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Bhopal News: मनरेगा में बदलाव पर कांग्रेस की आपत्ति, CWC सदस्य भोपाल में बोले रोजगार के अधिकार पर पड़ेगा असर
Mon, 22 Dec 2025 06:05 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Mon, 22 Dec 2025 06:05 PM IST
सार
भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस नेता बी.के. हरिप्रसाद ने मनरेगा से जुड़े बदलावों पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे ग्रामीण रोजगार, राज्यों की भूमिका और योजना की मूल भावना प्रभावित हो सकती है। उन्होंने तकनीकी प्रक्रियाओं और नेशनल हेराल्ड मामले पर भी पार्टी का पक्ष रखा।
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पीसीसी में प्रेसवार्ता
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कांग्रेस वर्किंग कमेटी (cwc) के सदस्य और पूर्व सांसद बीके हरिप्रसाद ने सोमवार को भोपाल स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मनरेगा से जुड़े हालिया बदलावों को लेकर अपनी बात रखी। इस दौरान उन्होंने सरकार को जम कर घेरा। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित सुधारों से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की उपलब्धता, योजना की मूल भावना और राज्यों की भूमिका पर असर पड़ सकता है। सरकार का यह निर्णय बिल्कुल भी ठीक नहीं है। प्रेस वार्ता के दौरान राज्यसभा सांसद अशोक सिंह, मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक और प्रदेश प्रवक्ता विक्रम चौधरी, अभिनव बरोलिया, प्रवीण धौलपूरे, राहुल राज और फिरोज सिद्दीकी भी मौजूद रहे।
मनरेगा की मूल भावना पर चिंता
हरिप्रसाद ने कहा कि मनरेगा को शुरुआत में अधिकार आधारित रोजगार गारंटी के रूप में लागू किया गया था, जिसने ग्रामीण परिवारों को आर्थिक सुरक्षा दी। उनके अनुसार, हालिया बदलावों से यह योजना धीरे-धीरे केंद्र-नियंत्रित और शर्तों से जुड़ी व्यवस्था में बदलती दिखाई दे रही है, जिससे स्थानीय जरूरतों और पंचायतों की भूमिका सीमित हो सकती है।
राज्यों और मजदूरों पर प्रभाव का मुद्दा
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि नई व्यवस्था में राज्यों पर आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका है, जबकि योजना के संचालन से जुड़े प्रमुख निर्णय केंद्र स्तर पर ही लिए जा रहे हैं। उन्होंने यह चिंता जताई कि इससे सहकारी संघवाद की भावना कमजोर हो सकती है और मजदूरों को समय पर काम मिलने में दिक्कत आ सकती है।
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तकनीकी बदलावों पर सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस में डिजिटल सिस्टम, आधार आधारित भुगतान और अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं का भी उल्लेख किया गया। हरिप्रसाद ने कहा कि तकनीक पारदर्शिता बढ़ाने का माध्यम हो सकती है, लेकिन यदि इसके कारण पात्र मजदूर योजना से बाहर हो रहे हैं, तो इस पर पुनर्विचार जरूरी है।
शिवराज को दिल्ली का क्लाइमेट शूट नहीं कर रहा
कर्नाटक में सीएम को लेकर सिद्धरमैया और डीके शिवकुमार के बीच खींचतान को लेकर हरिप्रसाद ने कहा कि आप कर्नाटक का छोड़ दीजिए, मप्र की भी बात कर लीजिए। शिवराज सिंह की भी बात कर लीजिए, बेचारे को दिल्ली का क्लाइमेट सूट नहीं कर रहा।
दिल्ली में बहुत पॉल्युशन है। पॉलिटिकल पॉल्यूशन भी है, नेचुरल पॉल्यूशन भी है। इधर मप्र में तो वे राजा थे, बेचारे को उधर भेज दिया अच्छे आदमी थे।
यह भी पढ़ें-68 करोड़ ई-मेल-पासवर्ड लीक! एमपी स्टेट साइबर सेल की चेतावनी, तुरंत रीसेट करें पासवर्ड; एडवाइजरी जारी
नेशनल हेराल्ड मामले पर टिप्पणी
प्रेस वार्ता के दौरान नेशनल हेराल्ड मामले का भी जिक्र हुआ। हरिप्रसाद ने कहा कि न्यायालय के हालिया फैसले के बाद इस प्रकरण पर स्थिति स्पष्ट हुई है। उन्होंने इसे न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बताते हुए कहा कि कांग्रेस लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक मूल्यों में विश्वास रखती है।
यह भी पढ़ें-राजधानी एक्सप्रेस में यात्री का पर्स चोरी, सेल्समैन ने ऑटो शोरूम से 80 हजार की नकदी पार की
संवाद जारी रखने की बात
कांग्रेस नेता ने कहा कि पार्टी इन मुद्दों पर संवाद और लोकतांत्रिक तरीकों से अपनी बात रखती रहेगी। उनका कहना था कि ग्रामीण रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और संघीय ढांचे से जुड़े सवाल केवल राजनीति के नहीं, बल्कि नीति और जनहित से जुड़े विषय हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए कांग्रेस ने संकेत दिया कि वह मनरेगा और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े मुद्दों पर अपनी चिंताएं आगे भी सार्वजनिक मंचों पर रखती रहेगी।
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मनरेगा की मूल भावना पर चिंता
हरिप्रसाद ने कहा कि मनरेगा को शुरुआत में अधिकार आधारित रोजगार गारंटी के रूप में लागू किया गया था, जिसने ग्रामीण परिवारों को आर्थिक सुरक्षा दी। उनके अनुसार, हालिया बदलावों से यह योजना धीरे-धीरे केंद्र-नियंत्रित और शर्तों से जुड़ी व्यवस्था में बदलती दिखाई दे रही है, जिससे स्थानीय जरूरतों और पंचायतों की भूमिका सीमित हो सकती है।
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राज्यों और मजदूरों पर प्रभाव का मुद्दा
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि नई व्यवस्था में राज्यों पर आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका है, जबकि योजना के संचालन से जुड़े प्रमुख निर्णय केंद्र स्तर पर ही लिए जा रहे हैं। उन्होंने यह चिंता जताई कि इससे सहकारी संघवाद की भावना कमजोर हो सकती है और मजदूरों को समय पर काम मिलने में दिक्कत आ सकती है।
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तकनीकी बदलावों पर सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस में डिजिटल सिस्टम, आधार आधारित भुगतान और अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं का भी उल्लेख किया गया। हरिप्रसाद ने कहा कि तकनीक पारदर्शिता बढ़ाने का माध्यम हो सकती है, लेकिन यदि इसके कारण पात्र मजदूर योजना से बाहर हो रहे हैं, तो इस पर पुनर्विचार जरूरी है।
शिवराज को दिल्ली का क्लाइमेट शूट नहीं कर रहा
कर्नाटक में सीएम को लेकर सिद्धरमैया और डीके शिवकुमार के बीच खींचतान को लेकर हरिप्रसाद ने कहा कि आप कर्नाटक का छोड़ दीजिए, मप्र की भी बात कर लीजिए। शिवराज सिंह की भी बात कर लीजिए, बेचारे को दिल्ली का क्लाइमेट सूट नहीं कर रहा।
दिल्ली में बहुत पॉल्युशन है। पॉलिटिकल पॉल्यूशन भी है, नेचुरल पॉल्यूशन भी है। इधर मप्र में तो वे राजा थे, बेचारे को उधर भेज दिया अच्छे आदमी थे।
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नेशनल हेराल्ड मामले पर टिप्पणी
प्रेस वार्ता के दौरान नेशनल हेराल्ड मामले का भी जिक्र हुआ। हरिप्रसाद ने कहा कि न्यायालय के हालिया फैसले के बाद इस प्रकरण पर स्थिति स्पष्ट हुई है। उन्होंने इसे न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बताते हुए कहा कि कांग्रेस लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक मूल्यों में विश्वास रखती है।
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संवाद जारी रखने की बात
कांग्रेस नेता ने कहा कि पार्टी इन मुद्दों पर संवाद और लोकतांत्रिक तरीकों से अपनी बात रखती रहेगी। उनका कहना था कि ग्रामीण रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और संघीय ढांचे से जुड़े सवाल केवल राजनीति के नहीं, बल्कि नीति और जनहित से जुड़े विषय हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए कांग्रेस ने संकेत दिया कि वह मनरेगा और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े मुद्दों पर अपनी चिंताएं आगे भी सार्वजनिक मंचों पर रखती रहेगी।
