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Bhopal: काटजू अस्पताल में बिना एनेस्थीसिया किया ऑपरेशन,महिला की मौत के 7 माह बाद अधीक्षक समेत 5 लोगों पर FIR

Tue, 07 Jan 2025 06:44 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: संदीप तिवारी Updated Tue, 07 Jan 2025 06:44 PM IST
सार

राजधानी भोपाल के काटजू अस्पताल में 7 माह पहले महिला की मौत मामले में एफआईआर दर्ज की गई है। मामले में बिना एनेस्थीसिया के ही नसबंदी का ऑपरेशन किए जाने का आरोप है। 

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Bhopal: Operation done without anesthesia in Katju hospital, FIR lodged against 5 people including superintend
काटजू अस्पताल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजधानी भोपाल के काटजू अस्पताल में लापरवाही की शिकायतें लगातार आती रहती हैं। यहां पर 7 महीने पहले एक महिला की जान चली गई थी। जिसके बाद खूब हंगामा हुआ था। अब 7 महीने बाद अस्पताल के अधीक्षक सहित 5 पर टीटी नगर पुलिस ने मामला दर्ज किया है। मृतका अस्पताल में नसबंदी के लिए आई थी। परिवार ने अस्पताल प्रबंधन पर आरोप लगाया था कि अस्पताल में बिना एनेस्थीसिया के ही ऑपरेशन किया गया। जिसके चलते महिला की मौत हुई। टीटी नगर पुलिस ने, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनंदा जैन, काटजू अस्पताल के अधीक्षक कर्नल पीके सिंह, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, मेडिकल ऑफिसर मेडिको लीगल इंस्टीट्यूट जीएमसी डॉ. केलू ग्रेवाल और पैरामेडिकल स्टाफ पर एफआईआर दर्ज की है।
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 बिना एनेस्थीसिया के ऑपरेशन का आरोप
वकील अनिल कुमार नामदेव के अनुसार लंबी जद्दोजहद के बाद यह एफआईआर हुई है। प्राइवेट शिकायत पर न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद मामला दर्ज हुआ है। प्रारंभिक स्तर पर पाया कि यह मेडिकल नेग्लिजेंस का केस है। महिला को एनेस्थीसिया दिए बिना ओटी में लेकर गए। वहां उन्हें 1 सेमी का चीरा लगाया। इससे लापरवाही साबित होती है। वह 10 बजे पूरी तरह से स्वस्थ थीं। ऑल ऑफ सडन क्या हो गया कि है वह कोलेप्स हो गई। अभी तक की जानकारी में पाया गया है कि उस समय अस्पताल में दो दो एनेस्थीसिया विशेषज्ञ थे। मगर ओटी में एक भी नहीं गया था। यह आईएमए की गाइडलाइन का उल्लंघन है।
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जाने क्या है पूरा मामला
यह मामला 14 मई 2024 का है। सिवनी मालवा निवासी रीना गौर (38) नसबंदी ऑपरेशन के लिए काटजू अस्पताल में भर्ती हुई थी। ऑपरेशन थिएटर में ले जाने के 20 मिनट बाद उसकी मौत हो गई। रीना के पति अविनाश गौर के मुताबिक ऑपरेशन से पहले रीना पूरी तरह स्वस्थ थी। जब उसे थिएटर से बाहर लाया गया तो उसका पेट फूला हुआ था। डॉक्टरों और स्टाफ ने गलत जानकारी दी और कहा कि ऑपरेशन के दौरान अटैक आने से रीना की मौत हुई है। उस समय मुझसे कई तरह के पेपर भी दबाव बनवाकर साइन करवाए गए। उसके बाद पुलिस ने पोस्टमॉर्टम के लिए मना कर दिया। बाद में बहुत जोर लगाने के बाद बॉडी का पोस्टमॉर्टम हुआ। जिसमें हमने विसरा प्रिजर्व करने की मांग की। वह भी पुलिस और डॉक्टर ने नहीं किए। अविनाश ने इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से भी की थी।
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