{"_id":"671ba92dd826bbd30502dec9","slug":"mp-by-election-is-a-litmus-test-for-jitu-patwari-if-he-loses-both-the-seats-then-he-can-lose-his-seat-he-ha-2024-10-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mp:उपचुनाव जीतू पटवारी के लिए अग्नि परीक्षा, दोनों सीट हरे तो जा सकती है कुर्सी,अभी तक एक भी चुनाव नहीं जीते","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mp:उपचुनाव जीतू पटवारी के लिए अग्नि परीक्षा, दोनों सीट हरे तो जा सकती है कुर्सी,अभी तक एक भी चुनाव नहीं जीते
सार
बुधनी और विजयपुर उपचुनाव पीसीसी चीफ जीतू पटवारी के लिए अग्नि परीक्षा, है। अगर दोनों सीट हरे तो उनकी कुर्सी जा सकती है। पटवारी अपने 15 वर्ष के राजनीतिक सफर में फर्श से अर्श पर पहुंचे हैं। पटवारी राहुल गांधी के बेहद करीब माने जाते है।
विज्ञापन
पीसीसी चीफ जीतू पटवारी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश में लगातार चुनाव हार रही कांग्रेस पार्टी प्रदेश अध्यक्ष पद पर युवा चेहरे पर दाव लगाया लेकिन कोई फायदा होता नहीं दिख रहा है। जीतू पटवारी को अध्यक्ष बने लगभग 1 साल पूरा होने जा रहा है इस दौरान लोकसभा के बाद छिंदवाड़ा जिले की अमरवाड़ा उपचुनाव में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। अपने 15 वर्ष के राजनीतिक सफर में जीतू पटवारी फर्श से अर्श पर पहुंचे हैं, लेकिन हार की हैट्रिक पटवारी के लिए खतरे की घंटी हो सकती है। जीतू पटवारी बुधनी और विजयनगर विधानसभा उपचुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंककर हार को जीत में बदलने की कोशिश करेंगे में लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पटवारी के लिए यह किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं है अगर दोनो सीट हरे तो अध्यक्ष की कुर्सी छोड़नी पड़ सकती है।
एमपी में लगातार चुनाव हार रही कांग्रेस
मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी पहले विधानसभा 2023 में सत्ता से बाहर हुई। 2024 लोकसभा चुनाव मध्य प्रदेश के 29 के 29 लोकसभा सीट गंवा बैठी। इसके बाद अमरवाड़ा विधानसभा उपचुनाव में पूर्व सीएम कमलनाथ के गढ़ छिंदवाड़ा की सीट गंवा बैठी। अब एक बार फिर से कांग्रेस जीतू पटवारी को आजमा रही है। 13 नवंबर को बुधनी और विजयपुर विधानसभा उपचुनाव होना है। यहां भी हार का सिलसिला कायम रहा तो पटवारी की कुर्सी खतरे में आनी तय है।
राहुल गांधी के करीबी और ओबीसी होने का मिला फायदा
मध्य प्रदेश कांग्रेस के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष महज 47 वर्ष के जीतू पटवारी को अध्यक्ष की कुर्सी मिलने का मुख्य कारण राहुल गांधी का करीबी और ओबीसी वर्ग से होना माना जाता है। राहुल गांधी की भारत जोड़ों यात्रा का उन्हें क्षेत्र में प्रभारी बनाया गया था। पटवारी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस द्वारा निकाली गई जन आक्रोश यात्रा के भी प्रभारी रहे हैं। कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को हटाकर जीतू पटवारी को अध्यक्ष बनाने वाली कांग्रेस पार्टी प्रदेश में होने वाले दो सीटों के उप चुनाव में जीत की आस लगाए बैठी है। हालांकि जीतू पटवारी भी इन दोनों सीटों पर किसी प्रकार की लापरवाही नहीं कर रहे हैं। चुनाव की तारीख की घोषणा होने से पहले ही दोनों ही सीटों पर पूरी जोर आजमाइश लग रहे थे। अब तारीख की घोषणा होने के बाद पटवारी दोनों ही सीटों पर लगातार दौरा कर रहे हैं और एक-एक बूथ पर फोकस कर रहे हैं। अब उपचुनाव में क्या गुल खिलाते हैं, यह तो वक्त बताएगा,लेकिन प्रदेश युवा कांग्रेस से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचने का सफर तेजी से तय करने वाले जीतू पटवारी का कांग्रेस का राजनीतिक भविष्य आगामी उपचुनाव के परिणाम पर निर्भर करेगा।
विज्ञापन
महज 15 साल के करियर में फर्श से अर्श पर पहुंचे पटवारी
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी अपने 15 वर्ष के राजनीतिक सफर में फर्श से अर्श पर पहुंचे हैं। जीतू पटवारी राऊ क्षेत्र से दो बार विधायक रहे हैं। साथ ही 16 महीने कमलनाथ सरकार में मंत्री भी रहे हैं। अपनी मुखरता और हमलावर रूख के लिए मशूहर पटवारी ने अपने समर्थकों का आधार भी पूरे प्रदेश में बनाया है। खाती समाज से ताल्लुक रखने वाले पटवारी के समर्थक दावा करते हैं कि समाज के वोट प्रदेश की 45 फीसदी सीटों पर असर करते हैं। यही कारण है कि उन्हें अध्यक्ष पद सौंपा गया है।
विज्ञापन
एमपी में लगातार चुनाव हार रही कांग्रेस
मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी पहले विधानसभा 2023 में सत्ता से बाहर हुई। 2024 लोकसभा चुनाव मध्य प्रदेश के 29 के 29 लोकसभा सीट गंवा बैठी। इसके बाद अमरवाड़ा विधानसभा उपचुनाव में पूर्व सीएम कमलनाथ के गढ़ छिंदवाड़ा की सीट गंवा बैठी। अब एक बार फिर से कांग्रेस जीतू पटवारी को आजमा रही है। 13 नवंबर को बुधनी और विजयपुर विधानसभा उपचुनाव होना है। यहां भी हार का सिलसिला कायम रहा तो पटवारी की कुर्सी खतरे में आनी तय है।
विज्ञापन
राहुल गांधी के करीबी और ओबीसी होने का मिला फायदा
मध्य प्रदेश कांग्रेस के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष महज 47 वर्ष के जीतू पटवारी को अध्यक्ष की कुर्सी मिलने का मुख्य कारण राहुल गांधी का करीबी और ओबीसी वर्ग से होना माना जाता है। राहुल गांधी की भारत जोड़ों यात्रा का उन्हें क्षेत्र में प्रभारी बनाया गया था। पटवारी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस द्वारा निकाली गई जन आक्रोश यात्रा के भी प्रभारी रहे हैं। कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को हटाकर जीतू पटवारी को अध्यक्ष बनाने वाली कांग्रेस पार्टी प्रदेश में होने वाले दो सीटों के उप चुनाव में जीत की आस लगाए बैठी है। हालांकि जीतू पटवारी भी इन दोनों सीटों पर किसी प्रकार की लापरवाही नहीं कर रहे हैं। चुनाव की तारीख की घोषणा होने से पहले ही दोनों ही सीटों पर पूरी जोर आजमाइश लग रहे थे। अब तारीख की घोषणा होने के बाद पटवारी दोनों ही सीटों पर लगातार दौरा कर रहे हैं और एक-एक बूथ पर फोकस कर रहे हैं। अब उपचुनाव में क्या गुल खिलाते हैं, यह तो वक्त बताएगा,लेकिन प्रदेश युवा कांग्रेस से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचने का सफर तेजी से तय करने वाले जीतू पटवारी का कांग्रेस का राजनीतिक भविष्य आगामी उपचुनाव के परिणाम पर निर्भर करेगा।
विज्ञापन
महज 15 साल के करियर में फर्श से अर्श पर पहुंचे पटवारी
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी अपने 15 वर्ष के राजनीतिक सफर में फर्श से अर्श पर पहुंचे हैं। जीतू पटवारी राऊ क्षेत्र से दो बार विधायक रहे हैं। साथ ही 16 महीने कमलनाथ सरकार में मंत्री भी रहे हैं। अपनी मुखरता और हमलावर रूख के लिए मशूहर पटवारी ने अपने समर्थकों का आधार भी पूरे प्रदेश में बनाया है। खाती समाज से ताल्लुक रखने वाले पटवारी के समर्थक दावा करते हैं कि समाज के वोट प्रदेश की 45 फीसदी सीटों पर असर करते हैं। यही कारण है कि उन्हें अध्यक्ष पद सौंपा गया है।
