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दिल्ली हादसे से भी नहीं जागा भोपाल: 3 हजार जर्जर मकान, हजारों लोगों की जान खतरे में, बारिश में केवल नोटिस
Thu, 10 Sep 2026 04:40 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Thu, 10 Sep 2026 04:40 PM IST
सार
भोपाल में 3 हजार से ज्यादा जर्जर भवन चिन्हित हैं, बारिश शुरू होते ही भवनों को लेकर नोटिस जारी करने की कार्रवाई की गई थी। अब तक सिर्फ 35 भवन हटाए और पांच खाली कराए गए हैं। दिल्ली हादसे के बाद सवाल है कि बाकी खतरनाक भवनों और उनमें रह रहे लोगों की सुरक्षा के लिए निगम ने क्या किया गया।
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भोपाल में जर्जर इमारत
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दिल्ली के सत्य निकेतन में जर्जर इमारत गिरने से हुई मौतों के बाद देशभर में पुराने और असुरक्षित भवनों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं, लेकिन भोपाल में खतरा पहले से मौजूद है। नगर निगम के सर्वे में शहर में 3 से ज्यादा जर्जर बताए गए हैं। इन मकानों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर अब तक ज्यादातर मामलों में नोटिस तक ही बात सीमित रही है। दिल्ली हादसे के बाद भी भोपाल में इन भवनों की मौजूदा स्थिति पर कोई बड़ा अभियान नजर नहीं आया है।
3,435 मकान, कार्रवाई सिर्फ 35 पर
नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक शहर में चिन्हित 3,435 जर्जर भवनों में 2,464 सरकारी और 971 निजी भवन हैं। इनमें 757 भवन अति जर्जर श्रेणी में हैं। जुलाई में निगम ने बताया था कि अब तक सिर्फ 35 जर्जर भवन हटाए गए, जबकि पांच अति जर्जर भवन खाली कराए गए थे। बाकी भवनों को लेकर नोटिस जारी करने की कार्रवाई बताई गई थी। यानी जिन हजारों भवनों को खतरनाक माना गया, उनमें से बड़ी संख्या के मामले में नोटिस के बाद आगे की कार्रवाई का इंतजार है।
बारिश में बढ़ जाता है खतरा
जर्जर भवनों के लिए बारिश सबसे बड़ा खतरा मानी जाती है। लगातार पानी से पुरानी दीवारों और छतों की मजबूती प्रभावित होती है। पुराने भोपाल के कई इलाकों में ऐसे मकान आबादी के बीच मौजूद हैं, जहां आसपास रहने और आने-जाने वाले लोगों की संख्या भी ज्यादा है।
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यह भी पढ़ें-एमपी में थमी तेज बारिश: 3 दिन राहत, 13 सितंबर से फिर बदलेगा मौसम, अभी सामान्य से 7% कम पानी
दिल्ली में हादसा, यहां सवाल-नोटिस के बाद क्या?
सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिरने से छह लोगों की मौत के बाद दिल्ली में पुराने और असुरक्षित भवनों की जांच और कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। भोपाल में सवाल यह है कि 3,435 जर्जर भवनों में से अब कितने सुरक्षित किए गए? कितनों को खाली कराया गया? कितने गिराए गए और कितने अब भी उसी हालत में खड़े हैं? बारिश का दौर भले कमजोर पड़ गया हो, लेकिन जर्जर भवनों का खतरा खत्म नहीं हुआ है। दिल्ली हादसे के बाद अब भोपाल में भी सिर्फ नोटिस नहीं, बल्कि जर्जर भवनों की मौजूदा स्थिति, खाली कराए गए मकानों और उनमें रह रहे परिवारों का स्पष्ट आंकड़ा सामने लाने की जरूरत है।
इन इलाकों में सबसे ज्यादा खतरा
शहर के कई हिस्सों में जर्जर भवन लोगों की जान पर खतरा बने हुए हैं। ओल्ड सुभाष नगर और गौतम नगर में सबसे अधिक 327 जर्जर भवन हैं। ऐशबाग जनता क्वार्टर के 600 मकान रहने लायक नहीं बचे हैं। वहीं अरेरा कॉलोनी, जवाहर चौक, धोबी घाट, इब्राहिमपुरा, गुर्जरपुरा और काजीपुरा में भी वर्षों से नोटिस दिए जा रहे हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं हो रही। रिहायशी इलाकों के अलावा कई स्कूल, धर्मशालाएं, ट्रस्ट भवन और व्यावसायिक परिसर भी जर्जर हालत में हैं। बैरागढ़, शिवाजी नगर और रेलवे स्टेशन रोड जैसे व्यस्त बाजारों में भी कई दुकानें खतरनाक स्थिति में हैं, जहां रोज हजारों लोगों की आवाजाही रहती है।
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3,435 मकान, कार्रवाई सिर्फ 35 पर
नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक शहर में चिन्हित 3,435 जर्जर भवनों में 2,464 सरकारी और 971 निजी भवन हैं। इनमें 757 भवन अति जर्जर श्रेणी में हैं। जुलाई में निगम ने बताया था कि अब तक सिर्फ 35 जर्जर भवन हटाए गए, जबकि पांच अति जर्जर भवन खाली कराए गए थे। बाकी भवनों को लेकर नोटिस जारी करने की कार्रवाई बताई गई थी। यानी जिन हजारों भवनों को खतरनाक माना गया, उनमें से बड़ी संख्या के मामले में नोटिस के बाद आगे की कार्रवाई का इंतजार है।
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बारिश में बढ़ जाता है खतरा
जर्जर भवनों के लिए बारिश सबसे बड़ा खतरा मानी जाती है। लगातार पानी से पुरानी दीवारों और छतों की मजबूती प्रभावित होती है। पुराने भोपाल के कई इलाकों में ऐसे मकान आबादी के बीच मौजूद हैं, जहां आसपास रहने और आने-जाने वाले लोगों की संख्या भी ज्यादा है।
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दिल्ली में हादसा, यहां सवाल-नोटिस के बाद क्या?
सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिरने से छह लोगों की मौत के बाद दिल्ली में पुराने और असुरक्षित भवनों की जांच और कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। भोपाल में सवाल यह है कि 3,435 जर्जर भवनों में से अब कितने सुरक्षित किए गए? कितनों को खाली कराया गया? कितने गिराए गए और कितने अब भी उसी हालत में खड़े हैं? बारिश का दौर भले कमजोर पड़ गया हो, लेकिन जर्जर भवनों का खतरा खत्म नहीं हुआ है। दिल्ली हादसे के बाद अब भोपाल में भी सिर्फ नोटिस नहीं, बल्कि जर्जर भवनों की मौजूदा स्थिति, खाली कराए गए मकानों और उनमें रह रहे परिवारों का स्पष्ट आंकड़ा सामने लाने की जरूरत है।
इन इलाकों में सबसे ज्यादा खतरा
शहर के कई हिस्सों में जर्जर भवन लोगों की जान पर खतरा बने हुए हैं। ओल्ड सुभाष नगर और गौतम नगर में सबसे अधिक 327 जर्जर भवन हैं। ऐशबाग जनता क्वार्टर के 600 मकान रहने लायक नहीं बचे हैं। वहीं अरेरा कॉलोनी, जवाहर चौक, धोबी घाट, इब्राहिमपुरा, गुर्जरपुरा और काजीपुरा में भी वर्षों से नोटिस दिए जा रहे हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं हो रही। रिहायशी इलाकों के अलावा कई स्कूल, धर्मशालाएं, ट्रस्ट भवन और व्यावसायिक परिसर भी जर्जर हालत में हैं। बैरागढ़, शिवाजी नगर और रेलवे स्टेशन रोड जैसे व्यस्त बाजारों में भी कई दुकानें खतरनाक स्थिति में हैं, जहां रोज हजारों लोगों की आवाजाही रहती है।
