फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Bhopal News ›   GMC management could not buy a machine for the treatment of cancer patients in four years, PG course closed

Bhopal:कैंसर मरीजों की सिकाई के लिए चार साल में एक मशीन नहीं खरीद पाया जीएमसी प्रबंधन,बंद हो गया पीजी कोर्स

Wed, 28 Aug 2024 07:14 PM IST
Sandeep Tiwari संदीप तिवारी
Updated Wed, 28 Aug 2024 07:14 PM IST
सार

प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल हमीदिया में चार साल में कैंसर मरीजों की सिकाई के लिए एक लीनियर एक्सीलेटर मशीन की खरीदी नहीं हो पाई है। पुरानी कोबाल्ट मशीन जिससे कैंसर मरीजों की सिकाई होती थी वह चार साल से बंद है। पीजी कोर्स बंद करना पड़ा है।

विज्ञापन
GMC management could not buy a machine for the treatment of cancer patients in four years, PG course closed
कमरे में बंद कोबाल्ट मशीन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल हमीदिया में कैंसर मरीजों की सिकाई के लिए एक मशीन तक नहीं खरीद पा रहे हैं। जबकि हॉस्पिटल में वर्ल्ड क्लास स्वास्थय सुविधाएं देने की बात की जा रही है। 2019 से देश की सबसे पुरानी कोबाल्ट मशीन जिससे कैंसर मरीजों की सिकाई होती थी वह बंद पड़ी है करीब 4 साल का समय बीत गया है। अधिकारियों और कॉलेज प्रबंधन के बीच इसे लेकर बैठक पर बैठक की जा चुकी है लेकिन अभी तक एक मशीन नहीं खरीद पाए हैं। हालत यह है कि मशीन नहीं होने से रेडियोलॉजी विभाग में पीजी कोर्स को बंद करना पड़ा है। कैंसर मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है। हाल ही में लोक स्वास्थ्य एवं कल्याण मंत्री डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने बैठक लेकर अधिकारियों से कैंसर से संबंधित मशीने खरीदने की बात कही है, लेकिन इस तरह की बातें पहले भी कई मंत्री कर चुके हैं,लेकिन उन पर अमल नहीं हुआ। अब देखना यह होगा कि क्या इस बार मशीन खरीदी जाती है या अभी भी मरीज को इंतजार करना पड़ेगा।
विज्ञापन


लीनियर एक्सीलेटर का प्रस्ताव कई सालों से पेंडिंग
हमीदिया में लीनियर एक्सीलेटर खरीदने का प्रस्ताव कई सालों से ठंडे बस्ते में है। पांच साल पहले केन्द्र सरकार ने हमीदिया अस्पताल को 24 करोड़ रुपए दिए थे। इसमें लीनियर एक्सीलेटर लगाने का भी प्रस्ताव था। करीब छह करोड़ रुपए इस मशीन की लागत है। विभाग ने खरीदी के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा था, लेकिन अब तक मशीन की खरीदी नहीं हुई। अब एक बार फिर से मशीन खरीदने की चर्चा जोरों पर है नए स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला इसे लेकर अधिकारियों से चर्चा भी की है और जल्द मशीन खरीदने के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन


कोबाल्ट मशीन चार साल से बंद
हमीदिया अस्पताल में कैंसर की सिकाई के लिए कोबाल्ट मशीन पिछले 4 साल से बंद है। ब्रेकीथैरेपी को बार-बार सुधार के काम चलाया जा रहा था लेकिन एक साल से ब्रेकीथैरेपी भी पूरी तरह बंद हो गई है। मेंटेनेंस करने वाली कंपनियों ने अब इन मशीनों का मेंटेनेंस करने से मना कर दिया है। अब हमीदिया अस्पताल में कैंसर के मरीजों की यहां न तो जांच की व्यवस्था है और न ही सिकाई के लिए मशीनें हैं। अस्पताल में जो मशीनें हैं वह बंद पड़ी हैं। हमीदिया अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग में हर दिन 40-50 मरीज इलाज और जांच के लिए पहुंचते हैं। इनमें से एक या दो मरीजों को सिकाई की जरूरत होती है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


गामा कैमरा  भी चार साल से बंद
हमीदिया में  गामा कैमरा में सीटी स्कैन की सुविधा भी है, लेकिन चार साल से बंद है। जानकारी के मुताबिक, यह 30 से 35 लाख रुपए में ठीक हो सकता है। लेकिन प्रबंधन इसे ठीक नहीं कराना चाहता। क्योंकि, अस्पताल में पीपीपी मोड पर सीटी स्कैन मशीन चल रही है। इसके लिए कंपनी को गरीब मरीज के लिए प्रतिमाह 40 से 50 लाख रुपए दिए जा रहे हैं। वहीं, सामान्य मरीजों से भी जांच के लिए 900 से 4 हजार ले रहे हैं।


जल्द आएगी मशीन टेंडर प्रक्रिया पूरी 
गांधी मेडिकल कॉलेज जीएमसी की डीन डॉ. कविता सिंह ने बताया कि लिनियर एक्सीलरेटर मशीन की खरीदी जल्द की जाएगी इसके लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। मशीन लगाने की जगह भी निर्धारित कर दी गई है, उसका भी काम जल्द शुरू किया जाएगा। 6 महीने के भीतर मशीन लग जाएगी। मशीन लगने के बाद पीजी कोर्स फिर से शुरू किया जाएगा। कैंसर मरीजों की सिकाई भी शुरू हो जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed