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Bhopal News: एम्स और IIT इंदौर मिलकर बनाएंगे दुनिया की पहली लो-डोज AI तकनीक, रेडिएशन से मरीजों को मिलेगी राहत
Thu, 15 Jan 2026 06:35 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Thu, 15 Jan 2026 06:35 PM IST
सार
एम्स भोपाल और IIT इंदौर मिलकर लो-डोज AI मेडिकल इमेजिंग तकनीक विकसित करेंगे, जिससे रेडिएशन कम और जांच सटीक होगी। इससे मरीजों, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को फायदा मिलेगा और सरकारी अस्पतालों में किफायती जांच संभव होगी।
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एम्स भोपाल और IIT इंदौर अनुबंध
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
एम्स भोपाल और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) इंदौर ने स्वास्थ्य और तकनीक के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि की दिशा में कदम बढ़ाया है। दोनों संस्थान मिलकर दुनिया की पहली लो-डोज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित मेडिकल इमेजिंग तकनीक विकसित करेंगे, जिससे जांच के दौरान मरीजों को मिलने वाला रेडिएशन काफी हद तक कम किया जा सकेगा। इस अत्याधुनिक तकनीक का उद्देश्य सीटी स्कैन और अन्य रेडियोलॉजिकल जांचों में इस्तेमाल होने वाली रेडिएशन डोज को न्यूनतम करते हुए उच्च गुणवत्ता वाली और सटीक इमेज उपलब्ध कराना है। इससे खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बार-बार जांच कराने वाले मरीजों को बड़ा लाभ मिलेगा।
AI से बढ़ेगी जांच की सटीकता
एम्स भोपाल के विशेषज्ञों के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित यह सिस्टम कम रेडिएशन में ली गई इमेज को प्रोसेस कर उसकी गुणवत्ता को बेहतर बनाएगा। इससे कैंसर, हृदय रोग, फेफड़ों और न्यूरोलॉजिकल बीमारियों की पहचान पहले से अधिक सटीक और सुरक्षित तरीके से हो सकेगी।
यह भी पढ़ें-भोपाल में जिस स्लॉटर हाउस में मिला था 26 टन गोमांस, उसे अब किया गया सील; लेकिन असलम का यहां कब्जा जारी
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स्वास्थ्य और तकनीक का अनूठा संगम
IIT इंदौर के वैज्ञानिक इस परियोजना में अत्याधुनिक मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग एल्गोरिद्म विकसित करेंगे, जबकि एम्स भोपाल क्लिनिकल ट्रायल और मेडिकल वैलिडेशन का कार्य संभालेगा। यह सहयोग भारत को मेडिकल AI के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिला सकता है।
यह भी पढ़ें-भोपाल में कर्मचारी संगठनों का प्रदर्शन, 11 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार पर बनाया दबाव
मरीजों के लिए बड़ी सौगात
विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक न सिर्फ मरीजों की सुरक्षा बढ़ाएगी, बल्कि सरकारी अस्पतालों में कम लागत में बेहतर जांच सुविधा उपलब्ध कराने में भी मददगार साबित होगी। एम्स भोपाल और IIT इंदौर की यह साझेदारी देश के स्वास्थ्य तंत्र को तकनीकी रूप से मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल मानी जा रही है।
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AI से बढ़ेगी जांच की सटीकता
एम्स भोपाल के विशेषज्ञों के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित यह सिस्टम कम रेडिएशन में ली गई इमेज को प्रोसेस कर उसकी गुणवत्ता को बेहतर बनाएगा। इससे कैंसर, हृदय रोग, फेफड़ों और न्यूरोलॉजिकल बीमारियों की पहचान पहले से अधिक सटीक और सुरक्षित तरीके से हो सकेगी।
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स्वास्थ्य और तकनीक का अनूठा संगम
IIT इंदौर के वैज्ञानिक इस परियोजना में अत्याधुनिक मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग एल्गोरिद्म विकसित करेंगे, जबकि एम्स भोपाल क्लिनिकल ट्रायल और मेडिकल वैलिडेशन का कार्य संभालेगा। यह सहयोग भारत को मेडिकल AI के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिला सकता है।
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मरीजों के लिए बड़ी सौगात
विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक न सिर्फ मरीजों की सुरक्षा बढ़ाएगी, बल्कि सरकारी अस्पतालों में कम लागत में बेहतर जांच सुविधा उपलब्ध कराने में भी मददगार साबित होगी। एम्स भोपाल और IIT इंदौर की यह साझेदारी देश के स्वास्थ्य तंत्र को तकनीकी रूप से मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल मानी जा रही है।
