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मातृभाषा अनुष्ठान: CM बोले- हिंदी वर्णमाला हमारी पहली पाठशाला है, जो अ से अनपढ़ को ज्ञ से ज्ञानी बना देती है

Mon, 15 Sep 2025 08:57 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Mon, 15 Sep 2025 08:57 PM IST
सार

भोपाल में आयोजित भारतीय मातृभाषा अनुष्ठान कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मां और मातृभाषा से बड़ा कोई नहीं, यही हमारी संस्कृति और संवेदनाओं का आधार हैं। इस मौके पर उन्हें वॉव एशिया गोल्ड अवार्ड मिला और कई सांस्कृतिक अभियानों की शुरुआत की गई।

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Indian Mother Tongue Ritual: CM Dr. Yadav said- Just like Char Dham is at the feet of the mother, similarly An
सीएम भोपाल में भारतीय मातृभाषा अनुष्ठान कार्यक्रम में शामिल हुए - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सोमवार को रविन्द्र भवन के हंसध्वनि सभागार में भारतीय मातृभाषा अनुष्ठान कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव को विक्रमोत्सव-2025 आयोजन के लिए वॉव अवार्ड एशियन टीम ने विशेष श्रेणी में गोल्ड अवार्ड प्रदान किया। इस अवसर पर उन्होंने स्वदेशी जागरण अभियान के अंतर्गत  हमारी-लक्ष्मी-हमारे पास" अभियान का शुभारंभ किया और विश्व हिंदी ओलंपियाड एवं विश्वरंग के पोस्टर का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मां और मातृभाषा से आगे दूसरा कोई नहीं है। जैसे मां के चरणों में चारधाम है, वैसे ही मातृभाषा की गोद में आनंदधाम है। मातृभाषा हमारी सबसे बड़ी पालक है और उसका स्थान कोई नहीं ले सकता। हिन्दी हमारी संस्कृति और भावनाओं का आधार है, यह साहित्य और संवेदनाओं को जोड़ने वाली भाषा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 52 वर्णों से गुंथी हिन्दी की वर्णमाला ही हमारी पहली पाठशाला है, जो अ से अनपढ़ को ज्ञ से ज्ञानी बना देती है। अंग्रेजी और मंदारिन के बाद हिन्दी विश्व की तीसरी सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है। उन्होंने कहा कि भूतपूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ने हिंदी काव्य रचनाओं को नई पहचान दी, वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वैश्विक मंचों पर हिंदी में संबोधित कर भारत को गौरवान्वित कर रहे हैं।
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हिंदी हमारी चेतना और विचारों को व्यक्त करने वाली भाषा 
संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री  धर्मेंद्र सिंह लोधी ने कहा कि हिंदी हमारी सांस्कृतिक चेतना और विचारों को व्यक्त करने वाली भाषा है। प्रदेश सरकार हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने और चिकित्सा शिक्षा में इसके विस्तार की दिशा में कार्य कर रही है। आरएनटीयू के कुलगुरु डॉ. संतोष चौबे ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार की सांस्कृतिक पहल को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल रही है। अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला ने इसे हिंदी सम्मान का उल्लास पर्व बताया और कहा कि प्रदेश सरकार साहित्यकारों और लेखकों को सम्मानित कर गौरवान्वित हो रही है।
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10 साहित्यकार हुए सम्मानित
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हिंदी साहित्य लेखन और इसके वैश्विक प्रसार में योगदान देने वाले देश-विदेश के 10 मूर्धन्य साहित्यकारों को राष्ट्रीय हिंदी भाषा सम्मान से अलंकृत किया। इसमें 
- राष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी सम्मान :प्रशांत पोळ (जबलपुर, 2024), लोकेन्द्र सिंह राजपूत (भोपाल, 2025)
- राष्ट्रीय निर्मल वर्मा सम्मान : रीता कौशल (ऑस्ट्रेलिया, 2024), डॉ. वंदना मुकेश (इंग्लैण्ड, 2025)
- राष्ट्रीय फादर कामिल बुल्के सम्मान : डॉ. इंदिरा गाजिएवा (रूस, 2024), पदमा जोसेफिन वीरसिंघे (2025)
- राष्ट्रीय गुणाकर मुले सम्मान : डॉ. राधेश्याम नापित (शहडोल, 2024), डॉ. सदानंद दामोदर सप्रे (भोपाल, 2025)
- राष्ट्रीय हिंदी सेवा सम्मान : डॉ. के.सी. अजय कुमार (तिरुवनंतपुरम्, 2024), डॉ. विनोद बब्बर (दिल्ली, 2025)

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साहित्यिक पुस्तकों का विमोचन
इस अवसर पर भारतीय भाषा आलोक (राजेश्वर त्रिवेदी), भोजपुरी प्रतिभाएं (डॉ. पूजा शुक्ला), श्रीकृष्ण चरित्र (बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय), श्रीराधा द्वापर युग की महानायिका (अशोक शर्मा), लोक में वेदांत (डॉ. सरोज गुप्ता) सहित कई साहित्यिक पुस्तकों और गीता संहिताओं का विमोचन किया गया।

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गरिमामय उपस्थिति
कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, विधायक भगवानदास सबनानी, माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी, संचालक संस्कृति एमपी नामदेव, वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी सहित बड़ी संख्या में विद्वतजन और संस्कृति प्रेमी उपस्थित रहे।
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