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डॉ. अंबेडकर कामधेनु योजना: हितग्राहियों को मिलेगी 25 से 33% तक सब्सिडी, 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर चयन
Mon, 14 Apr 2025 10:32 AM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Mon, 14 Apr 2025 10:32 AM IST
सार
मध्यप्रदेश सरकार ने पशुपालकों को सशक्त बनाने और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 'डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना' की शुरुआत की है। इस योजना के तहत 25 दुधारू पशुओं की इकाइयों की स्थापना की जाएगी, जिसमें एक इकाई की लागत अधिकतम 42 लाख रुपए होगी। योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदक को मध्यप्रदेश का निवासी होना आवश्यक है, साथ ही डेयरी फार्मिंग का प्रशिक्षण प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
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सीएम डॉ. मोहन यादव
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश सरकार ने अंबेडकर जयंती से पशुपालकों को सशक्त बनाने और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 'डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना' की शुरुआत की है। इस योजना के तहत 25 दुधारू पशुओं की इकाइयों की स्थापना की जाएगी, जिसमें एक इकाई की लागत अधिकतम 42 लाख रुपये होगी। योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदक का मध्य प्रदेश का निवासी होना आवश्यक है, साथ ही डेयरी फार्मिंग का प्रशिक्षण अनिवार्य होगा।
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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना की सौगात दी है। देश में दूध, दुग्ध उत्पादों की बढ़ती मांग, उनकी आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री उद्यमिता विकास कार्यक्रम की स्थापना होनी है। एक इकाई में सारे गौवंश या सारे भैंसवंश होंगे। एक इकाई की सारी गाय-भैंस एक ही प्रजाति की होंगी।
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योजना सभी वर्गों के पशुपालकों के लिए
योजना सभी वर्गों के पशुपालकों के लिए होगी। इसमें पशुपालक की उम्र 21 साल से ऊपर होना जरूरी है। उन्हें अनुभव के लिए सरकारी या सरकार नामित संस्था से डेयरी फार्मिंग का प्रशिक्षण भी लेना होगा। इस प्रशिक्षण के लिए सरकार अलग से निर्देश जारी करेगी। इस योजना के हितग्राहियों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। हितग्राही के पास हर इकाई के लिए कम के सम 3.50 एकड़ कृषि भूमि होनी जरूरी है। इस भूमि में परिवार की सामूहिक जमीन का भी उपयोग किया जा सकता है। लेकिन, इसके लिए अन्य सदस्यों की सहमति आवश्यक होगी।
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इनको मिलेगी प्राथमिकता
इस योजना में वर्तमान में दुग्ध संघों में पहले से ही दूध सप्लाई कर रहे पशुपालकों को प्राथमिकता दी जाएगी। दुग्ध संघ प्रोड्युसर कंपनी के प्रचलित मिल्क रूट या नए मिल्क रूट पर आने वाले हितग्राहियों को प्राथमिकता देंगे। एक हितग्राही को एक या एक से अधिक (अधिकतम आठ इकाइयों, 200 दुधारू पशु) लेने की पात्रता होगी। एक से अधिक इकाईयां लेने की स्थिति में उन्नत गाय/संकर गाय या भैंस की इकाई अपनी सुविधा अनुसार चयन कर सकेगा। यानी, अगर हितग्राही तीन इकाइयां लेता है तो वह अपनी इच्छा अनुसार एक भैंस की इकाई, एक संकर गाय की इकाई तथा एक उन्नत देशी गौवंश की इकाई भी ले सकेगा। अगर हितग्राही द्वारा एक बार योजना का लाभ लेकर समस्त ऋण चुका दिया जाता है तो वह अगली बार योजना का लाभ लेने के लिए पात्र होगा। यह सुविधा अधिकतम आठ इकाईयों तक दी जा सकेगी। एक ऋण व दूसरे ऋण के बीच में कम से कम 2 वर्ष का अंतर जरूरी है।
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हितग्राहियों को मिलेगी सब्सिडी
इस योजना से लाभान्वित होने वाले लाभार्थी को डेयरी इकाई को सतत रूप से अधिकतम 7 वर्षों तक या ऋण की समाप्ति तक संचालित करना होगा। लाभार्थियों का चयन "पहले आओ, पहले पाओ" के आधार पर ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से होगा। दूसरा ऋण केवल पिछले ऋण चक्र के संतोषजनक पुनर्भुगतान पर ही दिया जाएगा। ऋण चार चरणों में वितरित किया जाएगा। पूंजी सब्सिडी और ब्याज अनुदान, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति श्रेणी के हितग्राहियों के लिए परियोजना लागत का 33 प्रतिशत तथा अन्य समस्त वर्गों के हितग्राहियों के लिए परियोजना लागत का 25 प्रतिशत सब्सिडी होगी। सब्सिडी वितरण की पहली तारीख से 3 वर्ष की लॉक इन अवधि के अंतर्गत एकमुश्त प्रदाय होगी। इस पर हितग्राही को कोई ब्याज नहीं देना होगा। हितग्राही अपने ऋण का भुगतान निर्धारित ऋण अवधि से पूर्व कभी भी कर सकता है।
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