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Bhopal: रेडक्रास भवन सेवा भारती को दिए जाने के विरोध में उतरे जीतू पटवारी,बोले-सरकारी संपत्ति किसी को देना गलत
Tue, 11 Feb 2025 07:31 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Tue, 11 Feb 2025 07:31 PM IST
सार
भारतीय रेडक्रास सोसाइटी, मध्य प्रदेश राज्य शाखा द्वारा भोपाल के इतवारा रोड स्थित रेडक्रास भवन को सेवा भारती को सौंपे जाने के निर्णय के विरोध में जीतू पटवारी उतर आए हैं। उन्होने कहा है कि सरकारी संपत्ति किसी संगठन को सौंपा जाना नियम विरूद्व है।
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पीसीसी चीफ जीतू पटवारी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भारतीय रेडक्रास सोसाइटी, मध्य प्रदेश राज्य शाखा द्वारा भोपाल के इतवारा रोड स्थित रेडक्रास भवन को सेवा भारती को सौंपे जाने के निर्णय के विरोध में पीसीसी चीफ जीतू पटवारी उतर आए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकारों में शुरू की गई संवैधानिक संस्थाओं और देश के संस्थागत ढांचे को भारतीय जनता पार्टी हमेशा से ही हड़पने का काम करती रही है। इसका ताजा उदाहरण राजधानी भोपाल के इतवारा रोड़ रेडक्रास भवन को नियमविरूद्व तरीके से आरएसएस के अनुसांगिक संगठन सेवा भारती को सौंपा जाना है।
कांग्रेस सरकार के दौरान दिया था भवन
पटवारी ने कहा कि यह भवन कांग्रेस सरकार के दौरान रेडक्रास सोसायटी को दिया गया था, जो मूलतः सरकार की संपत्ति है और किसी राजनैतिक संगठन को इसे दिया जाना नियमों के विरूद्व है। उन्होंने कहा कि पूर्व शिक्षा मंत्री मुकेश नायक द्वारा राजधानी भोपाल में रेडक्रास अस्पताल का शुभारंभ एक डाक्टर के साथ कराया गया था जब नायक ने इस संस्था को छोड़ा तक उसमें 70 डाक्टर कार्यरत थे और राजधानी के अधिकांश मरीज इस संस्था में अपना इलाज सुलभ और सस्ती दरों पर कराने के लिए आते थे। इतना ही नहीं नायक के कार्यकाल में दूसरा अस्पताल सिद्धांता रेडक्रास नाम से बना जो मप्र का नंबर वन अस्पताल के रूप में विख्यात है। पटवारी ने कहा कि जब नायक ने इन दोनों संस्थाओं को छोड़ा तक संस्था के नाम से 8 करोड़ की एफडी कराकर गये थे और उनके जाते ही अब वर्तमान में जो इस संस्था को संचालित कर रहे हैं उनके द्वारा एफडी को तोड़ दिया गया और अब मात्र कुछ लाख रूपये ही संस्था के बैंक में बचे हुए हैं। इसी एफडी की राशि से संस्था के सचिव ने अपनी सुविधाओं को बढ़ाने के लिए संस्था की राशि से एक नई इनोवा कार भी खरीद ली है।
आपदा नियंत्रण के लिए बनी रेडक्रास संस्था
पटवारी ने कहा कि मानवीय सेवा और आपदा नियंत्रण के लिए बनी इस रेडक्रास संस्था पर आरएसएस ने कब्जा जमा लिया है और इस संस्था का उपयोग अपने निजी स्वार्थों और सुविधाओं के लिए किया जा रहा है जो अमर्यादित और नियम विरूद्व है। इतना ही नहीं नायक द्वारा पूर्व में सभी सुविधाओं से सुसज्जित किये गये रेडक्रास में अब सोनोग्राफी, डायलिसिस, इनडोस्कापी, हार्ट का ईको जैसी सुविधाएं बंद कर दी गई है और टीएनटी टेस्ट भी बंद कर दिये गये हैं। दुर्भाग्यजनक है कि रेडक्रास द्वारा संचालित दवाईयों की दुकान संस्था के सचिव स्वयं चला रहे हैं।
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पटवारी ने कहा कि रेडक्रास संस्था ने सेंट्रल इंडिया का सबसे अच्छा ब्लड बैंक बनाया था, जहां मरीजों के लिए ब्लड आसानी से उपलब्ध हो जाता था, लेकिन अब इस ब्लड बैंक को बाजार का हिस्सा बना दिया गया है जो मरीजों के साथ खिलवाड़ है। रेडक्रास एक अंतरराष्ट्रीय और गैर-राजनीतिक संगठन है, जिसका उद्देश्य तटस्थ और निष्पक्ष रूप से मानव सेवा करना है। भवन को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े संगठन सेवा भारती को सौंपना, जनहित के नाम पर सरकारी संस्थाओं का दुरुपयोग करने का जीवंत उदाहरण है। जनहितैषी संस्थाओं को राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। यह फैसला प्रदेश के नागरिकों के लिए बेहद चिंता का विषय है।
क्या यह निर्णय सरकारी दबाव में लिया गया
पटवारी ने सवाल किया कि खाली पड़े इस भवन का उपयोग करने के लिए किसी गैर-राजनीतिक संगठनों को क्यों नहीं चुना गया, क्या यह निर्णय सरकारी दबाव में लिया गया है। उन्होंने कहा कि रेडक्रास भवन को सेवा भारती को दिये जाने के फैसले पर पुनर्विचार किया जाए और भवन का उपयोग वास्तव में तटस्थ और निष्पक्ष जनहितैषी संगठनों के लिए किया जाये। यह भवन सभी समुदायों के लिए समान रूप से उपयोगी होना चाहिए, न कि किसी विशेष विचारधारा का प्रचार करने का माध्यम बनना चाहिए।
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कांग्रेस सरकार के दौरान दिया था भवन
पटवारी ने कहा कि यह भवन कांग्रेस सरकार के दौरान रेडक्रास सोसायटी को दिया गया था, जो मूलतः सरकार की संपत्ति है और किसी राजनैतिक संगठन को इसे दिया जाना नियमों के विरूद्व है। उन्होंने कहा कि पूर्व शिक्षा मंत्री मुकेश नायक द्वारा राजधानी भोपाल में रेडक्रास अस्पताल का शुभारंभ एक डाक्टर के साथ कराया गया था जब नायक ने इस संस्था को छोड़ा तक उसमें 70 डाक्टर कार्यरत थे और राजधानी के अधिकांश मरीज इस संस्था में अपना इलाज सुलभ और सस्ती दरों पर कराने के लिए आते थे। इतना ही नहीं नायक के कार्यकाल में दूसरा अस्पताल सिद्धांता रेडक्रास नाम से बना जो मप्र का नंबर वन अस्पताल के रूप में विख्यात है। पटवारी ने कहा कि जब नायक ने इन दोनों संस्थाओं को छोड़ा तक संस्था के नाम से 8 करोड़ की एफडी कराकर गये थे और उनके जाते ही अब वर्तमान में जो इस संस्था को संचालित कर रहे हैं उनके द्वारा एफडी को तोड़ दिया गया और अब मात्र कुछ लाख रूपये ही संस्था के बैंक में बचे हुए हैं। इसी एफडी की राशि से संस्था के सचिव ने अपनी सुविधाओं को बढ़ाने के लिए संस्था की राशि से एक नई इनोवा कार भी खरीद ली है।
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आपदा नियंत्रण के लिए बनी रेडक्रास संस्था
पटवारी ने कहा कि मानवीय सेवा और आपदा नियंत्रण के लिए बनी इस रेडक्रास संस्था पर आरएसएस ने कब्जा जमा लिया है और इस संस्था का उपयोग अपने निजी स्वार्थों और सुविधाओं के लिए किया जा रहा है जो अमर्यादित और नियम विरूद्व है। इतना ही नहीं नायक द्वारा पूर्व में सभी सुविधाओं से सुसज्जित किये गये रेडक्रास में अब सोनोग्राफी, डायलिसिस, इनडोस्कापी, हार्ट का ईको जैसी सुविधाएं बंद कर दी गई है और टीएनटी टेस्ट भी बंद कर दिये गये हैं। दुर्भाग्यजनक है कि रेडक्रास द्वारा संचालित दवाईयों की दुकान संस्था के सचिव स्वयं चला रहे हैं।
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पटवारी ने कहा कि रेडक्रास संस्था ने सेंट्रल इंडिया का सबसे अच्छा ब्लड बैंक बनाया था, जहां मरीजों के लिए ब्लड आसानी से उपलब्ध हो जाता था, लेकिन अब इस ब्लड बैंक को बाजार का हिस्सा बना दिया गया है जो मरीजों के साथ खिलवाड़ है। रेडक्रास एक अंतरराष्ट्रीय और गैर-राजनीतिक संगठन है, जिसका उद्देश्य तटस्थ और निष्पक्ष रूप से मानव सेवा करना है। भवन को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े संगठन सेवा भारती को सौंपना, जनहित के नाम पर सरकारी संस्थाओं का दुरुपयोग करने का जीवंत उदाहरण है। जनहितैषी संस्थाओं को राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। यह फैसला प्रदेश के नागरिकों के लिए बेहद चिंता का विषय है।
क्या यह निर्णय सरकारी दबाव में लिया गया
पटवारी ने सवाल किया कि खाली पड़े इस भवन का उपयोग करने के लिए किसी गैर-राजनीतिक संगठनों को क्यों नहीं चुना गया, क्या यह निर्णय सरकारी दबाव में लिया गया है। उन्होंने कहा कि रेडक्रास भवन को सेवा भारती को दिये जाने के फैसले पर पुनर्विचार किया जाए और भवन का उपयोग वास्तव में तटस्थ और निष्पक्ष जनहितैषी संगठनों के लिए किया जाये। यह भवन सभी समुदायों के लिए समान रूप से उपयोगी होना चाहिए, न कि किसी विशेष विचारधारा का प्रचार करने का माध्यम बनना चाहिए।
