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Mahashivratri: तीन स्वयं प्रकट शिव... सदियों पुरानी आस्था, पहाड़ी से लेकर वट वृक्ष तक शिव का अद्भुत स्वरूप

Sun, 15 Feb 2026 07:29 AM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल Published by: संदीप तिवारी Updated Sun, 15 Feb 2026 07:29 AM IST
सार

भोपाल में नेवरी का मनकामेश्वर महादेव, सोमवारा का बड़ वाले महादेव और लालघाटी का गुफा शिव मंदिर तीन ऐसे प्राचीन शिवधाम हैं, जहां शिवलिंग स्वयं प्रकट माने जाते हैं। नेवरी और बड़ वाले महादेव मंदिर दो सौ वर्ष से अधिक पुराने हैं, जबकि गुफा मंदिर लगभग 77 वर्ष पूर्व प्रकाश में आया। महाशिवरात्रि पर इन स्थलों पर हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

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Mahashivratri: Bhopal's 3 self-manifested Shivas, centuries-old faith, Shiva's amazing form from the hill to t
गुफा शिव मंदिर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजधानी भोपाल केवल झीलों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी प्राचीन धार्मिक विरासत के लिए भी जानी जाती है। यहां तीन ऐसे शिवधाम हैं, जहां विराजमान शिवलिंग को मानव द्वारा स्थापित नहीं, बल्कि स्वयं प्रकट माना जाता है। नेवरी का मनकामेश्वर महादेव, सोमवारा का बड़ वाले महादेव और लालघाटी पहाड़ी का गुफा शिव मंदिर-तीनों स्थान आस्था, इतिहास और परंपरा का जीवंत उदाहरण हैं। नेवरी और बड़ वाले महादेव मंदिरों का इतिहास दो सौ वर्ष से अधिक पुराना माना जाता है, जबकि लालघाटी का गुफा शिव मंदिर लगभग 77 वर्ष पूर्व प्रकाश में आया। महाशिवरात्रि पर इन मंदिरों में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है।
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नेवरी का मनकामेश्वर महादेव, जमीन से प्रकट आस्था
नेवरी स्थित मनकामेश्वर महादेव मंदिर को 18वीं सदी का बताया जाता है। जनश्रुति है कि नवाबी काल में भूमि खुदाई के दौरान शिवलिंग धरती के भीतर से दिखाई दिया। यह एक ही पत्थर का लंबा शिवलिंग है, जिसका केवल ऊपरी भाग बाहर है, शेष हिस्सा आज भी जमीन के भीतर माना जाता है। यहां सावन और शिवरात्रि पर विशेष पूजन और अभिषेक का आयोजन होता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु शामिल होते हैं।
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सोमवारा का बड़ वाले महादेव, वट वृक्ष की छाया में शिव
कायस्थपुरा क्षेत्र के सोमवारा स्थित बड़ वाले महादेव मंदिर की पहचान विशाल वट वृक्ष के नीचे स्थित शिवलिंग से है। मान्यता है कि संतों ने यहां शिवलिंग के स्वयं प्रकट होने की जानकारी दी थी। प्रारंभ में यहां छोटा सा ढांचा बना, जो समय के साथ भव्य मंदिर में परिवर्तित हो गया।
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महाशिवरात्रि पर यहां से निकलने वाली शिव बारात विशेष आकर्षण का केंद्र रहती है। वर्तमान में मंदिर का नवीनीकरण कार्य भी जारी है।

लालघाटी का गुफा शिव मंदिर, चट्टानों के बीच बहती जलधारा
लालघाटी पहाड़ी पर स्थित गुफा शिव मंदिर राजधानी के अनोखे धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। गुफा के भीतर विराजमान शिवलिंग के पास चट्टानों से प्राकृतिक जलधारा बहती रहती है, जो इस स्थल की विशेषता है। बताया जाता है कि वर्ष 1948 में एक संत ने पहाड़ी क्षेत्र में भ्रमण के दौरान इस गुफा में शिवलिंग को देखा। स्थानीय लोगों की सहायता से इसे बाहर निकालकर नियमित पूजा प्रारंभ की गई। बाद में मंदिर का पुनरुद्धार भी किया गया।


परंपरा से जुड़ी आस्था
राजधानी भोपाल के ये तीनों शिवधाम इस बात के प्रतीक हैं कि आस्था समय के साथ और गहरी होती जाती है। स्वयं प्रकट माने जाने वाले शिवलिंगों के कारण इन स्थलों की धार्मिक महत्ता और बढ़ जाती है। सावन और महाशिवरात्रि पर यहां श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
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