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भोपाल में यूपीआई शुल्क की क्या तैयारी?: व्यापारियों में चिंता, बोले- कारोबार पर पड़ेगा सीधा असर

Wed, 16 Sep 2026 04:58 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Wed, 16 Sep 2026 04:58 PM IST
सार

भोपाल के व्यापारियों ने 2 हजार से ज्यादा के यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत शुल्क को लेकर चिंता जताई है। चैंबर का कहना है कि कम मार्जिन वाले कारोबार में यह अतिरिक्त लागत भारी पड़ सकती है। व्यापारिक संगठन वित्त मंत्री से शुल्क पर पुनर्विचार और इसे वापस लेने की मांग करेंगे।

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What preparations regarding UPI charges are underway in Bhopal? Traders are concerned, stating it will directl
यूपीआई - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

2 हजार से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) शुल्क लगाए जाने की प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर भोपाल के व्यापारियों में चिंता है। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि सरकार और बैंकों ने पिछले कई वर्षों में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया है। व्यापारियों ने भी इसे अपनाकर अपने कारोबार में यूपीआई को रोजमर्रा के लेनदेन का हिस्सा बनाया है। अब बड़े डिजिटल भुगतान पर शुल्क लगने से खासकर कम मार्जिन वाले कारोबारियों की लागत बढ़ सकती है। भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के सचिव अजय देवनानी ने कहा कि सूचना सामने आने के बाद शहर के कई व्यापारियों ने चैंबर से संपर्क कर अपनी चिंता बताई है। उनका कहना है कि व्यापारी डिजिटल और कैशलेस अर्थव्यवस्था के साथ हैं, लेकिन नए शुल्क का असर सीधे कारोबार की लागत पर पड़ेगा।
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75 हजार के भुगतान पर करीब 300 रुपये शुल्क
देवनानी ने कहा कि 0.4 प्रतिशत शुल्क पहली नजर में कम दिखाई देता है, लेकिन बड़े लेनदेन में इसकी राशि बढ़ जाती है। उदाहरण के तौर पर 75 हजार रुपए के यूपीआई भुगतान पर करीब 300 रुपये शुल्क बनेगा। ऐसे कई डिजिटल लेनदेन रोज होने पर महीने में व्यापारी पर अतिरिक्त आर्थिक भार बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि कई कारोबार ऐसे हैं जिनका मुनाफा मार्जिन ही बहुत कम है। ऐसे में 0.4 प्रतिशत अतिरिक्त लागत भी व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण हो जाती है।
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किराना कारोबार पर भी पड़ सकता है असर
भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के महामंत्री विवेक साहू ने कहा कि छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों तक यूपीआई भुगतान आज व्यापार व्यवस्था का अहम हिस्सा बन चुका है। ग्राहक के पास नकदी नहीं होने पर भी मोबाइल से तुरंत भुगतान हो जाता है और व्यापारी को छुट्टे पैसे की समस्या भी नहीं रहती।
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उन्होंने बताया कि 5 हजार रुपए के यूपीआई भुगतान पर 20 रुपए, 10 हजार पर 40 रुपए और 50 हजार रुपए के भुगतान पर 200 रुपए शुल्क बनेगा। दिनभर में कई बड़े डिजिटल भुगतान होने पर यह राशि महीने के अंत तक काफी बढ़ सकती है। कम मार्जिन वाले किराना और दूसरे कारोबार में इसका असर ज्यादा महसूस हो सकता है।

नकद भुगतान की ओर लौटने की आशंका
व्यापारियों का कहना है कि अतिरिक्त शुल्क की वजह से कुछ कारोबारी बड़े यूपीआई भुगतान के बजाय नकद भुगतान लेने या भुगतान को अलग-अलग हिस्सों में करने का आग्रह कर सकते हैं। इससे डिजिटल भुगतान की सहजता प्रभावित होने की आशंका है। व्यापारियों का कहना है कि जब डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया जा रहा है तो ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे व्यापारी और ग्राहक दोनों के लिए यह आसान और किफायती बना रहे।


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वित्त मंत्री के सामने रखेंगे मुद्दा
अजय देवनानी ने कहा कि भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज व्यापारियों की चिंता को मध्यप्रदेश और केंद्रीय स्तर पर उठाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री और मध्यप्रदेश के वित्त मंत्री को ईमेल के माध्यम से व्यापारियों की परेशानी से अवगत कराया जाएगा। साथ ही, उनसे प्रस्तावित शुल्क पर पुनर्विचार कर इसे वापस लेने का आग्रह किया जाएगा। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि वे डिजिटल भुगतान व्यवस्था के विरोध में नहीं हैं। उनकी मांग है कि छोटे और मध्यम व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ न डाला जाए। किसी भी नए शुल्क को लागू करने से पहले व्यापारियों से चर्चा की जाए, ताकि डिजिटल भुगतान की व्यवस्था भी बनी रहे और कारोबारियों की लागत भी अनावश्यक रूप से न बढ़े।

 
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