSME Loan Fraud: Fake GST Number Used for Rs 10 Lakh Loan, Bank Manager Among 5 Booked
EOW जबलपुर

विस्तार

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में फर्जी दस्तावेज और नकली जीएसटी नंबर के जरिए MSME लोन हासिल करने का मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र की एमपी नगर शाखा के तत्कालीन शाखा प्रबंधक समेत पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आरोप है कि एक युवा कारोबारी की जानकारी के बिना उसके नाम पर 10 लाख रुपये का एमएसएमई लोन स्वीकृत कराया गया। मशीन खरीदने के नाम पर जारी 8.85 लाख रुपये की रकम अलग-अलग खातों में पहुंचाई गई, लेकिन कारोबारी को मशीन नहीं मिली। मामले की शुरुआत उस समय हुई जब कारोबारी को अपने नाम पर लिए गए लोन की जानकारी मिली। उसने ईओडब्ल्यू में शिकायत की। जांच में एजेंसी को प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के तथ्य मिले।
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मामा ने बैंक और सप्लायर से मिलकर कराया लोन
ईओडब्ल्यू की जांच के मुताबिक कारोबारी के मामा ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र की एमपी नगर शाखा के तत्कालीन मैनेजर और मशीन सप्लाई करने वाली फर्मों से जुड़े लोगों के साथ मिलकर लोन कराया। मामा की अब मृत्यु हो चुकी है। आरोप है कि उन्होंने पहले ही लोन से जुड़े दस्तावेज बैंक में जमा कर दिए थे। 21 मार्च 2024 को कारोबारी को बैंक बुलाया गया और तैयार दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए। जांच में सामने आया कि आवेदन से रकम जारी होने तक की प्रक्रिया महज तीन से चार घंटे में पूरी कर दी गई। ईओडब्ल्यू के अनुसार बैंक ने न कारोबारी के व्यवसाय स्थल का निरीक्षण किया और न मशीन सप्लायर के पते का पर्याप्त सत्यापन किया।
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फर्जी रसीद से दिखाई मार्जिन मनी
लोन के लिए मार्जिन मनी जमा होने का रिकॉर्ड दिखाने के लिए 4 लाख और 1.15 लाख रुपये की दो रसीदें लगाई गई थीं। इनमें विशाल इंटरप्राइजेस को भुगतान दिखाया गया। जांच में इन भुगतानों की फर्म के बैंक खाते में एंट्री नहीं मिली। शिकायतकर्ता या उसके परिवार के खातों में भी इतनी रकम मौजूद नहीं मिली। जांच में विशाल इंटरप्राइजेस का बैंक रिकॉर्ड में दर्ज पता भी फर्जी पाया गया। फर्म के दस्तावेजों में दर्ज जीएसटी नंबर किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर था। ईओडब्ल्यू के मुताबिक बैंक के जीएसटी पोर्टल पर फर्म के मालिक का नाम अलग दिखाई दे रहा था। इसके बावजूद लोन स्वीकृत कर दिया गया। 


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मशीन के बजाय खातों में पहुंची रकम
लोन की रकम मशीन खरीदने के लिए विशाल इंटरप्राइजेस के खाते में पहुंची, लेकिन शिकायतकर्ता को मशीन नहीं दी गई। आरोप है कि इसके बाद रकम ग्लोबल मार्केटर्स के जरिए शिकायतकर्ता की मां के खाते में भेजी गई और वहां से कारोबारी के मामा तथा उनके बताए लोगों के खातों तक पहुंची। जांच में 18 मार्च 2024 को 3.91 लाख और 22 मार्च को 3 लाख रुपये के ट्रांसफर की जानकारी सामने आई। लोन की रकम मिलने के दिन फाइनेंशियल एडवाइजर राजीव राजपूत को 50 हजार और शिकायतकर्ता के मामा को 2.46 लाख रुपये भेजे गए। फर्म के एक संचालक ने जांच में मशीन के बदले रकम भेजने और इस सौदे में 40 हजार रुपये मिलने की बात स्वीकार की।

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मशीन नहीं थी, फिर भी बीमा और सीईआरएसएआई में पंजीयन
ईओडब्ल्यू के अनुसार मशीन मौजूद नहीं होने के बावजूद उसका बीमा कराया गया और सीईआरएसएआई में पंजीयन भी कर दिया गया। बीमा की रकम शिकायतकर्ता के खाते से काटी गई। बाद में उसका मामा और परिचित लोन की किस्तें भरते रहे और कारोबारी को लोन बंद होने की बात बताते रहे। जुलाई 2024 में बैंक से किस्त जमा करने के लिए फोन आने पर उसे पूरे मामले की जानकारी हुई। जांच में यह भी सामने आया कि मार्च 2024 में इसी शाखा से 10 से 15 दिन के भीतर इसी तरीके से पांच लोन कराए गए थे। तीन अन्य मामलों में भी गड़बड़ियां सामने आईं। एक प्रिंटिंग प्रेस संचालक को 9.90 लाख का लोन और 4 लाख की सीसी लिमिट मिली। एक महिला को 7 लाख का लोन दिया गया, लेकिन उसे मशीन नहीं मिली। वहीं एक युवक होम लोन के लिए बैंक पहुंचा था, लेकिन आरोप है कि उससे 2.40 लाख रुपये मार्जिन मनी के नाम पर लेकर उसकी इच्छा के बिना एमएसएमई लोन करा दिया गया। ईओडब्ल्यू के मुताबिक ये लोन बाद में एनपीए हो गए।

बैंक मैनेजर समेत पांच पर एफआईआर
ईओडब्ल्यू भोपाल ने 17 सितंबर 2026 को अपराध क्रमांक 99/2026 दर्ज किया। इसमें बैंक ऑफ महाराष्ट्र की एमपी नगर शाखा के तत्कालीन शाखा प्रबंधक राहुल भोसले, फाइनेंशियल एडवाइजर राजीव राजपूत, विशाल इंटरप्राइजेस की प्रोपराइटर नईमा अली, संचालक कमर अली और ग्लोबल मार्केटर्स की प्रोपराइटर उमर अली को आरोपी बनाया गया है। सभी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और 120-बी के तहत मामला दर्ज किया गया है। ईओडब्ल्यू ने कहा है कि मामले की जांच जारी है।
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