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MP: अमृत फार्मेसी पर मेहरबान हुए अस्पताल,भंडार क्रय नियमों को ताक पर रख खरीद ली करोड़ों की दवाएं, जांच शुरू
Fri, 03 Jan 2025 11:17 AM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Fri, 03 Jan 2025 11:17 AM IST
सार
अमृत फॉर्मेसी से प्रदेश सरकार के अस्पतालों में भंडार क्रय नियमों का उल्लंघन कर करोड़ों रुपये की दवा और सामग्री की खरीदी कर ली गई। यही नहीं यह दवा और सामग्री महंगी दरों पर खरीदी गई। अब इस मामले में प्रदेश सरकार ने जांच शुरू कर दी है।
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भोपाल के हमीदिया अस्पताल में स्थित अमृत फार्मेसी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
केंद्र सरकार की सरकारी कंपनी की आड़ में अमृत फॉर्मेसी से प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में भंडार क्रय नियमों का उल्लंघन कर करोड़ों रुपये की दवाएं और सामग्री खरीद ली गई। इसमें भंडार क्रय नियमों का पूरी तरह से उल्लंघन किया गया। दरअसल राज्य सरकार ने अमृत फॉर्मेसी से दवा खरीदी को लेकर वर्ष 2017 में पांच साल के लिए अनुबंध किया था, जो कि 2022 में समाप्त हो गया। इसके बाद सरकार को फार्मेसी द्वारा महंगी दवाएं सप्लाई करने की कई शिकायतें मिलीं, इसके बाद सरकार ने दवा सप्लाई करने को लेकर अमृत फॉर्मेसी से अनुबंध आगे नहीं बढाया। फिर भी कुछ सरकारी मेडिकल कॉलेजों में अमृत फॉर्मेसी के अधिकारियों और चहते सप्लायरों ने सांठगांठ कर दवा और सामग्री सप्लाई कर दी। भंडार क्रय नियमों का उल्लंघन होने के बावजूद अस्पतालों के अधिकारियों ने भी इसमें आगे बढ़कर साथ दिया। साथ ही मनमानी दरों पर दवा खरीदी कर प्रदेश सरकार को राजस्व और आयुष्मान मरीजों को नुकसान पहुंचाया। अब इस मामले के संज्ञान में आने के बाद स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने खरीदी की प्रक्रिया को लेकर जांच शुरू कर दी है। विभाग के आयुक्त पूरी प्रक्रिया का परीक्षण करा रहे हैं।
सरकार के दिशा निर्देशों का भी उल्लंघन
अमृत फॉर्मेसी से अनुबंध समाप्त होने के दो साल बाद फरवरी 2024 में भंडार क्रय नियमों का पालन करते हुए खरीदी के लिए कुछ शर्तों के साथ सरकार ने नोटिफिकेशन जारी किया था। इन दिशानिर्देशों और भंडार क्रय नियमों का भी खरीदी में खुला उल्लंघन किया जा रहा है।
साढ़े आठ करोड़ रुपये का नुकसान
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में दवाओं के मनमानी दरों पर खरीदी को लेकर लंबे समय से शिकायत मिल रही थी। इसकी पुष्टि नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में भी हो गई। सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2017-18 से वर्ष 2021-22 के बीच मध्य प्रदेश पब्लिक हेल्थ सप्लाई कॉरपारेशन द्वारा अनुबंधित दरों के बाद भी स्थानीय स्तर पर निविदा कर महंगी दरों पर दवाएं खरीदी गई। रिपोर्ट में साफ लिखा है कि अस्पतालों ने मध्य प्रदेश औषिध पोर्टल पर उपलब्ध दवाओं की अनदेखी कर स्थानीय निविदा दरों पर महंगी दवाएं खरीदी। इससे प्रदेश सरकार को करीब आठ करोड़ 57 लाख रुपये का अतिरिक्त व्यय हुआ। सीएजी की यह रिपोर्ट विधानसभा में पेश की गई। रिपोर्ट के अनुसार यह जानकारी सिर्फ प्रदेश के तीन मेडिकल कॉलेज, 10 जिला अस्पताल और 20 सीएचसी की सैंपल के तौर पर है।
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मामले का परीक्षण करा रहे : आयुक्त
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त तरुण राठी ने कहा कि दवा अधिक दरों पर खरीदने और अनुबंध खत्म होने के बाद भी खरीदने का मामला सामने आया है। इसका हम परीक्षण करा रहे हैं।
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सरकार के दिशा निर्देशों का भी उल्लंघन
अमृत फॉर्मेसी से अनुबंध समाप्त होने के दो साल बाद फरवरी 2024 में भंडार क्रय नियमों का पालन करते हुए खरीदी के लिए कुछ शर्तों के साथ सरकार ने नोटिफिकेशन जारी किया था। इन दिशानिर्देशों और भंडार क्रय नियमों का भी खरीदी में खुला उल्लंघन किया जा रहा है।
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साढ़े आठ करोड़ रुपये का नुकसान
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में दवाओं के मनमानी दरों पर खरीदी को लेकर लंबे समय से शिकायत मिल रही थी। इसकी पुष्टि नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में भी हो गई। सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2017-18 से वर्ष 2021-22 के बीच मध्य प्रदेश पब्लिक हेल्थ सप्लाई कॉरपारेशन द्वारा अनुबंधित दरों के बाद भी स्थानीय स्तर पर निविदा कर महंगी दरों पर दवाएं खरीदी गई। रिपोर्ट में साफ लिखा है कि अस्पतालों ने मध्य प्रदेश औषिध पोर्टल पर उपलब्ध दवाओं की अनदेखी कर स्थानीय निविदा दरों पर महंगी दवाएं खरीदी। इससे प्रदेश सरकार को करीब आठ करोड़ 57 लाख रुपये का अतिरिक्त व्यय हुआ। सीएजी की यह रिपोर्ट विधानसभा में पेश की गई। रिपोर्ट के अनुसार यह जानकारी सिर्फ प्रदेश के तीन मेडिकल कॉलेज, 10 जिला अस्पताल और 20 सीएचसी की सैंपल के तौर पर है।
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मामले का परीक्षण करा रहे : आयुक्त
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त तरुण राठी ने कहा कि दवा अधिक दरों पर खरीदने और अनुबंध खत्म होने के बाद भी खरीदने का मामला सामने आया है। इसका हम परीक्षण करा रहे हैं।
