Bhopal: एमपी कांग्रेस में अभी भी अनुशासन की दिख रही कमी, पीसीसी चीफ को विधायक ने करा दिया 1 घंटे तक इंतजार
पीसीसी चीफ पटवारी को पद संभाले 1 साल से ज्यादा का समय बीत गया है। लेकिन पटवारी कांग्रेस नेताओं के साथ अभी तक पूरी तरह सामंजस्य नहीं बन पाए हैं। प्रदेश के कई कांग्रेसी नेता अभी भी पटवारी की नहीं सुनते हैं। ऐसा ही एक मामला पीसीसी में देखने को मिला।
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प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को पद संभाले एक साल से ज्यादा का समय बीत गया है, लेकिन पटवारी कांग्रेस नेताओं के साथ अभी तक पूरी तरह सामंजस्य नहीं बन पाए हैं। प्रदेश के कई कांग्रेसी नेता अभी भी जीतू पटवारी की नहीं सुनते हैं। ऐसा ही एक मामला राजधानी भोपाल स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में देखने को मिला, जब जीतू पटवारी ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले को लेकर दोपहर 12 बजे प्रेस वार्ता बुलाई थी। ठीक उसी समय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और भोपाल से विधायक आरिफ मसूद भी इसी मुद्दे को लेकर प्रदर्शन करने पहुंच गए। ऐसे में जीतू पटवारी के प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया के लोग नहीं पहुंचे। आखिरकार जीतू पटवारी को अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस को एक घंटे लेट करना पड़ा।
इससे साफ जाहिर होता है कि जीतू पटवारी और कांग्रेस नेताओं के बीच पटरी नहीं जम रही है, जबकि पटवारी ने एक दिन पहले ही प्रेस कांफ्रेंस करने की सूचना जारी कर दी थी आरिफ मसूद को इसकी जानकारी होने के बाद भी उन्होंने इसी समय प्रदर्शन रखा। हालांकि, मामले को संभालने के लिए प्रदर्शन के बाद आरिफ मसूद भी पटवारी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए।
बैठकों में नहीं पहुंचते कई नेता
एमपी कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी मध्य प्रदेश कांग्रेस में नई जान फूंकने की कोशिश में प्रदेश भर का दौरा कर रहे हैं। चौधरी जीतू पटवारी के साथ नेताओं की अलग-अलग बैठकर ले रहे हैं, लेकिन कई दिग्गज नेता उनके बैठकों में नहीं पहुंचते हैं। हाल ही में हुई राजनीतिक मामले की बैठक में कांग्रेस के कई दिग्गज नेता नहीं पहुंचे। इनमें प्रमुख रूप से पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह, राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा, नकुलनाथ समेत कई नेता नदारद रहे। इससे साफ होता है कि अभी भी प्रदेश में जीतू पटवारी की स्वीकारता पूर्ण रूप से नहीं हो पाई है। हालांकि, जीतू पटवारी भी यह स्वीकार कर चुके हैं कि पार्टी में एकता की कमी है। पटवारी पार्टी में एकजुटता लाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।
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जिलाध्यक्षों की नियुक्ति की तैयारी तेज
इधर, कांग्रेस में जिलाध्यक्षों में बदलाव को लेकर तैयारी शुरू कर दी गई है। जल्द ही जिलों के अध्यक्षों को बदला जाएगा। जिला अध्यक्षों के चयन के लिए गुजरात पैटर्न पर काम किया जाएगा। जिस तरह से गुजरात में जिलाध्यक्षों को खोजने के लिए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गई थी। ठीक उसी तरह मध्यप्रदेश के प्रत्येक जिले में एआईसीसी की ओर से पर्यवेक्षकों की तैनाती की जाएगी, जो योग्य जिलाध्यक्ष की चयन प्रक्रिया में सहयोग करेंगे।
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गुजरात पैटर्न पर होगी प्रक्रिया
कांग्रेस ने गुजरात के 33 जिला और 8 बड़े शहरों के जिलाध्यक्षों की नियुक्ति के लिए प्रदेश स्तर के 183 और केंद्रीय स्तर के 42 पर्यवेक्षक नियुक्त किए हैं। मध्य प्रदेश में भी जिलाध्यक्षों के चयन के लिए कांग्रेस गुजरात पैर्टन अपनाने पर विचार कर रही है। बीते दिनों राहुल गांधी ने कहा था कि जिलाध्यक्ष संगठन की नींव होते हैं। जिला कांग्रेस संगठन और जिलाध्यक्ष को हम पार्टी की नींव बनाने जा रहे हैं।
