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Bhopal News: MPT में 80 लाख की खरीदी घोटाला, सप्लायर कंपनी पर नहीं हुई एफआईआर, फाइल अटकाने में लगे जिम्मेदार

Fri, 21 Nov 2025 06:05 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: संदीप तिवारी Updated Fri, 21 Nov 2025 06:05 PM IST
सार

पर्यटन विकास निगम (एमपीटी)  में 80 लाख रुपये की खरीदी घोटाले का मामला उजागर होने के बाद जहां दो अधिकारियों पर कार्रवाई हो चुकी है, वहीं सप्लाई करने वाली कंपनी पर अब तक एफआईआर नहीं होने से सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि कुछ अधिकारी जानबूझकर कार्रवाई रोक रहे हैं, क्योंकि कंपनी पर जांच बढ़ी तो कई और नाम सामने आ सकते हैं।

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Bhopal News: MPT purchase scam worth 80 lakhs, no FIR lodged against supplier company, responsible busy in hol
एमपीटी भोपाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम (एमपीटी) में करीब 80.82 लाख रुपये की खरीदी में बड़ी गड़बड़ी सामने आने के बाद दो वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है, लेकिन सामान सप्लाई करने वाली कंपनी पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। निगम के एमडी डॉ. टी. ईलैया राजा द्वारा स्पष्ट निर्देशों के बावजूद एफआईआर की प्रक्रिया एक महीने से लंबित है। सूत्रों का कहना है कि कुछ अधिकारी जानबूझकर कार्रवाई रोक रहे हैं, क्योंकि कंपनी पर कार्रवाई होती है तो कई और अधिकारी जांच के दायरे में आ सकते हैं।
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कई साल से निगम में कर रही थी कंपनी सप्लाई
सूत्रों के अनुसार सप्लायर कंपनी पिछले कई वर्षों से एमपीटी के अलग-अलग विभागों में सामान सप्लाई कर रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि कंपनी मालिक ने तीन अलग-अलग कंपनियों के नाम से रजिस्ट्रेशन किया है,और कोटेशन के आधार पर काम पाने के लिए इन्हीं कंपनियों का उपयोग करता रहा। जबकि दिए गए पते पर न तो दुकान है, न गोडाउन, जिससे सप्लाई पर सवाल उठ रहे हैं। निगम के कुछ कर्मचारियों का कहना है कि यदि पुराने बिलों की जांच हो तो लाखों का बड़ा घोटाला सामने आ सकता है।
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एमडी की सतर्कता से खुला मामला
पूरा मामला तब सामने आया जब निगम के एमडी डॉ. ईलैया राजा टी.के पास 56 लाख रुपये का बिल पहुंचा। उन्हें गड़बड़ी का संदेह हुआ और उन्होंने तुरंत समिति बनाकर जांच करवाई। जांच में अनियमितताएं प्रमाणित हुईं, जिसके बाद उन्होंने अधिकारियों को निलंबित किया,और सप्लायर कंपनी पर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया। लेकिन इसके बावजूद एक महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी एफआईआर नहीं हो पाई है।
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क्यों अटकी है कार्रवाई?
सूत्रों के अनुसार निगम के कुछ अधिकारी एफआईआर नहीं होने देना चाहते। क्योंकि जैसे ही कंपनी पर कार्रवाई होगी, उसके पुराने सप्लाई रिकॉर्ड खंगाले जाएंगे और कई और अधिकारी जांच के घेरे में आ जाएंगे।



जल्द कार्रवाई का दावा
निगम के प्रशासनिक अधिकारी राकेश अर्गल का कहना है कि रिपोर्ट तैयार है, कंपनी पर कार्रवाई जल्द की जाएगी। यह मामला साफ संकेत देता है कि निगम में वर्षों से चल रही अनियमितताओं के तार गहरे जुड़े हुए हैं, और अब सवाल यह है कि क्या एफआईआर दर्ज करके पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश होगा या फाइल इसी तरह लंबित रखी जाएगी।

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दो अधिकारियों पर तत्काल गिरी गाज
जांच रिपोर्ट में पाया गया कि विंड एंड वेव्ज रेस्तरां और बोट क्लब में कार्यरत क्षेत्रीय प्रबंधक अनिल कुरूप और प्रभारी प्रबंधक अरविंद शर्मा ने बिना मुख्यालय की अनुमति 5 लाख की सीमा के बजाय लगभग 80.82 लाख रुपये की सामग्री खरीद ली थी। खरीदी के बिलों को कोटेशन के नाम पर छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर मंजूर किया गया। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि खरीदी गई 72 वस्तुओं में से 40 वस्तुएं भौतिक सत्यापन में नहीं मिलीं, जिससे निगम को 22.37 लाख रुपये का प्रत्यक्ष नुकसान हुआ। सामग्री पर न कंपनी का लोगो, न बारकोड, न ही एमआरपी होने से गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हुए।
 
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