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राजस्थान की तरह शराब का अपना ब्रांड बनाएगी मध्यप्रदेश सरकार, महुआ से होगी तैयार

Thu, 31 Dec 2020 02:50 PM IST
कुमार संभव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: कुमार संभव Updated Thu, 31 Dec 2020 02:50 PM IST
सार

  • राजस्थान की 'चंद्रहास' और 'आशा' शराब की तर्ज पर बनाई गई योजना
  • सरकार के इस कदम से राजस्व बढ़ने का जताया जा रहा अनुमान

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Madhya Pradesh Government will make own liquor from mahua like Rajasthan jodhpur Chandrahas udaipur Asha
शराब - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

राजस्थान के जोधपुर में 'चंद्रहास' और उदयपुर में 'आशा' ब्रांड की शराब काफी मशहूर है। इससे राजस्थान सरकार को काफी राजस्व मिलता है। अब इसी तर्ज पर मध्यप्रदेश सरकार ने भी शराब का अपना ब्रांड बनाने की तैयारी कर ली है। यह शराब महुआ से बनेगी, जिसे शराब की दुकानों पर ही बेचा जाएगा। हालांकि, इस शराब का नाम सरकार ने फिलहाल तय नहीं किया है।

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यह है सरकार की प्लानिंग

जानकारी के मुताबिक, मध्यप्रदेश के आबकारी विभाग ने हेरिटेज मदिरा पॉलिसी बनाई है, जिसे कैबिनेट में लाया जाएगा। इसके तहत मध्यप्रदेश में मौजूद शराब बनाने वाली फैक्ट्रियां आदिवासी क्षेत्रों के स्व सहायता समूहों की मदद से महुआ से शराब बनवाएंगी। विभाग के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि इससे अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों को काम मिलेगा। साथ ही, जहरीली शराब पीने से मौत जैसी घटनाएं भी रुकेंगी। 
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राजस्व पर भी सरकार की नजर

आबकारी विभाग का कहना है कि सरकार के इस कदम से राजस्व की नई संभावनाएं भी बढ़ेंगी। दरअसल, हेरिटेज मदिरा पॉलिसी में यह भी प्रस्तावित किया गया है कि शराब का उत्पादन, बॉटलिंग और विक्रय की प्रक्रिया में सुधार किया जाए। ई-आबकारी सिस्टम लागू होने और विभाग का पूरी तरह कंप्यूटराइजेशन करने से राजस्व बढ़ेगा। बता दें कि ई-आबकारी सिस्टम को एनआईसी से बनवाया गया है।
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राज्य के बाहर भी भेजी जाएगी यह शराब

आबकारी विभाग के अधिकारियों का दावा है कि महुआ से बनने वाली सरकारी शराब को बिक्री के लिए दूसरे राज्यों में भी भेजने की योजना बनाई गई है। इसके तहत हेरिटेज मदिरा पॉलिसी में प्रावधान रखा गया है कि शराब की गुणवत्ता से कोई भी समझौता नहीं किया जाएगा। हालांकि, शराब बनाने के दौरान इसका आदिवासी मिजाज जरूर बरकरार रखा जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि सरकार ने इस शराब को बनाने के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। उम्मीद है कि इससे राजस्व में काफी फायदा होगा।
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