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भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन का गठन: 6 जिलों के 2,510 गांव शामिल, विकास को मिलेगा नया आयाम, नोटिफिकेशन जारी
Sat, 18 Apr 2026 06:52 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Sat, 18 Apr 2026 06:52 PM IST
सार
मध्यप्रदेश सरकार ने भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन (BMR) बनाने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है, जिसमें 6 जिलों के 2,510 गांव शामिल होंगे। इस योजना से भोपाल के आसपास का क्षेत्र तेजी से विकसित होगा और लोगों को बेहतर सड़क, परिवहन और सुविधाएं मिलेंगी।
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भोपाल मेट्रोपॉलिटिन रीजन की अधिसूचना जारी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश में राजधानी क्षेत्र भोपाल के सुनियोजित विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने ‘भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन’ (BMR) के गठन की अधिसूचना जारी कर दी है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत 6 जिलों के कुल 2,510 गांवों को एकीकृत कर व्यापक क्षेत्रीय विकास का खाका तैयार किया गया है।
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इन जिलों के गांव होंगे शामिल
इस नए मेट्रोपॉलिटन रीजन में भोपाल के साथ-साथ सीहोर, रायसेन, विदिशा, राजगढ़ और नर्मदापुरम जिलों के सीमावर्ती गांवों को जोड़ा गया है। इनमें प्रमुख रूप से भोपाल की हुजूर, कोलार और बैरसिया तहसील के गांव, सीहोर के मंडीदीप क्षेत्र, रायसेन के औबेदुल्लागंज और सांची ब्लॉक के हिस्से, विदिशा तहसील के गांव तथा राजगढ़ और नर्मदापुरम के वे क्षेत्र शामिल हैं, जो प्रस्तावित रिंग रोड और नेशनल हाईवे से जुड़े हैं।
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विकास के लिए बड़ा भौगोलिक विस्तार
‘मध्य प्रदेश महानगर क्षेत्र नियोजन एवं विकास अधिनियम-2025’ के तहत गठित इस रीजन का उद्देश्य तेजी से बढ़ती आबादी और शहरीकरण के दबाव को संतुलित करना है। लगभग 12 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले इस प्रोजेक्ट के माध्यम से एकीकृत मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा, जिससे सभी क्षेत्रों में समान रूप से विकास सुनिश्चित हो सके।
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इन्फ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी पर फोकस
योजना के तहत परिवहन नेटवर्क को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसमें मेट्रो रेल, बीआरटीएस और आउटर रिंग रोड का विस्तार शामिल है, जिससे सभी जुड़े जिलों के बीच सुगम आवागमन संभव होगा। इसके साथ ही पानी, बिजली और सीवेज जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार भी समन्वित रूप से किया जाएगा।
ये भी पढ़ें- भोपाल मेट्रो का भूमिगत काम ने पकड़ी रफ्तार: 75 फीट नीचे बन रही सुरंग,प्रदेश में पहली बार 2 TBM मशीनों का उपयोग
सैटेलाइट टाउनशिप से घटेगा दबाव
राजधानी भोपाल पर बढ़ते जनसंख्या दबाव को कम करने के लिए आसपास के क्षेत्रों में नए सैटेलाइट टाउन विकसित किए जाएंगे। इससे न केवल शहर का संतुलित विस्तार होगा, बल्कि रोजगार और आवास के नए अवसर भी पैदा होंगे।
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प्रबंधन के लिए बनेगा विशेष बोर्ड
इतने बड़े क्षेत्र के कुशल प्रबंधन के लिए ‘मेट्रोपॉलिटन रीजन प्लानिंग बोर्ड’ का गठन किया जाएगा। यह बोर्ड विभिन्न जिलों के बीच समन्वय स्थापित कर विकास योजनाओं को लागू करेगा। हालांकि, इतने बड़े ग्रामीण क्षेत्र को शहरी ढांचे में शामिल करने से भूमि अधिग्रहण और राजस्व से जुड़ी चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं।
लंबी अवधि में आर्थिक हब बनने की तैयारी
विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना भोपाल को दिल्ली-एनसीआर की तर्ज पर एक सशक्त आर्थिक क्षेत्र के रूप में विकसित कर सकती है। इससे उद्योग, निवेश और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।
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इन जिलों के गांव होंगे शामिल
इस नए मेट्रोपॉलिटन रीजन में भोपाल के साथ-साथ सीहोर, रायसेन, विदिशा, राजगढ़ और नर्मदापुरम जिलों के सीमावर्ती गांवों को जोड़ा गया है। इनमें प्रमुख रूप से भोपाल की हुजूर, कोलार और बैरसिया तहसील के गांव, सीहोर के मंडीदीप क्षेत्र, रायसेन के औबेदुल्लागंज और सांची ब्लॉक के हिस्से, विदिशा तहसील के गांव तथा राजगढ़ और नर्मदापुरम के वे क्षेत्र शामिल हैं, जो प्रस्तावित रिंग रोड और नेशनल हाईवे से जुड़े हैं।
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विकास के लिए बड़ा भौगोलिक विस्तार
‘मध्य प्रदेश महानगर क्षेत्र नियोजन एवं विकास अधिनियम-2025’ के तहत गठित इस रीजन का उद्देश्य तेजी से बढ़ती आबादी और शहरीकरण के दबाव को संतुलित करना है। लगभग 12 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले इस प्रोजेक्ट के माध्यम से एकीकृत मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा, जिससे सभी क्षेत्रों में समान रूप से विकास सुनिश्चित हो सके।
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इन्फ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी पर फोकस
योजना के तहत परिवहन नेटवर्क को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसमें मेट्रो रेल, बीआरटीएस और आउटर रिंग रोड का विस्तार शामिल है, जिससे सभी जुड़े जिलों के बीच सुगम आवागमन संभव होगा। इसके साथ ही पानी, बिजली और सीवेज जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार भी समन्वित रूप से किया जाएगा।
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सैटेलाइट टाउनशिप से घटेगा दबाव
राजधानी भोपाल पर बढ़ते जनसंख्या दबाव को कम करने के लिए आसपास के क्षेत्रों में नए सैटेलाइट टाउन विकसित किए जाएंगे। इससे न केवल शहर का संतुलित विस्तार होगा, बल्कि रोजगार और आवास के नए अवसर भी पैदा होंगे।
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प्रबंधन के लिए बनेगा विशेष बोर्ड
इतने बड़े क्षेत्र के कुशल प्रबंधन के लिए ‘मेट्रोपॉलिटन रीजन प्लानिंग बोर्ड’ का गठन किया जाएगा। यह बोर्ड विभिन्न जिलों के बीच समन्वय स्थापित कर विकास योजनाओं को लागू करेगा। हालांकि, इतने बड़े ग्रामीण क्षेत्र को शहरी ढांचे में शामिल करने से भूमि अधिग्रहण और राजस्व से जुड़ी चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं।
लंबी अवधि में आर्थिक हब बनने की तैयारी
विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना भोपाल को दिल्ली-एनसीआर की तर्ज पर एक सशक्त आर्थिक क्षेत्र के रूप में विकसित कर सकती है। इससे उद्योग, निवेश और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।
