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Bhopal News: बजट पर टिकी व्यापारियों की नजर,टैक्स में राहत,मंडी शुल्क खत्म करने और स्टार्टअप पैकेज की उम्मीदें
Sun, 15 Feb 2026 07:28 AM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Sun, 15 Feb 2026 07:28 AM IST
सार
18 फरवरी को पेश होने जा रहे मध्य प्रदेश के बजट 2026-27 से प्रदेश का व्यापारी वर्ग ठोस राहत की उम्मीद लगाए बैठा है। व्यापारियों ने कमर्शियल टैक्स और स्टांप ड्यूटी में कमी, मंडी शुल्क समाप्त करने, पेट्रोल-डीजल को जीएसटी में शामिल करने, नए टैक्स न लगाने, ऑनलाइन व्यापार पर संतुलित नीति बनाने और स्टार्टअप व मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र के लिए विशेष पैकेज की मांग उठाई है।
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विधानसभा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश सरकार 18 फरवरी को 2026-27 का पहला पेपरलेस बजट पेश करने जा रही है। डिजिटल फॉर्मेट में आने वाला यह बजट कई मायनों में खास माना जा रहा है, लेकिन प्रदेश का व्यापारी वर्ग साफ कह रहा है।इस बार सिर्फ घोषणाएं नहीं, ठोस राहत चाहिए।
भोपाल से अलग-अलग व्यापारी संगठनों ने टैक्स, मंडी शुल्क, स्टांप ड्यूटी, ऑनलाइन कारोबार और इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर सरकार के सामने खुलकर मांगें रखी हैं।
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कमर्शियल टैक्स और स्टांप ड्यूटी पर बड़ा सवाल
व्यापारी संगठन के रमाकांत तिवारी ने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद भी भोपाल में अलग से लगने वाला कमर्शियल टैक्स व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ है। इस टैक्स पर रोक लगनी चाहिए। हम कोर्ट तक गए, लेकिन अब भी राहत नहीं मिली। अगर इसे खत्म किया जाए तो व्यापारियों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने स्टांप ड्यूटी को लेकर भी असमानता का मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि इंडस्ट्रियल सेक्टर को करोड़ों के लोन पर बेहद कम स्टांप ड्यूटी देनी पड़ती है, जबकि व्यापारी को लोन लेने से पहले भारी स्टांप ड्यूटी चुकानी पड़ती है। इसे खत्म या कम किया जाए, तभी व्यापार को गति मिलेगी।
मंडी टैक्स और लाइसेंस प्रक्रिया पर नाराजगी
किराना व्यापारी संगठन के महामंत्री विवेक साहू ने कहा कि बजट में अक्सर महिलाओं पर ज्यादा फोकस रहता है, लेकिन व्यापारियों के लिए ठोस प्रावधान कम होते हैं। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश गेहूं, धनिया, लहसुन और सरसों उत्पादन में अग्रणी है, लेकिन मंडी शुल्क और लाइसेंस प्रक्रिया सबसे महंगी यहीं है। साहू ने ऑनलाइन कारोबार से पारंपरिक व्यापार पर पड़ रहे असर का मुद्दा उठाते हुए कहा कि ऑफलाइन व्यापार 30% तक सिमट गया है। सरकार हमें व्यवस्थित करने और सुरक्षा देने की योजना बनाए।
पेट्रोल-डीजल भी जीएसटी में आए
अनाज होलसेल व्यापारी संघ के अभिषेक साहू ने साफ कहा कि हर साल उम्मीद रहती है, लेकिन राहत नहीं मिलती। उन्होंने मांग की कि मंडी टैक्स पूरी तरह खत्म हो। एक तरफ जीएसटी ले रहे हैं, दूसरी तरफ मंडी टैक्स भी यह दोहरी मार है। उन्होंने पेट्रोल और डीजल को भी जीएसटी के दायरे में लाने की मांग की। साथ ही दालों के आयात पर अधिक एक्सपोर्ट/इंपोर्ट ड्यूटी में कमी और किसानों को सीधी राहत देने की बात कही।
यह भी पढ़ें-मध्य प्रदेश में दिन का तापमान बढ़ा, रात में हल्की ठंड, 16 से एक बार फिर बदलेगा मौसम का मिजाज
नए टैक्स का डर, सफाई-पानी पर खर्च की मांग
करोंध गल्ला मंडी संगठन के सचिव चंद्र प्रकाश अग्रवाल ने कहा कि सरकार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए बड़ी राहत की उम्मीद कम है, लेकिन नए टैक्स न लगाए जाएं, यही बड़ी राहत होगी। उन्होंने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। टैक्स पूरा लिया जाता है, लेकिन सफाई, सड़क और पानी की व्यवस्था कमजोर है। सरकार को जल और स्वच्छता पर ज्यादा खर्च करना चाहिए।
यह भी पढ़ें-GMC में MBBS छात्रा मौत मामला गरमाया, आधी रात हॉस्टल पहुंची पुलिस,जूनियर डॉक्टर्स ने जताया विरोध
स्टार्टअप और मैन्युफैक्चरिंग को चाहिए बड़ा पैकेज
व्यापारी संगठन के सचिन संतानी ने बजट में स्टार्टअप और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए विशेष फंड की मांग की। उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों ने स्टार्टअप और हाईवे आधारित मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया है। मध्य प्रदेश में भी भोपाल और इंदौर को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए प्रोत्साहन पैकेज होना चाहिए।
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भोपाल से अलग-अलग व्यापारी संगठनों ने टैक्स, मंडी शुल्क, स्टांप ड्यूटी, ऑनलाइन कारोबार और इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर सरकार के सामने खुलकर मांगें रखी हैं।
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कमर्शियल टैक्स और स्टांप ड्यूटी पर बड़ा सवाल
व्यापारी संगठन के रमाकांत तिवारी ने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद भी भोपाल में अलग से लगने वाला कमर्शियल टैक्स व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ है। इस टैक्स पर रोक लगनी चाहिए। हम कोर्ट तक गए, लेकिन अब भी राहत नहीं मिली। अगर इसे खत्म किया जाए तो व्यापारियों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने स्टांप ड्यूटी को लेकर भी असमानता का मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि इंडस्ट्रियल सेक्टर को करोड़ों के लोन पर बेहद कम स्टांप ड्यूटी देनी पड़ती है, जबकि व्यापारी को लोन लेने से पहले भारी स्टांप ड्यूटी चुकानी पड़ती है। इसे खत्म या कम किया जाए, तभी व्यापार को गति मिलेगी।
मंडी टैक्स और लाइसेंस प्रक्रिया पर नाराजगी
किराना व्यापारी संगठन के महामंत्री विवेक साहू ने कहा कि बजट में अक्सर महिलाओं पर ज्यादा फोकस रहता है, लेकिन व्यापारियों के लिए ठोस प्रावधान कम होते हैं। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश गेहूं, धनिया, लहसुन और सरसों उत्पादन में अग्रणी है, लेकिन मंडी शुल्क और लाइसेंस प्रक्रिया सबसे महंगी यहीं है। साहू ने ऑनलाइन कारोबार से पारंपरिक व्यापार पर पड़ रहे असर का मुद्दा उठाते हुए कहा कि ऑफलाइन व्यापार 30% तक सिमट गया है। सरकार हमें व्यवस्थित करने और सुरक्षा देने की योजना बनाए।
पेट्रोल-डीजल भी जीएसटी में आए
अनाज होलसेल व्यापारी संघ के अभिषेक साहू ने साफ कहा कि हर साल उम्मीद रहती है, लेकिन राहत नहीं मिलती। उन्होंने मांग की कि मंडी टैक्स पूरी तरह खत्म हो। एक तरफ जीएसटी ले रहे हैं, दूसरी तरफ मंडी टैक्स भी यह दोहरी मार है। उन्होंने पेट्रोल और डीजल को भी जीएसटी के दायरे में लाने की मांग की। साथ ही दालों के आयात पर अधिक एक्सपोर्ट/इंपोर्ट ड्यूटी में कमी और किसानों को सीधी राहत देने की बात कही।
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नए टैक्स का डर, सफाई-पानी पर खर्च की मांग
करोंध गल्ला मंडी संगठन के सचिव चंद्र प्रकाश अग्रवाल ने कहा कि सरकार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए बड़ी राहत की उम्मीद कम है, लेकिन नए टैक्स न लगाए जाएं, यही बड़ी राहत होगी। उन्होंने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। टैक्स पूरा लिया जाता है, लेकिन सफाई, सड़क और पानी की व्यवस्था कमजोर है। सरकार को जल और स्वच्छता पर ज्यादा खर्च करना चाहिए।
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स्टार्टअप और मैन्युफैक्चरिंग को चाहिए बड़ा पैकेज
व्यापारी संगठन के सचिन संतानी ने बजट में स्टार्टअप और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए विशेष फंड की मांग की। उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों ने स्टार्टअप और हाईवे आधारित मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया है। मध्य प्रदेश में भी भोपाल और इंदौर को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए प्रोत्साहन पैकेज होना चाहिए।
