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Bhopal News: भोजपुर मंदिर में नवविवाहित जोड़े को वरमाला से रोका, वीडियो वायरल, ASI नियमों पर छिड़ी बहस

Sun, 01 Mar 2026 04:46 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Sun, 01 Mar 2026 04:46 PM IST
सार

भोपाल के पास स्थित भोजपुर मंदिर में नवविवाहित युवक को वरमाला की रस्म करने से रोके जाने का वीडियो वायरल हो गया। युवक का कहना है कि वह केवल दो-तीन मिनट के लिए रस्म और दर्शन करने पहुंचा था, लेकिन सुरक्षा कर्मियों ने अनुमति का हवाला देकर रोक दिया।

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Bhopal News: Newly married couple stopped from exchanging garlands at Bhojpur temple, video goes viral, sparks
नवविवाहित युवक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजधानी भोपाल से सटे ऐतिहासिक भोजपुर मंदिर में नवविवाहित युवक को वरमाला की रस्म करने से रोके जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासनिक नियमों और आस्था के बीच नई बहस छिड़ गई है। वीडियो में युवक खुद को भूपेंद्र शर्मा बताते हुए दावा कर रहा है कि वह विधिवत विवाह के बाद केवल दो मिनट के लिए मंदिर में वरमाला की रस्म और भगवान के दर्शन करने पहुंचा था, लेकिन सुरक्षा कर्मियों ने उसे अनुमति का हवाला देकर रोक दिया। युवक का आरोप है कि बिना किसी स्पष्ट कारण के उसे मंदिर परिसर में रस्म करने से मना कर दिया गया।
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ASI के नियमों का हवाला
मंदिर के पुजारी अनूप गिरी ने स्पष्ट किया कि मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधीन संरक्षित स्मारक है, इसलिए किसी भी प्रकार के आयोजन या रस्म के लिए संबंधित विभाग से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि मंदिर ट्रस्ट की ओर से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन संरक्षित स्मारक होने के कारण नियमों का पालन जरूरी है। पुरातत्व विभाग के अधिकारियों का भी कहना है कि संरक्षित स्मारकों में बिना अनुमति किसी भी प्रकार का आयोजन, शूटिंग या विशेष धार्मिक अनुष्ठान नहीं किया जा सकता। नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई का प्रावधान है।
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आस्था बनाम प्रशासनिक नियम
मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग दो खेमों में बंटे नजर आ रहे हैं। एक ओर जहां कुछ लोग इसे श्रद्धालुओं की भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई लोग ऐतिहासिक धरोहर की सुरक्षा के लिए नियमों के पालन को जरूरी ठहरा रहे हैं।
फिलहाल यह मामला प्रशासनिक नियमों और धार्मिक भावनाओं के बीच संतुलन का सवाल बन गया है।

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