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Bhopal News: MPT में संविदा भर्ती घोटाला, चार पर कसा शिकंजा, फर्जी EWS से नौकरी पाने वाले पर विभाग मेहरबान

Mon, 29 Dec 2025 07:51 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: संदीप तिवारी Updated Mon, 29 Dec 2025 07:51 PM IST
सार

मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम में संविदा भर्ती में गड़बड़ियों की जांच फिर शुरू हुई है। चार कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है, लेकिन फर्जी EWS दस्तावेजों के जरिए नौकरी पाने वाले संविदा कर्मी पर अब तक कार्रवाई नहीं हुई। दस्तावेजों की जांच करने वाले अधिकारियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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Bhopal News: Contract recruitment scam at MPT, four people under scrutiny, department lenient towards those wh
एपीटी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम (MPT) में हुई संविदा भर्ती में गड़बड़ियों का मामला एक बार फिर गरमा गया है। लंबे समय से ठंडे बस्ते में पड़ी जांच को निगम ने दोबारा शुरू करते हुए चार कर्मचारियों को मौखिक रूप से अंतिम स्पष्टीकरण के लिए तलब किया है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए नौकरी हासिल करने वाले एक संविदा कर्मी पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। दरअसल फर्जी शपथ पत्र से EWS कोटे में नौकरी पाने वाले सुख सागर अवस्थी हैं, जिन्होंने EWS श्रेणी का लाभ लेने के लिए झूठा शपथ पत्र प्रस्तुत कर नौकरी हासिल की है जिसकी शिकायत भी हुई लेकिन विभाग उन पर मेरहबान है।
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इस तरह की गड़बड़ी
शिकायत के अनुसार शपथ पत्र में सुख सागर अवस्थी ने अपनी वार्षिक आय मात्र 50 हजार रुपए दर्शाई, जबकि उसी समय वे ओरछा स्थित बेतवा रिट्रीट में बेक्वंट प्रबंधक के पद पर कार्यरत थे और उन्हें करीब 20 हजार रुपए प्रतिमाह वेतन मिल रहा था। इस आय का उल्लेख दस्तावेजों में नहीं किया गया। इतना ही नहीं, सुख सागर अवस्थी के पिता बद्री प्रसाद अवस्थी भी पर्यटन निगम की ग्वालियर स्थित तानसेन रेसिडेंसी में हेड वेटर के पद पर कार्यरत रहे हैं। उनकी मासिक आय 55 से 60 हजार रुपए के बीच रही, लेकिन इस तथ्य को भी शपथ पत्र में पूरी तरह छिपाया गया।
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दस्तावेज जांचने वाले अफसरों पर सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में इतनी गंभीर खामियां थीं, तो भर्ती के समय उनकी जांच और सत्यापन करने वाले अधिकारियों की भूमिका पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या दस्तावेज बिना जांच के ही स्वीकृत कर लिए गए थे? सूत्रों का कहना है कि संविदा भर्ती में निगम के कुछ अधिकारियों ने अपने जान-पहचान और रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाया। इसी कारण दस्तावेजों की जांच में जानबूझकर लापरवाही बरती गई।
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एकतरफा कार्रवाई से उठ रहे सवाल
निगम अब संविदा कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांग रहा है, लेकिन डेढ़ साल तक नौकरी करवाने के बाद यदि कर्मचारियों को हटाया जाता है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या दोष केवल अभ्यर्थियों का है या भर्ती प्रक्रिया संभालने वाले अधिकारी भी उतने ही जिम्मेदार हैं? अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पर्यटन विकास निगम के आला अधिकारी इस मामले में सिर्फ दिखावटी कार्रवाई करते हैं या फिर फर्जी दस्तावेज स्वीकार करने वाले अधिकारियों पर भी शिकंजा कसते हैं। 

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भर्ती का विज्ञापन जारी होने के बाद बनावाया प्रमाण-पत्र
संविदा भर्ती का विज्ञापन 2 फरवरी 2023 को जारी किया गया था। इसके ठीक बाद अभ्यर्थी सुख सागर ने 10 फरवरी 2023 को स्थायी निवासी प्रमाण-पत्र और 14 फरवरी 2023 को ईडब्ल्यूएस (EWS) प्रमाण-पत्र बनवा लिया। लेकिन आरटीआई के जरिए मिली जानकारी ने पूरे मामले को संदिग्ध बना दिया है। आरटीआई में सामने आया है कि ईडब्ल्यूएस प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए जिन दस्तावेजों का उपयोग दिखाया गया है, उनकी तिथि मई 2023 की है। इससे साफ होता है कि ईडब्ल्यूएस प्रमाण-पत्र फर्जी या अपूर्ण दस्तावेजों के आधार पर बनवाया गया।


 
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