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टीईटी आवेदन की तारीख 11 अक्टूबर तक बढ़ी: शिक्षक भूख हड़ताल पर बोले- नहीं भरेंगे फॉर्म, विभाग की बढ़ी टेंशन

Mon, 05 Oct 2026 07:25 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Mon, 05 Oct 2026 07:25 PM IST
सार

टीईटी आवेदन की अंतिम तारीख 5 अक्टूबर है, लेकिन शिक्षक परीक्षा देने के बजाय आंदोलन कर रहे हैं। अब इसे बढ़ा कर 11 अक्टूर कर दिया गया है। शिक्षकों का सबसे बड़ा सवाल है कि वर्षों की सेवा के बाद उन्हें किस पद के लिए पात्रता परीक्षा देनी है। नीलम पार्क में धरने के आठवें दिन दमोह, जबलपुर और मंडला के शिक्षकों ने क्रमिक भूख हड़ताल शुरू कर दी।

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TET application deadline extended to October 11; teachers on hunger strike declare they won't fill out forms,
शिक्षकों का अनिश्चितकालीन धरना - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा के आवेदन की आखिरी तारीख सोमवार थी जिसे अब बढ़ा कर 11 अक्टूर कर दिया गया है। हजारों शिक्षक अब भी परीक्षा से दूरी बनाए हुए हैं। राजधानी के नीलम पार्क में 27 सितंबर से चल रहे अनिश्चितकालीन धरने के आठवें दिन शिक्षकों ने क्रमिक भूख हड़ताल शुरू कर दी। दमोह, जबलपुर और मंडला के शिक्षक पहले दिन भूख हड़ताल पर बैठे।शिक्षकों का सवाल है कि वर्षों से सरकारी सेवा में काम करने के बाद अब उन्हें दोबारा पात्रता परीक्षा के दायरे में क्यों लाया जा रहा है। उनका कहना है कि जब सेवा के दौरान उनके पद और जिम्मेदारियां कई बार बदल चुकी हैं, तो विभाग पहले यह स्पष्ट करे कि आखिर उन्हें किस पद के लिए टीईटी देनी है।
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23 हजार से ज्यादा आवेदन, फिर भी विभाग बढ़ा रहा दबाव
शिक्षक पात्रता परीक्षा के लिए आवेदन की अंतिम तारीख पहले 18 सितंबर तय थी, जिसे बढ़ाकर 5 अक्टूबर किया गया था, अब इसे 11 अक्टूबर तक के लिए फिर से बढ़ा दिया गया है। इसके बावजूद अब तक 23 हजार से ज्यादा शिक्षकों ने ही आवेदन किया है। अंतिम दिन नजदीक आते ही शिक्षकों का आरोप है कि जिला शिक्षा अधिकारियों और संकुल प्राचार्यों के माध्यम से उन्हें आवेदन करने के लिए कहा जा रहा है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि व्यक्तिगत रूप से शिक्षकों से संपर्क कर फॉर्म भरने का दबाव बनाने के बजाय सरकार को उनकी आपत्तियों पर बातचीत करनी चाहिए।
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1998 में शिक्षाकर्मी थे, अब किस पद की पात्रता परीक्षा दें?
आंदोलन कर रहे शिक्षकों का तर्क है कि उनकी सेवा का स्वरूप समय के साथ बदलता रहा है। कई शिक्षक बताते हैं कि उन्होंने 1998 में शिक्षाकर्मी के रूप में सेवा शुरू की, 2011 में अध्यापक बने और 2024 में उन्हें उच्च माध्यमिक शिक्षक का प्रभार दिया गया। ऐसे में उनका सवाल है कि अब उन्हें किस पद के लिए पात्रता परीक्षा देनी होगी। शिक्षकों का कहना है कि सरकार पहले इस स्थिति को स्पष्ट करे, इसके बाद परीक्षा को लेकर कोई फैसला किया जाए।
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परीक्षा शुल्क लेने का भी विरोध
शिक्षक संगठन केवल टीईटी की अनिवार्यता का ही विरोध नहीं कर रहे, बल्कि परीक्षा के लिए शुल्क लिए जाने पर भी सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि वर्षों से सरकारी सेवा में कार्यरत शिक्षकों की पात्रता जांच के नाम पर उनसे परीक्षा शुल्क लेना उचित नहीं है। शिक्षकों के मुताबिक यदि सरकार को उनकी योग्यता और सेवा की समीक्षा करनी है तो इसकी प्रक्रिया स्पष्ट और न्यायसंगत होनी चाहिए।

आंदोलन स्थल से आवेदन नहीं करने की अपील
भोपाल में चल रहे शिक्षक आंदोलनों में शिक्षकों से टीईटी के आवेदन नहीं करने की अपील भी की जा रही है। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा का दावा है कि इसी वजह से प्रदेशभर के बड़ी संख्या में शिक्षकों ने अब तक आवेदन नहीं किया है। मोर्चा का कहना है कि लंबे समय से सरकारी सेवा में कार्यरत शिक्षकों को दोबारा टीईटी के दायरे में लाना उचित नहीं है। संगठन ने सरकार से टीईटी की अनिवार्यता खत्म करने की मांग की है।

यह भी पढ़ें-पढ़ाई छोड़ सड़क पर उतरे विद्यार्थी: शिक्षिका पर लगाए मारपीट-धमकी के आरोप,3 घंटे प्रदर्शन के बाद विभाग ने हटाया


तमिलनाडु और जम्मू-कश्मीर की तर्ज पर छूट की मांग
अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा की मांग है कि मध्य प्रदेश में भी तमिलनाडु और जम्मू-कश्मीर की तर्ज पर लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से राहत देने का प्रस्ताव पारित किया जाए।

मोर्चा पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार शिक्षकों पर आवेदन करने का दबाव बनाने के बजाय शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करे और इस मामले का स्थायी समाधान निकाले।

दमोह-जबलपुर-मंडला के शिक्षक भूख हड़ताल पर
नीलम पार्क में शुरू हुई क्रमिक भूख हड़ताल के पहले दिन दमोह से प्रहलाद सिंह ठाकुर, जबलपुर से जगत पटेल और मंडला से अमरसिंह चंदेला, नफीस खान तथा संजीव सोनी भूख हड़ताल पर बैठे।
शिक्षकों ने कहा कि टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने समेत उनकी लंबित मांगों पर सरकार जब तक ठोस निर्णय नहीं लेती, आंदोलन जारी रहेगा।
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