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TET का विरोध: भोपाल में शिक्षकों का शक्ति प्रदर्शन, हजारों शिक्षक सड़क पर, सरकार ने दाखिल की रिव्यू पिटीशन
Sat, 18 Apr 2026 02:41 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Sat, 18 Apr 2026 02:41 PM IST
सार
TET को अनिवार्य बनाने के विरोध में मध्य प्रदेश के हजारों शिक्षक भोपाल में एकजुट हुए और सरकार के फैसले पर सवाल उठाए। दूसरी ओर, सरकार ने मामले को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल की है, जिससे मुद्दा अब सड़क से कोर्ट तक पहुंच गया है।
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भोपाल शिक्षकों का विरोध प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। राजधानी भोपाल में शनिवार को प्रदेशभर से आए शिक्षकों ने बड़ा प्रदर्शन किया। भेल स्थित दशहरा मैदान में जुटे हजारों शिक्षक ‘मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा’ के तहत अपनी मांगों को लेकर एकजुट नजर आए। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के बैनर तले हुए इस प्रदर्शन में आयोजकों के मुताबिक 50 हजार से अधिक शिक्षक शामिल हुए। इससे पहले भी जिला और ब्लॉक स्तर पर आंदोलन हो चुके हैं, लेकिन अब मामला राज्य स्तर पर पहुंच गया है।
TET अनिवार्यता पर बड़ा विरोध
शिक्षकों का कहना है कि नियुक्ति के समय उन्होंने सभी जरूरी योग्यता पूरी की थी, ऐसे में वर्षों की सेवा के बाद TET जैसी परीक्षा को अनिवार्य करना अनुचित है। 20-25 साल से पढ़ा रहे शिक्षकों पर नई शर्त थोपना उनके अनुसार न्याय के खिलाफ है। मोर्चा के अनुसार, हालिया सुप्रीम कोर्ट के फैसले से 90-95% तक शिक्षक प्रभावित हो सकते हैं। खासतौर पर वे शिक्षक, जो अध्यापक संवर्ग से शिक्षक संवर्ग में आए हैं, खुद को असमंजस में पा रहे हैं।
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आर्थिक नुकसान और भविष्य का डर
शिक्षकों ने आरोप लगाया कि पहले से ही सेवा अवधि की गणना सही तरीके से नहीं हो रही, जिससे वेतन, पेंशन और ग्रेच्युटी पर असर पड़ रहा है। अब TET की अनिवार्यता ने उनकी नौकरी और भविष्य को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है।
यह भी पढ़ें-महिला आरक्षण पर सियासत गरम, कमलनाथ का भाजपा पर हमला, बोले- संविधान से छेड़छाड़ की कोशिश रोकी
सरकार का कानूनी दांव
इधर, मध्य प्रदेश सरकार ने मामले में सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल कर दी है। 17 अप्रैल को शाम 4 बजे ई-फाइलिंग के जरिए यह याचिका प्रस्तुत की गई। इससे संकेत मिल रहे हैं कि सरकार इस मुद्दे को कानूनी स्तर पर सुलझाने की कोशिश में है।
आंदोलन और कानूनी लड़ाई साथ-साथ
एक तरफ शिक्षक सड़कों पर उतरकर दबाव बना रहे हैं, तो दूसरी ओर सरकार अदालत के जरिए समाधान तलाश रही है। हालांकि, शिक्षक संगठनों का कहना है कि रिव्यू पिटीशन अपनी जगह है, लेकिन जब तक TET का दबाव खत्म नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।
यह भी पढ़ें-एमपी में भीषण गर्मी का दौर शुरू, 9 शहरों में 42 से ज्यादा पारा, 16 जिलों में लू का अलर्ट
क्या है TET परीक्षा?
टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) 2010 से लागू एक राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा है, जिसे राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) ने अनिवार्य किया था। इसका उद्देश्य कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों की योग्यता तय करना है।
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TET अनिवार्यता पर बड़ा विरोध
शिक्षकों का कहना है कि नियुक्ति के समय उन्होंने सभी जरूरी योग्यता पूरी की थी, ऐसे में वर्षों की सेवा के बाद TET जैसी परीक्षा को अनिवार्य करना अनुचित है। 20-25 साल से पढ़ा रहे शिक्षकों पर नई शर्त थोपना उनके अनुसार न्याय के खिलाफ है। मोर्चा के अनुसार, हालिया सुप्रीम कोर्ट के फैसले से 90-95% तक शिक्षक प्रभावित हो सकते हैं। खासतौर पर वे शिक्षक, जो अध्यापक संवर्ग से शिक्षक संवर्ग में आए हैं, खुद को असमंजस में पा रहे हैं।
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आर्थिक नुकसान और भविष्य का डर
शिक्षकों ने आरोप लगाया कि पहले से ही सेवा अवधि की गणना सही तरीके से नहीं हो रही, जिससे वेतन, पेंशन और ग्रेच्युटी पर असर पड़ रहा है। अब TET की अनिवार्यता ने उनकी नौकरी और भविष्य को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है।
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सरकार का कानूनी दांव
इधर, मध्य प्रदेश सरकार ने मामले में सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल कर दी है। 17 अप्रैल को शाम 4 बजे ई-फाइलिंग के जरिए यह याचिका प्रस्तुत की गई। इससे संकेत मिल रहे हैं कि सरकार इस मुद्दे को कानूनी स्तर पर सुलझाने की कोशिश में है।
आंदोलन और कानूनी लड़ाई साथ-साथ
एक तरफ शिक्षक सड़कों पर उतरकर दबाव बना रहे हैं, तो दूसरी ओर सरकार अदालत के जरिए समाधान तलाश रही है। हालांकि, शिक्षक संगठनों का कहना है कि रिव्यू पिटीशन अपनी जगह है, लेकिन जब तक TET का दबाव खत्म नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।
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क्या है TET परीक्षा?
टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) 2010 से लागू एक राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा है, जिसे राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) ने अनिवार्य किया था। इसका उद्देश्य कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों की योग्यता तय करना है।
