{"_id":"69a30d42463d8ec3090e660f","slug":"coal-mining-permitted-in-singrauli-sidhi-elephant-corridor-ngt-issues-notice-to-centre-state-and-adani-gro-2026-02-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"सिंगरौली-सीधी में ‘एलिफेंट कॉरिडोर’ में कोयला खनन की अनुमति! एनजीटी का केंद्र, राज्य और अडानी समूह को नोटिस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सिंगरौली-सीधी में ‘एलिफेंट कॉरिडोर’ में कोयला खनन की अनुमति! एनजीटी का केंद्र, राज्य और अडानी समूह को नोटिस
Sat, 28 Feb 2026 09:14 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Sat, 28 Feb 2026 09:14 PM IST
सार
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने सिंगरौली-सीधी में कोल ब्लॉक आवंटन और पर्यावरणीय स्वीकृति पर सवाल उठने के बाद केंद्र, राज्य सरकार, अडानी समूह और नेशनल वाइल्डलाइफ बोर्ड को नोटिस जारी किया है। एनजीटी ने चार सप्ताह में जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई 22 अप्रैल 2026 तय की है। याचिका पर्यावरणविद अजय दुबे ने दायर की गई है, जिसमें मई 2025 में दी गई पर्यावरणीय स्वीकृति को चुनौती दी गई है।
विज्ञापन
एनजीटी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सिंगरौली-सीधी क्षेत्र में कोल ब्लॉक आवंटन और पर्यावरणीय स्वीकृति की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, मध्य प्रदेश सरकार, अडानी समूह और नेशनल वाइल्डलाइफ बोर्ड को नोटिस जारी किया है। एनजीटी ने चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति अफरोज अहमद की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 22 अप्रैल 2026 निर्धारित की है। याचिका पर्यावरणविद अजय दुबे ने दायर की गई है, जिसमें मई 2025 में दी गई पर्यावरणीय स्वीकृति को चुनौती दी गई है।
ये भी पढ़ें- MP News: भोपाल में किताब-यूनिफॉर्म के नाम पर दबाव की शिकायतें, अब स्कूलों की होगी निगरानी, बनाया जांच दल
याचिका में कहा गया है कि सिंगरौली के घने वन क्षेत्र में लगभग 1500 हेक्टेयर वन भूमि को कोयला खनन के लिए आवंटित किया गया, जबकि वन विभाग की पूर्व साइट सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार यह क्षेत्र प्रस्तावित ‘एलिफेंट कॉरिडोर’ में आता है। नियमों के मुताबिक ऐसे कॉरिडोर की 10 किलोमीटर परिधि में खनन गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। अप्रैल 2024 में गठित एक उच्चस्तरीय समिति ने स्थल निरीक्षण के बाद अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कोयला उत्खनन के विरुद्ध अनुशंसा की थी। समिति ने क्षेत्र को अत्यंत समृद्ध और जैव-विविधता से भरपूर वन क्षेत्र बताते हुए कहा था कि यहां हाथियों सहित कई वन्यजीवों की नियमित आवाजाही होती है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई थी कि खनन गतिविधियों से वन्यजीव आवास को गंभीर क्षति पहुंचेगी।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- अवैध कॉलोनियों पर होगा कड़ा प्रहार: तीन माह में आएगा सख्त कानून, 10 साल की सजा और 1 करोड़ रुपये जुर्माना
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ राधेलाल गुप्ता ने दलील दी कि सर्वोच्च न्यायालय और एनजीटी के पूर्व आदेशों के बावजूद सिंगरौली-सीधी क्षेत्र को अब तक औपचारिक रूप से ‘एलिफेंट कॉरिडोर’ घोषित नहीं किया गया है। लोकसभा में भी केंद्र सरकार ने शपथपत्र के माध्यम से इस क्षेत्र को कॉरिडोर के रूप में प्रस्तावित बताया था, लेकिन अधिसूचना जारी नहीं हुई। मामले में क्षेत्रीय स्तर पर भी विरोध सामने आया है। पेड़ों की कटाई शुरू होने के बाद याचिकाकर्ता ने अधिकरण का दरवाजा खटखटाया। अब एनजीटी के नोटिस के बाद इस बहुचर्चित कोल ब्लॉक आवंटन और पर्यावरणीय स्वीकृति पर कानूनी बहस तेज हो गई है।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- MP News: भोपाल में किताब-यूनिफॉर्म के नाम पर दबाव की शिकायतें, अब स्कूलों की होगी निगरानी, बनाया जांच दल
विज्ञापन
याचिका में कहा गया है कि सिंगरौली के घने वन क्षेत्र में लगभग 1500 हेक्टेयर वन भूमि को कोयला खनन के लिए आवंटित किया गया, जबकि वन विभाग की पूर्व साइट सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार यह क्षेत्र प्रस्तावित ‘एलिफेंट कॉरिडोर’ में आता है। नियमों के मुताबिक ऐसे कॉरिडोर की 10 किलोमीटर परिधि में खनन गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। अप्रैल 2024 में गठित एक उच्चस्तरीय समिति ने स्थल निरीक्षण के बाद अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कोयला उत्खनन के विरुद्ध अनुशंसा की थी। समिति ने क्षेत्र को अत्यंत समृद्ध और जैव-विविधता से भरपूर वन क्षेत्र बताते हुए कहा था कि यहां हाथियों सहित कई वन्यजीवों की नियमित आवाजाही होती है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई थी कि खनन गतिविधियों से वन्यजीव आवास को गंभीर क्षति पहुंचेगी।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- अवैध कॉलोनियों पर होगा कड़ा प्रहार: तीन माह में आएगा सख्त कानून, 10 साल की सजा और 1 करोड़ रुपये जुर्माना
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ राधेलाल गुप्ता ने दलील दी कि सर्वोच्च न्यायालय और एनजीटी के पूर्व आदेशों के बावजूद सिंगरौली-सीधी क्षेत्र को अब तक औपचारिक रूप से ‘एलिफेंट कॉरिडोर’ घोषित नहीं किया गया है। लोकसभा में भी केंद्र सरकार ने शपथपत्र के माध्यम से इस क्षेत्र को कॉरिडोर के रूप में प्रस्तावित बताया था, लेकिन अधिसूचना जारी नहीं हुई। मामले में क्षेत्रीय स्तर पर भी विरोध सामने आया है। पेड़ों की कटाई शुरू होने के बाद याचिकाकर्ता ने अधिकरण का दरवाजा खटखटाया। अब एनजीटी के नोटिस के बाद इस बहुचर्चित कोल ब्लॉक आवंटन और पर्यावरणीय स्वीकृति पर कानूनी बहस तेज हो गई है।
