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परीक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाने पर मंथन: भोपाल में पहली बार गोलमेज सम्मेलन, पारदर्शी मूल्यांकन पर जोर
Wed, 02 Sep 2026 06:57 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Wed, 02 Sep 2026 06:57 PM IST
सार
भोपाल में पहली बार परीक्षा सुधारों पर गोलमेज सम्मेलन हुआ। इसमें परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह बनाने के साथ विद्यार्थियों के हित में मूल्यांकन व्यवस्था की खामियां दूर करने पर जोर दिया गया।
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गोलमेज सम्मेलन
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
विद्यार्थियों की परीक्षा और मूल्यांकन से जुड़ी समस्याओं को लेकर भोपाल में पहली बार गोलमेज सम्मेलन आयोजित किया गया। मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान में हुए सम्मेलन में शिक्षाविदों और अधिकारियों ने मौजूदा परीक्षा व्यवस्था की चुनौतियों पर चर्चा की। विद्यार्थी कल्याण न्यास की पहल पर हुए सम्मेलन में परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी, निष्पक्ष, गुणवत्तापूर्ण और जवाबदेह बनाने पर जोर दिया गया।सम्मेलन की अध्यक्षता मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, भोपाल के निदेशक डॉ. केके शुक्ला ने की। नेशनल बुक ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रो. मिलिंद मराठे विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि परीक्षा सुधार सिर्फ परिणाम घोषित करने तक सीमित नहीं होना चाहिए। पूरी परीक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता जरूरी है, ताकि विद्यार्थियों का व्यवस्था पर भरोसा कायम रहे।
विद्यार्थियों को मिले निष्पक्ष मूल्यांकन का अवसर
विशेषज्ञों और विद्यार्थियों ने परीक्षा सुधारों को लेकर अपने सुझाव दिए। प्रतिभागियों ने माना कि समय की जरूरत के अनुसार परीक्षा प्रणाली में लगातार बदलाव जरूरी है, ताकि विद्यार्थियों को न्यायसंगत और गुणवत्तापूर्ण मूल्यांकन मिल सके। मूल्यांकन से जुड़ी खामियों का समय पर समाधान करने की आवश्यकता भी बताई गई।
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हर स्तर पर जवाबदेही तय करने पर जोर
सम्मेलन में परीक्षा और मूल्यांकन व्यवस्था में हर स्तर पर जिम्मेदारी तय करने की जरूरत बताई गई। शिक्षा व्यवस्था से जुड़े प्रशासनिक प्रमुखों का एक मंच पर आकर परीक्षा सुधारों पर संवाद करना महत्वपूर्ण पहल माना गया। विद्यार्थी कल्याण न्यास के सचिव उमेश शर्मा ने सम्मेलन में आभार व्यक्त किया।
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विद्यार्थियों को मिले निष्पक्ष मूल्यांकन का अवसर
विशेषज्ञों और विद्यार्थियों ने परीक्षा सुधारों को लेकर अपने सुझाव दिए। प्रतिभागियों ने माना कि समय की जरूरत के अनुसार परीक्षा प्रणाली में लगातार बदलाव जरूरी है, ताकि विद्यार्थियों को न्यायसंगत और गुणवत्तापूर्ण मूल्यांकन मिल सके। मूल्यांकन से जुड़ी खामियों का समय पर समाधान करने की आवश्यकता भी बताई गई।
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हर स्तर पर जवाबदेही तय करने पर जोर
सम्मेलन में परीक्षा और मूल्यांकन व्यवस्था में हर स्तर पर जिम्मेदारी तय करने की जरूरत बताई गई। शिक्षा व्यवस्था से जुड़े प्रशासनिक प्रमुखों का एक मंच पर आकर परीक्षा सुधारों पर संवाद करना महत्वपूर्ण पहल माना गया। विद्यार्थी कल्याण न्यास के सचिव उमेश शर्मा ने सम्मेलन में आभार व्यक्त किया।
