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Digital Arrest: छह घंटे तक डिजिटल अरेस्ट रहे इंजीनियर को क्राइम ब्रांच ने बचाया, जानें क्यों मांग रहे थे 4 लाख

Wed, 13 Nov 2024 09:20 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: दिनेश शर्मा Updated Wed, 13 Nov 2024 09:20 PM IST
सार

भोपाल के स्टेशन बजरिया में एक इंजीनियर को साइबर जालसाजों ने छह घंटे तक डिजिटल अरेस्ट में रखा और केस खत्म करने के लिए 4 लाख रुपये की मांग की। परिवारजनों की सतर्कता से क्राइम ब्रांच मौके पर पहुंची और इंजीनियर को मुक्त कराया। मामले में अज्ञात आरोपियों पर केस दर्ज किया गया है।

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Digital Arrest: Crime Branch rescued the engineer who was in digital arrest for six hours
digital arrest - फोटो : FREEPIK

विस्तार

राजधानी के अरेरा कॉलोनी में कारोबारी को डिजिटल अरेस्ट करने के बाद अब स्टेशन बजरिया में रहने वाले एक इंजीनियर के साथ भी इसी प्रकार की घटना हुई। सायबर जालसाजों ने इंजीनियर युवक को करीब 6 घंटे तक उसी के घर में डिजिटल अरेस्ट रखा और पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए 4 लाख रुपये की मांग कर रहे थे। परिवारजनों और दोस्तों को शंका हुई तो उन्होंने क्राइम ब्रांच को सूचना दी, जिसके बाद मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने इंजीनियर को जालसाजों से बचा लिया। 
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इंजीनियर ने बताया कि वह इस प्रकार की घटनाओं को लेकर दूसरे लोगों को जागरूक किया करता था, लेकिन इस जालसाजों उस पर इस प्रकार के दबाव बनाया कि वह कुछ समझ नहीं पाया था। जानकारी के अनुसार स्टेशन बजरिया में रहने वाले प्रमोद कुमार एक टेलीकॉम कंपनी में इंजीनियर हैं। मंगलवार की शाम को उनके पास अज्ञात व्यक्ति ने फोन किया था। उसका कहना था कि आपको आधार कार्ड पर कई अन्य मोबाइल सिम ली गई हैं, जिनका मिसयूज हो रहा है। इसको लेकर अब आप पर पुलिस कार्रवाई होगी। पुलिस का नाम सुनकर प्रमोद डर गए तो फोन करने वाले ने उन्हें किसी से कुछ नहीं बताने और वीडियो कॉल पर बात करने का बोला। उसके बाद प्रमोद उनसे वीडियो कॉल पर बातचीत करने लगे। इस दौरान प्रमोद को पुलिस, वकील और अन्य अधिकारियों के कार्यालय का सीन दिखाई दिया। तीन लोग उनसे वीडियो कॉल पर बातचीत कर रहे थे। उनका कहना था कि आपके आधार कार्ड पर ली गई सिमों का जिस प्रकार का उपयोग किया गया है, उससे बड़ा मामला बनता है। प्रमोद कुमार कभी थाने नहीं गए थे, इसलिए वह काफी डर गए। 
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Digital Arrest: Crime Branch rescued the engineer who was in digital arrest for six hours
डिजिटल अरेस्ट का फरियादी व एडीसीपी शैलेंद्र चौहान - फोटो : अमर उजाला
केस खत्म करने के लिए करीब 4 लाख रुपए मांग रहे थे
फोनकर्ता उनसे साढ़े तीन से चार लाख रुपए का जुर्माना भरकर केस को खत्म करने का बात कर रहे थे। यह सिलसिला रात करीब एक बजे तक चलता रहा। क्राइम ब्रांच के अधिकारी पहुंचे घर प्रमोद कुमार जिस वक्त जालसाजों के चंगुल में थे, उस वक्त वह अपने परिवार वालों से भी बातचीत नहीं कर रहे थे। वह किसी दोस्त का भी फोन रिसीव नहीं कर रहे थे। परिजनों ने इसकी जानकारी उनके दोस्तों को दी, जिसके बाद क्राइम ब्रांच को सूचना मिली। बुधवार को क्राइम ब्रांच के एडिशनल डीसीपी शैलेंद्र सिंह चौहान समेत अन्य अधिकारी प्रमोद के घर पहुंचे और उनसे बातचीत की। 

अधिकारियों द्वारा की गई काउंसलिंग और समझाइश के बाद प्रमोद का डर खत्म हो पाया। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को बताया कि जालसाजों ने इतना ज्यादा डरा दिया था कि वह उन्हें रुपये ट्रांसफर करने वाले थे। क्राइम ब्रांच ने इस मामले में अज्ञात तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। मोबाइल नंबरों के आधार पर आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।
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