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केन-बेतवा लिंक परियोजना: PM मोदी 25 दिसंबर को करेंगे शुभारंभ, 8 साल में होगी पूरी, MP के 10 जिलों को होगा लाभ
Mon, 23 Dec 2024 11:02 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Mon, 23 Dec 2024 11:02 PM IST
सार
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी केन-बेतवा लिंक परियोजना का शिलान्यास खजुराहो के मेला ग्राउंड से 25 दिसंबर को करेंगे। ये परियोजना पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का सपना थी। इन नदियों के जुड़ने से बुंदेलखंड में पानी की समस्या कम होगी। इससे यूपी और एमपी के जिलों को फायदा मिलेगा।
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केन बेतवा लिंक परियोजना।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई और पेयजल संकट को दूर करने के लिए ऐतिहासिक केन-बेतवा लिंक परियोजना का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 दिसंबर खजुराहो से करेंगे। परियोजना के लिए 44,608 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत हुई है। इसमें केंद्र सरकार 90 प्रतिशत खर्च उठाएगी। बाकी 10 प्रतिशत राशि राज्य सरकार वहन करेगी। इससे मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश दोनों राज्यों में सिंचाई और पेयजल समस्या का स्थायी समाधान मिलेगा।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नदियों को जोड़ने के दृष्टिकोण को साकार करते हुए प्रधानमंत्री मोदी केन-बेतवा लिंक परियोजना का शिलान्यास खजुराहो के मेला ग्राउंड से 25 दिसंबर को करेंगे। इस परियोजना को दो चरणों में 8 साल में पूरा किया जाएगा। प्रथम चरण में मध्यप्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिलों में केन नदी पर दौधन बांध का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए तीन हजार चार सौ करोड़ की राशि स्वीकृत हुई है। बांध के लिए भूमि अधिग्रहण का काम 60 प्रतिशत पूरा हो गया है।
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पहाड़ के अंदर से बनेगी 1.1 और 1.9 किमी की दो टनल
केन-बेतवा लिंक परियोजना मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिले में केन नदी पर बन रही है। इसके तहत पन्ना टाइगर रिजर्व में केन नदी पर 77 मीटर ऊंचाई एवं 2.13 किलोमीटर लंबाई का दौधन बांध बनेगा। इसके अलावा दो टनल भी बनेंगी। यहां पर 2,853 मिलियन घन मीटर पानी का भंडारण किया जाएगा। बांध पर टनल अपर लेवल पर 1.9 किमी एवं लोअर लेवल पर 1.1 किमी की बनेंगी। बांध से 221 किमी लंबी लिंक नहर के द्वारा दोनों राज्यों में सिंचाई एवं पेयजल की सुविधा मिलेगी। साथ ही केन नदी का अधिशेष जल को बेतवा नदी में छोड़ा जाएगा।
एमपी और यूपी की 65 लाख जनता को मिलेगा सीधा फायदा
परियोजना में दाब युक्त सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के माध्यम से मध्य प्रदेश के पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी,सागर, रायसेन, विदिशा, शिवपुरी, दतिया समेत 10 जिलों को फायदा होगा। इन जिलों के लगभग दो हजार गावों की 8.11 लाख हेक्टेयर जमीन में सिंचाई हो सकेगी। इन जमीनों से जुड़े 7 लाख किसान परिवारों को सीधा फायदा होगा। वहीं, उत्तरप्रदेश में 59 हजार क्षेत्र में वार्षिक सिंचाई सुविधा प्राप्त होगी एवं 1.92 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मौजूदा सिंचाई का स्थिरीकरण किया जाएगा। इससे उत्तरप्रदेश के महोबा, झांसी, ललितपुर एवं बांदा जिलों में सिंचाई सुविधा प्राप्त होगी। दौधन बांध के निर्माण से उत्तरप्रदेश में बांधा जिले में बाढ़ की विभीषिका से छुटकारा मिलेगा। इस परियोजना से मध्य प्रदेश की 44 लाख एवं उत्तर प्रदेश की 21 लाख आबादी को पेयजल की सुविधा भी उपलब्ध होगी। दोनों राज्यों की 65 लाख जनता को होगा फायदा।
103 मेगावॉट जल विद्युत और 27 मेगावॉट सौर ऊर्जा बनेगी
इस परियोजना से प्रदेश में 103 मेगावॉट जल विद्युत और 27 मेगावॉट सौर ऊर्जा बनेगी। इसका पूरा लाभ मध्य प्रदेश को होगा। इसके लिए दो पॉवर प्लांट बनाए जाएंगे। इनकी क्षमता 60 मेगावॉट और 18 मेगावॉट की होगी। दोधन बांध से 60 मेगावॉट और लोवर लेवल टनल से 18 मेगावॉट जलविद्युत का उत्पादन होगा। इसके अलावा शिवपुरी जिले में ऊर नदी के लोअर ऊर बांध पर 19 मेगावॉट सौर ऊर्जा, सागर में बीना नदी पर बीना परियोजना में 21 मेगावॉट जल विद्युत और विदिशा में बेतवा नदी पर कोठा बैराज में 8 मेगावॉट सौर ऊर्जा बनेगी।
42 तालाब से भूमि होंगी रिचार्ज
परियोजना में ऐतिहासिक चंदेल कालीन तालाबों को सहेजने का कार्य भी किया जाएगा। इससे मध्य प्रदेश के छतरपुर, टीकमगढ़ एवं निवाड़ी जिले में चंदेल कालीन 42 तालाबों का मरम्मत/ जीर्णोंधार का काम किया जाएगा। इसमें बारिश के पानी को भरा जाएगा। इन तालाबों से भूजलस्तर बढ़ेगा और ग्रामीण क्षेत्र को फायदा होगा। वहीं, दौधन जलाशय से पन्ना टाइगर रिजर्व में वन में जंगली जानवरों को साल भर पीने का पानी उपलब्ध होगा।
दूसरे चरण में सहायक नदियों पर बनेंगे बांंध
दौधन बांध बनने के बाद टनल और कैनाल से बेतवा नदी तक पानी जाएगा। कैनाल का पानी सिंचाई में उपयोग होगा। बाकी पानी नदी में छोड़ दिया जाएगा। इसके दूसरे चरण में विदिशा में बेतवा नदी, सागर जिले के बीना में, शिवपुरी में उर नदी पर बांध बनाए जाएंगे। दूसरे चरण में सात बांधों का निर्माण किया जाएगा।
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नदियों को जोड़ने के दृष्टिकोण को साकार करते हुए प्रधानमंत्री मोदी केन-बेतवा लिंक परियोजना का शिलान्यास खजुराहो के मेला ग्राउंड से 25 दिसंबर को करेंगे। इस परियोजना को दो चरणों में 8 साल में पूरा किया जाएगा। प्रथम चरण में मध्यप्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिलों में केन नदी पर दौधन बांध का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए तीन हजार चार सौ करोड़ की राशि स्वीकृत हुई है। बांध के लिए भूमि अधिग्रहण का काम 60 प्रतिशत पूरा हो गया है।
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पहाड़ के अंदर से बनेगी 1.1 और 1.9 किमी की दो टनल
केन-बेतवा लिंक परियोजना मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिले में केन नदी पर बन रही है। इसके तहत पन्ना टाइगर रिजर्व में केन नदी पर 77 मीटर ऊंचाई एवं 2.13 किलोमीटर लंबाई का दौधन बांध बनेगा। इसके अलावा दो टनल भी बनेंगी। यहां पर 2,853 मिलियन घन मीटर पानी का भंडारण किया जाएगा। बांध पर टनल अपर लेवल पर 1.9 किमी एवं लोअर लेवल पर 1.1 किमी की बनेंगी। बांध से 221 किमी लंबी लिंक नहर के द्वारा दोनों राज्यों में सिंचाई एवं पेयजल की सुविधा मिलेगी। साथ ही केन नदी का अधिशेष जल को बेतवा नदी में छोड़ा जाएगा।
एमपी और यूपी की 65 लाख जनता को मिलेगा सीधा फायदा
परियोजना में दाब युक्त सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के माध्यम से मध्य प्रदेश के पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी,सागर, रायसेन, विदिशा, शिवपुरी, दतिया समेत 10 जिलों को फायदा होगा। इन जिलों के लगभग दो हजार गावों की 8.11 लाख हेक्टेयर जमीन में सिंचाई हो सकेगी। इन जमीनों से जुड़े 7 लाख किसान परिवारों को सीधा फायदा होगा। वहीं, उत्तरप्रदेश में 59 हजार क्षेत्र में वार्षिक सिंचाई सुविधा प्राप्त होगी एवं 1.92 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मौजूदा सिंचाई का स्थिरीकरण किया जाएगा। इससे उत्तरप्रदेश के महोबा, झांसी, ललितपुर एवं बांदा जिलों में सिंचाई सुविधा प्राप्त होगी। दौधन बांध के निर्माण से उत्तरप्रदेश में बांधा जिले में बाढ़ की विभीषिका से छुटकारा मिलेगा। इस परियोजना से मध्य प्रदेश की 44 लाख एवं उत्तर प्रदेश की 21 लाख आबादी को पेयजल की सुविधा भी उपलब्ध होगी। दोनों राज्यों की 65 लाख जनता को होगा फायदा।
103 मेगावॉट जल विद्युत और 27 मेगावॉट सौर ऊर्जा बनेगी
इस परियोजना से प्रदेश में 103 मेगावॉट जल विद्युत और 27 मेगावॉट सौर ऊर्जा बनेगी। इसका पूरा लाभ मध्य प्रदेश को होगा। इसके लिए दो पॉवर प्लांट बनाए जाएंगे। इनकी क्षमता 60 मेगावॉट और 18 मेगावॉट की होगी। दोधन बांध से 60 मेगावॉट और लोवर लेवल टनल से 18 मेगावॉट जलविद्युत का उत्पादन होगा। इसके अलावा शिवपुरी जिले में ऊर नदी के लोअर ऊर बांध पर 19 मेगावॉट सौर ऊर्जा, सागर में बीना नदी पर बीना परियोजना में 21 मेगावॉट जल विद्युत और विदिशा में बेतवा नदी पर कोठा बैराज में 8 मेगावॉट सौर ऊर्जा बनेगी।
42 तालाब से भूमि होंगी रिचार्ज
परियोजना में ऐतिहासिक चंदेल कालीन तालाबों को सहेजने का कार्य भी किया जाएगा। इससे मध्य प्रदेश के छतरपुर, टीकमगढ़ एवं निवाड़ी जिले में चंदेल कालीन 42 तालाबों का मरम्मत/ जीर्णोंधार का काम किया जाएगा। इसमें बारिश के पानी को भरा जाएगा। इन तालाबों से भूजलस्तर बढ़ेगा और ग्रामीण क्षेत्र को फायदा होगा। वहीं, दौधन जलाशय से पन्ना टाइगर रिजर्व में वन में जंगली जानवरों को साल भर पीने का पानी उपलब्ध होगा।
दूसरे चरण में सहायक नदियों पर बनेंगे बांंध
दौधन बांध बनने के बाद टनल और कैनाल से बेतवा नदी तक पानी जाएगा। कैनाल का पानी सिंचाई में उपयोग होगा। बाकी पानी नदी में छोड़ दिया जाएगा। इसके दूसरे चरण में विदिशा में बेतवा नदी, सागर जिले के बीना में, शिवपुरी में उर नदी पर बांध बनाए जाएंगे। दूसरे चरण में सात बांधों का निर्माण किया जाएगा।
