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MP: विधायक भी बनें जिम्मेदार, सांसदों की तरह गोद लेंगे विधानसभा का एक गांव; 250 से ज्यादा गांव होंगे विकसित

Wed, 12 Jun 2024 04:30 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: शबाहत हुसैन Updated Wed, 12 Jun 2024 04:30 PM IST
सार

MP News: ग्रामीण विकास को तरजीह देने वाला एक फैसला अब प्रदेश की मोहन सरकार लेने वाली है। प्रदेश की सभी 230 विधानसभाओं में एक एक मॉडल गांव तैयार करने के लिए अब सरकार विधायकों को उनकी विधानसभा का कोई एक गांव गोद लेने की बाध्यता करने वाली है।

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MLAs will also adopt a village of the Vidhan Sabha like MPs in madhya pradesh
विधायक भी बनें जिम्मेदार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सूत्रों का कहना है कि प्रदेश की सभी 29 लोकसभा सीटों पर अपना एकाधिकार जमाने के बाद प्रदेश की भाजपा सरकार उत्साहित भी है और विकास की नई कहानी लिखने की तरफ अग्रसर हो रही है। इसी के चलते प्रदेश की हर विधानसभा में एक एक मॉडल गांव तैयार करने की योजना बनाई गई है। बताया जा रहा है कि इन चिन्हित गांवों के समग्र विकास की जिम्मेदारी संबंधित क्षेत्र के विधायक पर होगी। इसके लिए सांसदों की तरह सभी विधायकों को भी उनकी विधानभा क्षेत्र का एक गांव गोद लेना होगा।

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शिक्षा, स्वास्थ्य को प्राथमिकता
विधायकों द्वारा गोद लिए जाने वाले आदर्श ग्राम की प्राथमिकताओं में सड़क, पानी, सीवेज, स्वच्छता तो होगी ही। साथ ही इन गांवों में शिक्षा और स्वास्थ्य को खास महत्व दिया जाएगा। कोशिश यह भी की जाएगी कि इन गांवों में सरकारी योजनाओं के अलावा निजी सेक्टर से रोजगार के साधन मुहैया कराए जाएं। ताकि ग्रामीणों को अपनी धरती से पलायन का दंश न झेलना पड़े।
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ढाई से ज्यादा गांव होंगे विकसित
मप्र को गांवों का प्रदेश कहा जाता है। एक अनुमान के मुताबिक यहां 54 हजार से ज्यादा गांव मौजूद हैं। हालंकि केंद्र और प्रदेश की विभिन्न योजनाओं ने इन गांवों तक सड़क, पानी, बिजली की सुविधाएं पहुंचाई हैं। प्रदेश सरकार के नए कदम से हर विधानसभा में एक एक गांव विकसित किया जाता है तो कुल 230 गांवों तक सुविधाएं पहुंचेंगी। इसके अलावा प्रदेश के सांसदों को भी उनकी संसदीय सीमा में एक गांव गोद लेने की व्यवस्था है। इस लिहाज से प्रदेश के ढाई सौ से ज्यादा गांव पहले से ज्यादा विकसित हो सकते हैं। 
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पहले की तरह न हो हश्र
पूर्व व्यवस्था के मुताबिक प्रदेश के सांसद अपने क्षेत्र के गांव गोद तो ले लेते हैं। लेकिन इनमें से अधिकांश सांसद जिम्मेदारी लेने के बाद वे अपने कर्तव्य से विमुख ही दिखाई दिए हैं। गोद लेने के बाद कई गांवों का यह हश्र भी हुआ है कि संबंधित सांसद पूरे कार्यकाल में उस गांव तक पहुंचे ही नहीं हैं। प्रदेश में नई व्यवस्था की शुरुआत के साथ इस बात पर ध्यान रखना भी जरूरी होगा कि संबंधित विधायक इसके प्रति गंभीरता दिखाएं।

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