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कर्ज प्रबंधन: एसीएस बोले- ऋण लेना और उसका शतप्रतिशत इस्तेमाल पूंजीगत व्यय में करना सर्वश्रेष्ठ नीति

Wed, 18 Feb 2026 09:04 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Wed, 18 Feb 2026 09:04 PM IST
सार

मध्यप्रदेश सरकार ने 2026-27 के बजट में कर्ज प्रबंधन को लेकर स्पष्ट रणनीति पेश की है। अधिकारियों का कहना है कि लिया गया 100% ऋण केवल पूंजीगत व्यय में लगाया जाएगा, ताकि भविष्य में आर्थिक मजबूती सुनिश्चित हो सके।

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Debt Management: ACS said – taking loan and using it 100% for capital expenditure is the best policy
वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा और वित्त विभाग के अधिकारी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदेश सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में विकास और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाए रखने का दावा किया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि राज्य नई उधारी पर निर्भरता को सीमित रखने और मौजूदा ऋण को व्यवस्थित तरीके से चुकाने का प्रयास करेगा। इस साल कुल बजट 4.38 लाख करोड़ रुपये का है और राजकोषीय घाटा तय सीमा के भीतर रखने का लक्ष्य रखा गया है। राज्य पर पहले से ही 4.90 लाख करोड़ रुपये का सार्वजनिक ऋण है, जिस पर हर साल बड़ी राशि ब्याज भुगतान में जाती है। ऐसे में नई उधारी को नियंत्रित रखना सरकार की प्राथमिकता है। वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव मनीष रस्तोगी ने कहा कि राज्य का ऋण लोगों के लिए किए गए निवेश के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि प्रति व्यक्ति ऋण के रूप में। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश उन राज्यों में से एक है, जो कोविड के दो वर्षों को छोड़कर पिछले 20 वर्षों में कभी भी अपने ऋण का पैसा राजस्व खर्च में इस्तेमाल नहीं करता। ऋण का 100 प्रतिशत इस्तेमाल पूंजीगत व्यय में किया जाता है। उन्होंने कहा कि ऋण लेना और उसका 100% उपयोग पूंजीगत व्यय में करना यह सर्वश्रेष्ठ नीति मानी जाती है। 
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ऋण प्रबंधन के तीन स्तर
अधिकारियों के अनुसार ऋण प्रबंधन की रणनीति तीन मुख्य स्तर पर लागू की जाती है। पहला राजस्व संग्रह बढ़ाना ताकि कर्ज पर निर्भरता कम हो। दूसरी पूंजीगत व्यय को प्राथमिकता देना यानी ऐसे प्रोजेक्ट्स पर खर्च जो भविष्य में आय और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाएं और तीसरा पुराने कर्ज का बोझ ब्याज दरों और रिफाइनेंसिंग (पुनर्वित्त) के जरिए कम करना। 
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केंद्र से ब्याज मुक्त कर्ज मिलेगा
रस्तोगी ने बताया कि इस वर्ष राज्य का राजकोषीय घाटा जीएसडीपी का 3.87 प्रतिशत रहने का अनुमान है। राज्य को केंद्र सरकार से 50 साल का ब्याज मुक्त ऋण भी प्राप्त होगा। 18.48 लाख करोड़ रुपये के जीएसडीपी के तहत, राज्य तीन प्रतिशत ऋण सीमा में रहकर हर माह लगभग 4,500–5,000 करोड़ रुपये का ऋण लेगा। इसका लक्ष्य कम से कम उधारी लेकर इसे पूरी तरह पूंजीगत व्यय में लगाना है।
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