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मध्यप्रदेश: राज्य परिवहन प्राधिकरण के गठन की अधिसूचना वैध, निजी बस ऑपरेटरों की याचिका खारिज
Wed, 14 Oct 2026 10:50 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Wed, 14 Oct 2026 10:50 PM IST
सार
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने राज्य परिवहन प्राधिकरण के गठन से जुड़ी 10 अगस्त 2026 की अधिसूचना को वैध मानते हुए निजी बस ऑपरेटरों की याचिका खारिज कर दी। इस फैसले के बाद अंतरराज्यीय परमिट आवेदनों सहित प्राधिकरण से जुड़े अन्य मामलों में नियमानुसार कार्रवाई का रास्ता साफ हुआ है।
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कोर्ट। सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने राज्य परिवहन प्राधिकरण के गठन से संबंधित राज्य शासन की 10 अगस्त 2026 को जारी अधिसूचना को वैध ठहराया है। निजी बस ऑपरेटर हरिशंकर सिंह पटेल एवं अन्य की ओर से दायर रिट याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया। इस फैसले से राज्य परिवहन प्राधिकरण के स्तर पर अंतरराज्यीय परमिट आवेदनों सहित अन्य संबंधित मामलों में निर्णय लेने का रास्ता साफ हुआ है।
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मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने की। याचिकाकर्ताओं ने राज्य परिवहन प्राधिकरण के गठन से संबंधित शासन की अधिसूचना की वैधानिकता को चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष और राज्य शासन ने अपने-अपने तर्क प्रस्तुत किए। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद अधिसूचना को कानून के अनुरूप मानते हुए याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही राज्य शासन को विधि के अनुसार आगे की कार्रवाई करने की स्वतंत्रता दी गई। याचिका खारिज होने के बाद राज्य परिवहन प्राधिकरण से संबंधित मामलों में नियमानुसार आगे की प्रक्रिया जारी रखने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
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मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने की। याचिकाकर्ताओं ने राज्य परिवहन प्राधिकरण के गठन से संबंधित शासन की अधिसूचना की वैधानिकता को चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष और राज्य शासन ने अपने-अपने तर्क प्रस्तुत किए। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद अधिसूचना को कानून के अनुरूप मानते हुए याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही राज्य शासन को विधि के अनुसार आगे की कार्रवाई करने की स्वतंत्रता दी गई। याचिका खारिज होने के बाद राज्य परिवहन प्राधिकरण से संबंधित मामलों में नियमानुसार आगे की प्रक्रिया जारी रखने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
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