मियां भोपाली के झोले-बतोले: कांगरेस- बकरीद पे बचेगी तो...
मल्लिकार्जुन खरगे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनने के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। भोपाल में उन्होंने कुछ ऐसा बोला कि सुर्खियां बन गया। इसे हमारे मियां भोपाली ने अपने खास अंदाज में पेश किया है।
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को खां, कांगरेस के अध्यक्ष पद के पिरत्याशी मल्लिकार्जुन खडगे भोपाल में जो बोल गए, वो कांगरेस पार्टी की जमीनी हकीकत हेगी। यूं पार्टी में 22 साल बाद पार्टी पिरसीडेंट का हो रिया हे, लिहाजा दोनो कंडीडेटों खडगे और थरूर में अंदरूनी तोर पर ठनी हुई हे। जाहिरा तोर पे एक दूसरे को भाई बता रिए हें पर इंतजार इस कुश्ती में दूसरे को पटखनी देने का हे। मधपिरदेश की राजधानी भोपाल में दोनो ने अपना पिरचार करा। खडगे को लाल कालीन वाली तवज्जो मिली तो थरूर को फीकी मुस्कुराहट। भला हो थरूर का के पार्टी में इत्ती बेकदरी के बावजूद वो मेदान में जमे हुए हें।
मियां, कांगरेस पार्टी के अध्यक्ष का चुनाव का नतीजा सीक्रेट बैलेट से होगा पर नतीजा सबको पेले से पता हेगा। बुजुर्ग नेता मल्लिकार्जन खडगे की पीठ पे आला कमान यानी कि गांधी खानदान का हाथ हेगा। उधर मुकाबले में डटे शशि थरूर का होसला ई उनकी ताकत हे। हाल में भोपाल में दोनो नेता अपनी केनवासिंग की खातिर भोपाल आए। खडगे के इस्तकबाल में नेताओ ओर कारकर्ताओं की भीड़ जुटी तो थरूर का स्वागत लालीपापनुमा हुआ। फिर भी थरूर मुतमइन नजर आए तो इस वजह से के बाकी सूबों में कांगरेसियों ने उन्हें इत्ती भी तवज्जो नई दी।
मगर सबसे जानदार बात मल्लिकार्जुन खडगे ने करी। मीडिया ने उनसे पूछा के कल को पिरधानमंतरी पद के दावेदार वो होंगे या राहुल गांधी? इसपे खडगेजी ने नहले पे दहला मारा के मियां, बकरीद में बचेंगे तो मोहर्रम में नाचेंगे। बोला तो उन्होंने खुद के बारे में था मगर लागू पूरी कांगरेस पार्टी पे हो रिया हे। मतलब ये के यूं पूरे मुल्क से कांगरेस का जिस तरह से सफाया हो रिया हे, उसके मद्देनजर दिल्ली के तखत पे फिर से काबिज होना आसमान से तारे तोड़ के लाने की माफिक हेगा। खडगे का इशारा साफ हे के अगर बकरीद पे बकरों की कुर्बान नई हुई तो उनका मोहर्रम में नाचने का हक बनता हे। लिहाजा मियां, पेले अध्यक्ष तो बन जाने दो, फिर देखेंगे। राजस्थान बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा ने खडगे बयान को मुसलमानों के धार्मिक जज्बात की तोहीन बता कर उनसे नामजदगी पर्चा वापस लेने की मांग करी। मगर तीर कमान से छूट चुका था ओर निशाने पर लगा था। हर कांगरेसी मन ही मन ये ई सोच रिया हेगा के इस चुनाव में जीते तो अगला चुनाव जीतने की उम्मीद हे। पेली दफा किसी नेता ने हकीकत बयानी करी हे। वरना दूसरे तमाम नेता तो जुबानी जमा खर्च के शेर खेलते रेते हें। उधर राहुल गांधी पेदल यात्रा करे जा रिए हें, उससे कुछ सियासी मक्खन भी निकलेगा के नई, ये कोई नई जानता। अध्यक्ष के चुनाव वास्ते वोट 17 अक्टूबर को पड़ने हें। नतीजा 19 को आएगा।
इधर मियां, शशि थरूर अपनी अलग पुंगी बजाए जा रिए हें। उनका दर्द ये हे कि कांगरेसी आला कमान कल्चर के आगे इत्ते लाचार हेंगे के कोई भी आला कमान की आंख के इशारे को फूंक के नई उड़ा सकता। कंडीडेट का काबिलियत से ज्यादा गांधी खानदान की उसकी इनायत मायने रखती हेगी।
लुब्बो लुआब ये खां, कहीं कुछ नई बदल रिया। खडगे अध्यक्ष बन भी गए तो कर क्या पाएंगे सिवाय हुकुम बजाने के। उधर राजस्थान में सीएम अशोक गहलोत ने आला कमान को भी जमीन सुंघा दी हे। न उनको कुर्सी से हटाते बन रिया हे ओर ना ही पायलट को कुर्सी पे बिठाने की हिकमत बन पा रई हे। कांगरेस अध्यक्ष का चुनाव न हुआ, चूं चू का मुरब्बा हो गया। सवाल तो ये भी हेगा कि अध्यक्ष की कुर्सी का चुनाव हारने के बाद शशि थरूर कांगरेस में रे के करेंगे क्या? परदेसी बन के घर में रेने का भी कोई मतलब नई हे। दिलचस्पी का सबब ये हे के अध्यक्ष के चुनाव में कोन हलाल होगा ओर कोन मोहर्रम के जुलूस में नाचेगा?
-बतोलेबाज
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