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MP News: छिंदवाड़ा में बच्चों की मौत पर नेता प्रतिपक्ष का हमला, न्यायिक जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग

Sat, 04 Oct 2025 08:16 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: संदीप तिवारी Updated Sat, 04 Oct 2025 08:16 PM IST
सार

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के परासिया विकासखंड में  बच्चों की मौत मामले में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर हमला बोलते हुए न्यायिक जांच की मांग की है । इसे भ्रष्ट और लापरवाह स्वास्थ्य तंत्र की नाकामी करार दिया है। 

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MP News: Opposition leader attacks Chhindwara over death of 10 children, demands judicial inquiry and action a
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छिंदवाड़ा जिले के परासिया ब्लॉक में कथित तौर पर फर्जी कफ सिरप से बच्चों की मौत के मामले ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक घटना को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर हमला बोलते हुए न्यायिक जांच की मांग की है और इसे भ्रष्ट और लापरवाह स्वास्थ्य तंत्र की नाकामी करार दिया है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि आज मध्य प्रदेश के हॉस्पिटल में बच्चे सुरक्षित नहीं हैं। कहीं चूहे काट रहे हैं, कहीं सुविधाओं का अभाव है, कहीं डॉक्टर नहीं हैं और कहीं दवाएं नहीं हैं। जो दवाएं उपलब्ध हैं, उनमें भी नकली या अमानक दवाएं मिल रही हैं।
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कई जिलों में 11 करोड़ से अधिक की 263 दवाएं एक्सपायर
सिंघार ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार सरदार वल्लभभाई पटेल नि:शुल्क औषधि वितरण योजना के तहत दवा वितरण करती है।इस स्कीम के तहत दवा बांटने के लिए सरकार जो दवाएं खरीदती है उसके सैंपल की जांच मध्य प्रदेश ड्रग कॉर्पोरेशन सैंपल जांचता है। उससे पूर्व इन दवाओं की जांच तय प्रोटोकाल  के तहत होती है। नवंबर 2024 में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट के अनुसार, छिंदवाड़ा और ग्वालियर सहित कई जिलों में 11 करोड़ से अधिक की 263 दवाएं एक्सपायर हो गईं।
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यह भी पढ़ें-जांच रिपोर्ट में खुलासा, 'कोल्ड्रिफ सिरप' से हुई मासूमों की मौत, मध्य प्रदेश में बिक्री पर बैन
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प्रोटोकॉल के अनुसार दवा सैंपल की जांच 72 घंटे में होनी चाहिए
सिंघार ने कहा कि प्रोटोकॉल के अनुसार दवा सैंपल की जांच 72 घंटे में होनी चाहिए, लेकिन 29 सितंबर को भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट आने में 6 दिन लग गए। इस देरी ने और मौतों को न्योता दिया। इस बीच, उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने भ्रम फैलाया। उन्होंने कहा कि कफ सिरप से मौतें नहीं हुईं, यह अफवाह है। तीन सिरपों के प्रारंभिक टेस्ट क्लीन आने पर उन्होंने कंपनी को क्लीन चिट दे दी, जबकि 12 सिरपों के सैंपल लंबित थे। बाद में उन्होंने सफाई दी कि यह बयान सिर्फ तीन सिरपों के बारे में था, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

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विधानसभा सत्र में 139 अमानक दवाओं की प्रस्तुत की गई रिपोर्ट
सिंघार ने कहा किअगस्त 2025 के विधानसभा सत्र में 139 अमानक दवाओं की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, लेकिन उस पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जबलपुर हाईकोर्ट में अमानक दवाओं पर जनहित याचिका दायर हुई, अदालत ने नोटिस जारी किया, लेकिन सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन ने भी इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि पिछले साल इंदौर के बड़े सरकारी अस्पताल में नकली लाइफ-सेविंग ड्रग्स मिली थीं। कार्यवाही के नाम पर केवल स्टॉक को सीज़ किया गया, दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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