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Ramadan Special: नासिक का तरबूज, चंदेरी का खरबूज बुझा रहा भोपाल के रोजादारों की प्यास, 90 टन से ज्यादा खपत

Tue, 26 Mar 2024 10:59 AM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: शबाहत हुसैन Updated Tue, 26 Mar 2024 10:59 AM IST
सार

Ramadan Special: 36 डिग्री पार चल रहे पारे के साथ करीब 13 घंटे से अधिक समय सूखे रहने वाले कंठ को जब इफ्तार का वक्त मिलता है तो दस्तरख्वान पर सजे लजीज पकवान नहीं लुभाते, बल्कि तरबूज और खरबूज में छिपी ताजगी सुकून देती है। शहर के रोजादारों की इस प्यास को बुझाने में नासिक, होशंगाबाद और हरदा से पहुंच रहे इस फल की खपत इन दिनों करीब 90 टन से ज्यादा है। तरबूज का साथ देने के लिए अलग अलग शहरों से आ रहे खरबूज, पपीता, केला, आम भी अपनी मौजूदगी बनाए हुए हैं।

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Chanderi melon is quenching the thirst of fasting people of Bhopal.
रमजान का दस्तरख्वान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

माह-ए-रमजान में तरबूज की डिमांड आम दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ी हुई है। जहां आम दिनों में 13 टन से भरी एक या दो गाड़ियां शहर की जरूरत पूरी कर दिया करती हैं, वहीं रमजान की शुरुआत से ही ये आंकड़ा करीब 7 ट्रक प्रतिदिन हो गया है। नवबहार सब्जी मंडी के थोक विक्रेता इरशाद राइन और नईम खान बताते हैं कि इन दिनों तरबूज का थोक रेट 10 से 15 रुपए तक है। जबकि खेरची दुकानों तक पहुंचने तक यह भाव 20 से 25 रुपए प्रति किलो तक पहुंच रहा है। इस आंकड़े के लिहाज से भोपाल में हर दिन 18 लाख रुपए से ज्यादा के तरबूज की बिक्री हो रही है।

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रोजादारों की पसंद ये भी
तरबूज के अलावा इफ्तार के दस्तरख्वान पर दूसरे नंबर पर पसंद किया जाने वाला फ्रूट खरबूज है। भोपाल में इसकी खपत चंदेरी और मुंगावली से हो रही है। हर दिन इसके भी 4 से 5 ट्रक उतर रहे हैं। गले को तरावट और मन को सुकून देने में केला भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। जिसके लिए भुसावल ने मोर्चा सम्हाल रखा है। आम दिनों के 5 से 6 ट्रक के मुकाबले रमजान में करीब 10 ट्रक केला खप रहा है। इसके अलावा गर्मी से राहत देने वाला फल संतरा अपनी परंपरागत नगरी नागपुर से आ रहा है तो पपीते की पूर्ति भी भुसावल और प्रदेश के निमाड़ इलाकों से हो रही है।
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समय से पहले आ धमके फलों के शहंशाह आम
मौसम के आम को पहुंचने में फिलहाल कुछ समय बाकी है, लेकिन रमजान की डिमांड को देखते हुए इस फल की आमद भी शुरू हो गई है। उप्र के विभिन्न शहरों से भोपाल पहुंच रहे आम ने फिलहाल खास होने की तख्ती उठा रखी है। आम सीजन के दिनों के मुकाबले इसके दाम फिलहाल चार गुना तक बढ़े हुए हैं। लेकिन स्वाद के शौकीन इन्हें भी अपनी इफ्तार मीनू में इसको शामिल कर रहे हैं। स्वाद में मीठेपन की कमी होने के चलते इसको मैंगो शेक और शरबत के तौर पर ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है।
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शरबतों का बादशाह रूह अफज़ा
रोजादारों को हर शाम अफ्तारी में शरबत ए खास की तलब भी होती है। इसकी पूर्ति कई दशक से एक खास शरबत करता आ रहा है। रूह अफ़ज़ा का गाढ़ापन, इसका खुशबूदार जायका और सभी को पसंद आने वाला स्वाद अब भी बदस्तूर इफ्तार दस्तरख्वान की जीनत बना हुआ है। रूह अफ़जा के लिए लोगों की दीवानगी का आलम लॉक डाउन के दौरान उस समय देखने को मिली, जब ये बाजार से नदारद हो गया। पाकिस्तानी से आयातित मिलता जुलता ब्रांड और कई तरह के लाल रंग लिए हुए शरबतों ने इस मौके से जमकर चांदी काटी थी। इस बीच नजारा यह भी देखने को मिला कि जिन लोगों को पुराने स्टॉक से रूह अफ़जा आसान उपलब्ध हो गया, उन्होंने अपने खास लोगों में इसका वितरण बतौर खास तोहफा पहुंचाया। नीयत ये भी थी कि रोजादारों को उनकी पसंद का शरबत मिलेगा तो उन्हें इसका सवाब (पुण्य) मिलेगा।

खजूर के जायके कई
पुराने जमाने को छत्ते वाली चिपचिपी पिंड खजूर अब चंद लोगों तक ही सीमित रह गई है। इसकी जगह बाजार में दर्जनों किस्म की स्वादिष्ट खजूर ने ले रखी है। अधिकतम सऊदी अरब से आयात होने वाली खजूर के दाम भी महंगी मिठाइयों से कुछ ज्यादा ही हैं। रोजा इफ्तार की एक शरई पाबंदी के लिहाज से इसका इस्तेमाल किया जाता है। आम दिनों में भी इसका उपयोग अब बढ़ता जा रहा है। जिसके चलते शहर भोपाल में कई बड़े शो रूम जैसी खुबसूरत खजूर दुकानें आकार लेने लगी हैं।


सब्जियों के दाम ने सिर उठाया
आमतौर पर रमजान माह में सेहरी, इफ्तार और रात को डिनर में नॉन वेज को ज्यादा डिमांड होती है। इसके बावजूद सब्जियों का महत्व भी अपनी जगह बना हुआ है। रमजान और गर्मी के मौसम की साथ साथ शुरुआत के बीच मंडियों में सब्जी की कमी का डंका बज गया है। भिंडी, गिलकी, पालक, गोभी जैसी सब्जियां क्षेत्रीय किसानों से न के बराबर तादाद में आ रही हैं। जिसका नतीजा इनकी उपलब्धता इंदौर और आसपास की मंडियों से हो रही है। शरबत, चटनी, खाने की कई डिशेज का साथ निभाने वाले नींबू ने भी अपने अधिकतम महंगा होने का ऐलान इन दिनों कर रखा है।

भोपाल से खान आशु की रिपोर्ट

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