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Mp:एक्सीडेंट में युवक ने खो दी आंखें, एम्स में सर्जरी से मिली रोशनी, डॉक्टर बोले- दुनिया में ऐसे 10 से कम केस
Sat, 05 Oct 2024 06:13 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Sat, 05 Oct 2024 06:13 PM IST
सार
एक दुर्घटना दोनो आंखे खो चुके एक 25 साल के युवक को एम्स भोपाल के चिकित्सकों ने दुर्लभ और जटिल सर्जरी कर रोशनी दी है। चिकित्सकों का कहना है इस तरह के दुर्लभ मामले पूरे विश्व में 10 से भी कम हैं। निजी अस्पताल में चिकित्सकों ने इस केस में हार मान ली थी।
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एम्स में ऑपरेशन के दौरान चिकित्सकों की टीम
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भोपाल स्थित एम्स में 25 साल के एक वयस्क के आंखों की दुर्लभ और जटिल सर्जरी की गई है। ऑपरेशन के बाद मरीज को 1/3 फिर से रोशनी वापस मिल गई है। जानकारी के अनुसार भोपाल के पास जैतवारा गांव का युवक, 20 अगस्त 2024 को एक बाइक दुर्घटना का शिकार हुआ था जिसमें उसकी दोनों आंखों की रोशनी चली गई थी। इस मामले की जटिलता इस बात से और बढ़ गई कि दुर्घटना में उसकी बाईं आंख एथमॉइड साइनस (आंखों के बीच की एक छोटी हड्डी के अंदर का खोखला हिस्सा) में पहुंच गई थी। चिकित्सकों का कहना है कि इस प्रकार के मामले दुनिया भर में 10 से भी कम हैं।
निजी अस्पताल में इलाज से नहीं मिली थी रहता
युवक को एक्सीडेंट के बाद एक निजी अस्पताल में 10 दिनों तक इलाज किया गया लेकिन स्थिति बिगड़ने के बाद मरीज को एम्स भोपाल रेफर कर दिया गया। मरीज को गंभीर सिरदर्द, दिखायी न देना और नाक से रिसाव की समस्या हो रही थी। परिवार को इस बात का अंदाजा नहीं था कि उसकी बाईं आंख ऑर्बिटल कैविटी में ही थी, और वे समझते थे कि आंख दुर्घटना में बाहर निकल गई थी।
मस्तिष्क में भर गई थी हवा
एम्स भोपाल में कराई गई एनसीसीटी स्कैन में पाया गया कि मरीज के मस्तिष्क में हवा (प्पूमोसिफेलस) भर गयी है और उसकी बाईं आंख एथमॉइड साइनस में फंसी हुई है। चोट की गंभीरता को देखते हुए इस सर्जरी के लिए न्यूरोसर्जरी, नेत्र रोग, ट्रॉमा और आपातकालीन चिकित्सा, और एनेस्थीसिया विभागों के विशेषज्ञों का सहयोग आवश्यक था। डॉक्टर अमित अग्रवाल (न्यूरोसर्जरी), डॉक्टर भावना शर्मा (नेत्र रोग), डॉक्टर बी एल सोनी (मैक्सिलोफेशियल सर्जन), और डॉक्टर वैशाली वेंडेसकर (एनेस्थीसिया) की टीम ने मरीज की न्यूरोलॉजिकल स्थिति को स्थिर करने के बाद माइक्रोस्कोपी की मदद से बाईं आंख को एथमॉइड साइनस से सफलतापूर्वक निकाल कर सही स्थान पर फिट किया। मरीज की वर्तमान में स्थिति स्थिर है और वह डॉक्टरों की निगरानी में है।
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डॉक्टर बोले- काफी गंभीर थी मरीज की स्थिति
एम्स की नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. भावना शर्मा,ने बताया कि यह एक अत्यंत जटिल मामला था, जिसके लिए कई विभागों के विशेषज्ञों का सहयोग आवश्यक था। मरीज की स्थिति गंभीर थी, लेकिन बहु-आयामी दृष्टिकोण के कारण हम इस सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दे सके। एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक, प्रो. (डॉ.) अजय सिंह ने इस उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि एम्स भोपाल में हम हमेशा सीमाओं से परे जाकर नई चुनौतियों का सामना करने में विश्वास करते हैं। यह मामला हमारे डॉक्टरों की प्रतिबद्धता और सहयोग की शक्ति का प्रमाण है। मैं अपनी टीम को हमेशा असाधारण सोचने और कुछ नया करने के लिए प्रेरित करता हूं, और यह सफलता इसी का उदाहरण है कि हम जब एकजुट होते हैं तो क्या हासिल कर सकते हैं। यह दुर्लभ सर्जरी नेत्र और न्यूरोसर्जिकल चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई है।
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निजी अस्पताल में इलाज से नहीं मिली थी रहता
युवक को एक्सीडेंट के बाद एक निजी अस्पताल में 10 दिनों तक इलाज किया गया लेकिन स्थिति बिगड़ने के बाद मरीज को एम्स भोपाल रेफर कर दिया गया। मरीज को गंभीर सिरदर्द, दिखायी न देना और नाक से रिसाव की समस्या हो रही थी। परिवार को इस बात का अंदाजा नहीं था कि उसकी बाईं आंख ऑर्बिटल कैविटी में ही थी, और वे समझते थे कि आंख दुर्घटना में बाहर निकल गई थी।
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मस्तिष्क में भर गई थी हवा
एम्स भोपाल में कराई गई एनसीसीटी स्कैन में पाया गया कि मरीज के मस्तिष्क में हवा (प्पूमोसिफेलस) भर गयी है और उसकी बाईं आंख एथमॉइड साइनस में फंसी हुई है। चोट की गंभीरता को देखते हुए इस सर्जरी के लिए न्यूरोसर्जरी, नेत्र रोग, ट्रॉमा और आपातकालीन चिकित्सा, और एनेस्थीसिया विभागों के विशेषज्ञों का सहयोग आवश्यक था। डॉक्टर अमित अग्रवाल (न्यूरोसर्जरी), डॉक्टर भावना शर्मा (नेत्र रोग), डॉक्टर बी एल सोनी (मैक्सिलोफेशियल सर्जन), और डॉक्टर वैशाली वेंडेसकर (एनेस्थीसिया) की टीम ने मरीज की न्यूरोलॉजिकल स्थिति को स्थिर करने के बाद माइक्रोस्कोपी की मदद से बाईं आंख को एथमॉइड साइनस से सफलतापूर्वक निकाल कर सही स्थान पर फिट किया। मरीज की वर्तमान में स्थिति स्थिर है और वह डॉक्टरों की निगरानी में है।
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डॉक्टर बोले- काफी गंभीर थी मरीज की स्थिति
एम्स की नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. भावना शर्मा,ने बताया कि यह एक अत्यंत जटिल मामला था, जिसके लिए कई विभागों के विशेषज्ञों का सहयोग आवश्यक था। मरीज की स्थिति गंभीर थी, लेकिन बहु-आयामी दृष्टिकोण के कारण हम इस सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दे सके। एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक, प्रो. (डॉ.) अजय सिंह ने इस उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि एम्स भोपाल में हम हमेशा सीमाओं से परे जाकर नई चुनौतियों का सामना करने में विश्वास करते हैं। यह मामला हमारे डॉक्टरों की प्रतिबद्धता और सहयोग की शक्ति का प्रमाण है। मैं अपनी टीम को हमेशा असाधारण सोचने और कुछ नया करने के लिए प्रेरित करता हूं, और यह सफलता इसी का उदाहरण है कि हम जब एकजुट होते हैं तो क्या हासिल कर सकते हैं। यह दुर्लभ सर्जरी नेत्र और न्यूरोसर्जिकल चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई है।
