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कांग्रेस ने तेज की चुनावी तैयारी: विधानसभा क्षेत्रों में जमीनी ताकत परखेगी पार्टी, 30 दिन में बनेगी रिपोर्ट
Fri, 09 Oct 2026 01:12 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Fri, 09 Oct 2026 01:12 PM IST
सार
कांग्रेस 230 विधानसभा क्षेत्रों में 30 दिन तक संगठन की जमीनी पड़ताल करेगी। बूथ समितियों की सक्रियता, कार्यकर्ताओं की नाराजगी, नेताओं के बीच मतभेद और स्थानीय राजनीतिक माहौल की रिपोर्ट तैयार कर प्रदेश नेतृत्व को दी जाएगी।
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पीसीसी भोपाल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। पार्टी ने प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों के प्रभारियों को अगले 30 दिन में अपने क्षेत्र के संगठन की पूरी स्थिति जानने का लक्ष्य दिया है। इस दौरान प्रभारी बूथ से लेकर ब्लॉक और पंचायत स्तर तक पहुंचकर पता करेंगे कि पार्टी का संगठन कहां सक्रिय है और कहां कामकाज केवल कागजों तक सीमित है। इस प्रक्रिया के जरिए कांग्रेस स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता, नेताओं के बीच तालमेल और संगठन की कमजोरियों का आकलन करेगी। पार्टी ने विधानसभा प्रभारियों की जिम्मेदारियां तय करते हुए स्पष्ट किया है कि उनकी भूमिका केवल बैठकें करने या पदाधिकारियों से जानकारी लेने तक सीमित नहीं रहेगी। उन्हें जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद करना होगा। एक महीने की पड़ताल के बाद प्रभारियों को संगठन की मौजूदा स्थिति, सामने आई समस्याओं और सुधार के लिए जरूरी कदमों की रिपोर्ट प्रदेश कांग्रेस को सौंपनी होगी।
बूथों पर पहुंचकर देखेंगे कितनी सक्रिय है कांग्रेस
विधानसभा प्रभारियों को यह पता करना होगा कि बूथ समितियां वास्तव में काम कर रही हैं या सिर्फ गठन तक सीमित हैं। इसके लिए वे ब्लॉक, मंडल, पंचायत और वार्ड स्तर के पदाधिकारियों से बातचीत करेंगे। पार्टी के कार्यक्रमों में कार्यकर्ताओं की भागीदारी और स्थानीय स्तर पर संगठन की गतिविधियों की जानकारी भी जुटाई जाएगी। इस समीक्षा में यह भी सामने लाने की कोशिश होगी कि किन क्षेत्रों में संगठन मजबूत है और कहां उसे सक्रिय करने की जरूरत है। प्रदेश नेतृत्व को इससे विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी की वास्तविक स्थिति का आकलन करने में मदद मिलेगी।
नाराज और निष्क्रिय कार्यकर्ताओं से भी होगा संवाद
कांग्रेस ने प्रभारियों को वरिष्ठ नेताओं, पुराने पदाधिकारियों, युवा और महिला कार्यकर्ताओं के साथ किसान, अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग तथा छात्र और युवा संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं से भी बात करने के निर्देश दिए हैं। लंबे समय से निष्क्रिय या नाराज कार्यकर्ताओं से बातचीत कर उनकी समस्याएं जानना भी इस जिम्मेदारी का हिस्सा है। पार्टी यह समझना चाहती है कि स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं की भागीदारी में कमी की वजह क्या है और संगठन में कहां सुधार की जरूरत है। सामने आने वाली समस्याओं को जिला अध्यक्ष और जिला प्रभारी के माध्यम से संबंधित नेतृत्व तक पहुंचाया जाएगा।
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गुटबाजी पर नजर, जिला अध्यक्षों के अधिकारों में नहीं करेंगे दखल
विधानसभा प्रभारियों को नेताओं के बीच मतभेद, पदाधिकारियों के विवाद और संगठन में तालमेल की कमी की जानकारी भी जुटानी होगी। हालांकि, उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे जिला अध्यक्षों के समानांतर संगठन नहीं चलाएंगे। उनकी जिम्मेदारी समस्याओं की पहचान करने, संबंधित नेतृत्व से समन्वय बनाने और समाधान का फॉलो-अप करने की होगी। इस व्यवस्था के जरिए पार्टी संगठन की आंतरिक समस्याओं की जानकारी जुटाना चाहती है, लेकिन जिला संगठन की मौजूदा जिम्मेदारियों को भी बनाए रखना चाहती है।
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जनता के मुद्दों और राजनीतिक माहौल की भी लेंगे जानकारी
प्रभारियों को अपने विधानसभा क्षेत्र में जनता के प्रमुख मुद्दों और राजनीतिक परिस्थितियों को समझने की जिम्मेदारी भी दी गई है। उन्हें पता करना होगा कि सरकार को लेकर स्थानीय लोगों की धारणा कैसी है, युवाओं और महिलाओं के प्रमुख सवाल क्या हैं और किसान-मजदूरों से जुड़े कौन से मुद्दे क्षेत्र में महत्वपूर्ण हैं। विपक्षी दलों की गतिविधियों पर भी नजर रखनी होगी। इसके साथ प्रदेश कांग्रेस की ओर से घोषित आंदोलन, जनसभाएं, पदयात्राएं और जनसंवाद कार्यक्रम बूथ स्तर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी विधानसभा प्रभारियों की होगी। पार्टी चाहती है कि प्रदेश स्तर के कार्यक्रम स्थानीय इकाइयों और कार्यकर्ताओं की भागीदारी के साथ जमीन पर दिखाई दें।
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30 दिन बाद प्रदेश कांग्रेस को सौंपेंगे रिपोर्ट
निर्धारित अवधि पूरी होने पर प्रभारियों को पांच प्रमुख बिंदुओं पर रिपोर्ट देनी होगी। इसमें विधानसभा क्षेत्र में संगठन की वर्तमान स्थिति, 30 दिन में किए गए काम, सामने आई प्रमुख समस्याएं, प्रदेश नेतृत्व से अपेक्षित मदद और आगे के लिए सुझाव शामिल होंगे। इस रिपोर्ट के आधार पर पार्टी नेतृत्व यह समझ सकेगा कि किन विधानसभा क्षेत्रों में संगठन को अधिक सक्रिय करने की जरूरत है और किन समस्याओं के समाधान के लिए जिला या प्रदेश स्तर पर कदम उठाने होंगे।
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बूथों पर पहुंचकर देखेंगे कितनी सक्रिय है कांग्रेस
विधानसभा प्रभारियों को यह पता करना होगा कि बूथ समितियां वास्तव में काम कर रही हैं या सिर्फ गठन तक सीमित हैं। इसके लिए वे ब्लॉक, मंडल, पंचायत और वार्ड स्तर के पदाधिकारियों से बातचीत करेंगे। पार्टी के कार्यक्रमों में कार्यकर्ताओं की भागीदारी और स्थानीय स्तर पर संगठन की गतिविधियों की जानकारी भी जुटाई जाएगी। इस समीक्षा में यह भी सामने लाने की कोशिश होगी कि किन क्षेत्रों में संगठन मजबूत है और कहां उसे सक्रिय करने की जरूरत है। प्रदेश नेतृत्व को इससे विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी की वास्तविक स्थिति का आकलन करने में मदद मिलेगी।
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नाराज और निष्क्रिय कार्यकर्ताओं से भी होगा संवाद
कांग्रेस ने प्रभारियों को वरिष्ठ नेताओं, पुराने पदाधिकारियों, युवा और महिला कार्यकर्ताओं के साथ किसान, अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग तथा छात्र और युवा संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं से भी बात करने के निर्देश दिए हैं। लंबे समय से निष्क्रिय या नाराज कार्यकर्ताओं से बातचीत कर उनकी समस्याएं जानना भी इस जिम्मेदारी का हिस्सा है। पार्टी यह समझना चाहती है कि स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं की भागीदारी में कमी की वजह क्या है और संगठन में कहां सुधार की जरूरत है। सामने आने वाली समस्याओं को जिला अध्यक्ष और जिला प्रभारी के माध्यम से संबंधित नेतृत्व तक पहुंचाया जाएगा।
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गुटबाजी पर नजर, जिला अध्यक्षों के अधिकारों में नहीं करेंगे दखल
विधानसभा प्रभारियों को नेताओं के बीच मतभेद, पदाधिकारियों के विवाद और संगठन में तालमेल की कमी की जानकारी भी जुटानी होगी। हालांकि, उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे जिला अध्यक्षों के समानांतर संगठन नहीं चलाएंगे। उनकी जिम्मेदारी समस्याओं की पहचान करने, संबंधित नेतृत्व से समन्वय बनाने और समाधान का फॉलो-अप करने की होगी। इस व्यवस्था के जरिए पार्टी संगठन की आंतरिक समस्याओं की जानकारी जुटाना चाहती है, लेकिन जिला संगठन की मौजूदा जिम्मेदारियों को भी बनाए रखना चाहती है।
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जनता के मुद्दों और राजनीतिक माहौल की भी लेंगे जानकारी
प्रभारियों को अपने विधानसभा क्षेत्र में जनता के प्रमुख मुद्दों और राजनीतिक परिस्थितियों को समझने की जिम्मेदारी भी दी गई है। उन्हें पता करना होगा कि सरकार को लेकर स्थानीय लोगों की धारणा कैसी है, युवाओं और महिलाओं के प्रमुख सवाल क्या हैं और किसान-मजदूरों से जुड़े कौन से मुद्दे क्षेत्र में महत्वपूर्ण हैं। विपक्षी दलों की गतिविधियों पर भी नजर रखनी होगी। इसके साथ प्रदेश कांग्रेस की ओर से घोषित आंदोलन, जनसभाएं, पदयात्राएं और जनसंवाद कार्यक्रम बूथ स्तर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी विधानसभा प्रभारियों की होगी। पार्टी चाहती है कि प्रदेश स्तर के कार्यक्रम स्थानीय इकाइयों और कार्यकर्ताओं की भागीदारी के साथ जमीन पर दिखाई दें।
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30 दिन बाद प्रदेश कांग्रेस को सौंपेंगे रिपोर्ट
निर्धारित अवधि पूरी होने पर प्रभारियों को पांच प्रमुख बिंदुओं पर रिपोर्ट देनी होगी। इसमें विधानसभा क्षेत्र में संगठन की वर्तमान स्थिति, 30 दिन में किए गए काम, सामने आई प्रमुख समस्याएं, प्रदेश नेतृत्व से अपेक्षित मदद और आगे के लिए सुझाव शामिल होंगे। इस रिपोर्ट के आधार पर पार्टी नेतृत्व यह समझ सकेगा कि किन विधानसभा क्षेत्रों में संगठन को अधिक सक्रिय करने की जरूरत है और किन समस्याओं के समाधान के लिए जिला या प्रदेश स्तर पर कदम उठाने होंगे।
